Old Testament
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मत्ती 3:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और अब कुल्हाड़ा पेड़ों की जड़ पर रखा हुआ है, इसलिए जो-जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।
मत्ती 3:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 3:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यूहन्ना 15:6 (HINIRV) »
यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली के समान फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं।

लूका 3:9 (HINIRV) »
और अब कुल्हाड़ा पेड़ों की जड़ पर रखा हुआ है, इसलिए जो-जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।”

यूहन्ना 15:2 (HINIRV) »
जो डाली मुझ में है*, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छाँटता है ताकि और फले।
यही पेड़, यही फल: रूट से जड़ तक फल की प्रामाणिकता
मत्ती 3:10 में कहा गया यह कथन यीशु के काम के पहले ही जोश से भरे प्रचार की एक सरल, कटौती-पूर्ण चेतावनी है: पेड़ जिस दिन अच्छा फल नहीं लाता, उसे काटकर आग में झोंक दिया जाएगा। यह सीधे तौर पर न्याय के मापक को स्पष्ट करता है—जीवन का वास्तविक संकेत उसका व्यवहार है, नाक की कोई आडंबर नहीं।
संदर्भभूमि
यह आयत बपतिस्मा देती प्रेषित के समय के सामाजिक-धार्मिक सतर्कता का हिस्सा है। यद्यपि जड़ें असल में पेड़ पर निर्भर करती हैं, परन्तु इस उद्धरण का लक्ष्य दिखाने के लिए है कि ईश्वर के royaume में प्रवेश के लिए भली-भांति परिवर्तन और परिणाम-उन्मुख जीवन आवश्यक है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य बिंदु
संबंधित संदर्भ
1) तुला-पेड़ की विवेचना: जब व्यक्ति का आचरण सही नहीं, तो उसका सामाजिक और आध्यात्मिक प्रभाव भी नकारात्मक होगा। यह किसी भी धार्मिक व्यक्ति के लिए चेतावनी है कि वह बाहर की दिखावट से नहीं, भीतर के परिवर्तन से मापा जाए।
2) धर्म-शुद्धता बनाम व्यवहार-प्रभाव: मात्र सिद्धांतों से नहीं, दैनिक व्यवहार से ईश्वर के राज्य के आच्छादन का मापन होता है।
3) न्याय और सार्थकता: आशीर्वादों के साथ-साथ दायित्व भी आते हैं—फल के बिना जीवन निष्क्रिय माना जाएगा।
व्यावहारिक निष्कर्ष
प्रत्येक विश्वासी को अपने जीवन के फल की सचाई पूछनी चाहिए: क्या मेरा आचरण प्रेम, ईमानदारी और परिश्रम से भरा है? क्या मैं अपने日前-जीवन में ईश्वर के राज्य के नियमों के अनुसार हलचल कर रहा हूँ? यदि उत्तर नहीं है, तो बदलाव की दिशा में कदम उठाने वाला जीवन ही औचित्यपूर्ण है।
कथन-संयोजन (संदेश का सार)
कुल्हाड़े के पेड़ का प्रतीक यह बताता है कि ईश्वर के निर्णय में असली कसौटी फल है—जो पेड़ अच्छी फसल नहीं देता, उसे काटकर आग में डाल दिया जाता है। यह संदेश प्रेरित करता है कि हमारे जीवन में सचमुच परिवर्तन जरूरी है, ताकि हम ईश्वर के राज के योग्य बनें और अंतिम বিচার में सुरक्षित रहें।
यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समान, सीधे और व्यवहारिक ढंग में प्रस्तुत किया गया है। उद्धरण के स्थान पर पाठ-समर्थन के रूप में ही उनके अभिधात्मक विचारों का उद्देश्य समेकित किया गया है।