यिर्मयाह 43:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसलिए कारेह का पुत्र योहानान और दलों के सब प्रधानों और सब लोगों ने* यहोवा की यह आज्ञा न मानी कि वे यहूदा के देश में ही रहें।

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यिर्मयाह 43:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 43:4 का तात्पर्य और संदर्भ

यिर्मयाह प्रेषित की पुस्तक में यह भाग उन घटनाओं का वर्णन करता है जब बाबुली राज्य के नियंत्रण के दौर में यिर्मयाही प्रदत्त संदेशों के बीच यहूदियों ने यहोवा की आज्ञाओं पर टिके रहने की कोशिश की। 43:4 में कारेह पुत्र योहानान और दलों के प्रधानों सहित सभी लोग यह कहते हैं कि वे यहोवा की आज्ञा का पालन करते हुए यहूदिया के देश में ही रहें, परन्तु उन्हें जो वास्तविक परिणाम भुगतना पड़ा, वह यह था कि वे बाबुल से टकराते रहे और उनके निर्णयों से परमेश्वर की योजना प्रभावित होती रही।

ईश्वर और आस्था के बारे में इससे जो बातें स्पष्ट होती हैं

  • विश्वास के दायित्व: लिखे हुए संदेश के अनुसार, परमेश्वर के निर्देशों के प्रति निष्ठा उसका उचित मार्ग था; परन्तु बंधनों के बीच वे वही रास्ता खोजने लगे जो उनके स्वार्थ से मेल खाता था।
  • विश्वास बनाम आत्म-स्वार्थ: यह घटना यहूदियों के लिए परीक्षा है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए कब तक येलो-आत्म-परिवर्तन और ग्रह-प्रतिष्ठा पर निर्भर रहते हैं, बनाम परमेश्वर की योजना के साथ कदम मिलाते हैं।

महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्ट व्याख्या

“यहोवा की आज्ञा न मानी” का अर्थ है धार्मिक-आचरण में परमेश्वर के निर्देशों के प्रति कठोर समर्पण और विश्वास का प्रदर्शन करना—या फिर उनके निर्देशों के अनुरूप कठिन निर्णय लेना। खेलता हुआ imagery यह संकेत देता है कि देश-प्रवास और रहने के अभ्यासी कदम परमेश्वर के मार्गदर्शन के अनुसार होने चाहिए थे, न कि राजनीतिक सुरक्षा या जातीय स्वार्थ के अनुसार।

अन्य प्रासंगिक खंड (cross-references)

• यिर्मयाह 42:3-6: यहूदियों के निर्णय-प्रक्रिया और बिदाई के पूर्व परमेश्वर की योजना के साथ संरेखण का प्रश्न। यह दिखाता है कि धार्मिक निर्देश को छोड़कर अन्य मार्ग ढूंढना असफलता का कारण बना।

• 1 राजा 12:25-33: राजा और लोगों के धार्मिक-राजनीतिक निर्णयों के साथ उपदेश, जिसमें एकता और परमेश्वर के निर्देश के बीच संतुलन घटित होता है।

• दान 3:15-18: विश्वास की कसौटी में परमेश्वर पर निर्भर रहने की प्रेरणा, जब मानव-नीतियाँ असंगत पड़ती हैं।

आधुनिक APPLICATION

आज के संदर्भ में यह संदेश हमें यह सिखाता है कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, ईश्वर की आज्ञाओं के प्रति वफादारी बनाए रखना है। कठिन निर्णयों में भी हमारी सुरक्षा और दिशा परमेश्वर के वचन की वास्तविकता पर टिकनी चाहिए, न कि केवल जीवन-सरकार की सुरक्षा या सामाजिक-धर्म-निर्भरता पर। समुदाय में बंटे हुए दिशा-निर्णय के समय भी ईश्वर के निर्देश को पहले रखना चाहिए, ताकि परिणाम शुद्ध हो और भविष्य के लिए स्पष्ट मार्ग मिल सके।

उद्धरण (आधार-स्त्रोत से सीधे शब्द)

यदि उपलब्ध हो, इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे उद्धरणों का उल्लेख किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 43:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब उन्होंने यिर्मयाह से कहा, “यदि तेरा परमेश्‍वर यहोवा तेरे द्वारा हमारे पास कोई वचन पहुँचाए और यदि हम उसके अनुसार न करें*, तो यहोवा हमारे बीच में सच्चा और विश्वासयोग्य साक्षी ठहरे।

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2 इतिहास 25:16 (HINIRV) »
वह उससे कह ही रहा था कि उसने उससे पूछा, “क्या हमने तुझे राजमंत्री ठहरा दिया है? चुप रह! क्या तू मरना चाहता है?” तब वह नबी यह कहकर चुप हो गया, “मुझे मालूम है कि परमेश्‍वर ने तेरा नाश करना ठान लिया है, क्योंकि तूने ऐसा किया है और मेरी सम्मति नहीं मानी।”

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भजन संहिता 37:3 (HINIRV) »
यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह।

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