Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमत्ती 3:15 बाइबल पद की व्याख्या
मत्ती 3:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यीशु ने उसको यह उत्तर दिया, “अब तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।” तब उसने उसकी बात मान ली।
मत्ती 3:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मत्ती 3:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यूहन्ना 4:34 (HINIRV) »
यीशु ने उनसे कहा, “मेरा भोजन यह है, कि अपने भेजनेवाले की इच्छा के अनुसार चलूँ और उसका काम पूरा करूँ।

भजन संहिता 40:7 (HINIRV) »
तब मैंने कहा, “देख, मैं आया हूँ; क्योंकि पुस्तक में मेरे विषय ऐसा ही लिखा हुआ है।

यूहन्ना 13:15 (HINIRV) »
क्योंकि मैंने तुम्हें नमूना दिखा दिया है, कि जैसा मैंने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो।
reader-friendly overview
मत्ती 3:15 में यीशु और यूहन्ना बैपटिस्ट के बीच एक साधारण, पर महत्त्वपूर्ण संवाद दिखता है। यूहन्ना ने जड़-धर्म के अनुसार यीशु के लिए बपतिस्मा माँगा, किन्तु यीशु ने बतलाया कि धार्मिकता की पूर्णता के लिए यह कर्म आवश्यक है ताकि सब कुछ हों सही तरीके से पूर्ण हो जाए। यह वचन दर्शाता है कि ईश्वर की योजनाओं के अनुरूप हर क्रिया का स्थान और उद्देश्य होता है, भले ही वह पहली दृष्टि में साधारण या अनुकूल न लगे।
अध्याय के भीतर यह verse क्यों महत्त्वपूर्ण है
इस घटना में यीशु की धार्मिकता की पूर्णता स्पष्ट होती है—वह अपने समाज के मानकों से ऊपर उठकर धर्म की निभाव में पूर्णता चाहते हैं। यह भी दर्शाता है कि यीशु ने न केवल अपनी पहचान को स्वीकृति दी, बल्कि अपने लक्ष्य के अनुरूप धार्मिकता को स्थापित करने के लिए पहले से चल रहे नियमों के अनुरूप एक कदम को अपनाया।
मूल मानसिक प्रशिक्षण: मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
समान प्रचलित संदर्भों से तुलना
- मत्ती 3:14-15 में यूहन्ना ने यीशु को बपतिस्मा देने से इनकार किया था, किंतु यीशु ने कहा कि यह धार्मिकता की पूर्ति के लिए उचित है। यह तर्क दिखाता है कि परमेश्वर के निर्णय कभी भी मानव नियमों से ऊपर नहीं होते, पर वे नियमों के भीतर रहते हैं।
- लूका 3:21-22 में यीशु अपना बपतिस्मा लेने के समय आकाश से स्वर्गीय आवाज़ सुनाई देती है—यह घटना पुष्टि करती है कि यीशु का यह कदम परमेश्वर की योजना से जुड़ा है और उसे मंज़ूरी मिली है।
पवित्रशास्त्रीय क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके अर्थ
• व्यवस्था की धार्मिकता की पूर्ति: यह वाक्य बताता है कि यीशु ने सही समय पर सही कदम उठाकर धर्म और कानून की गहराई को पूरा किया।
• उदाहरण के रूप में ईसाई जीवन में धर्म की पूरी निष्ठा: यह दिखाने के लिए कि हमें भी ईश्वर की व्यवस्था के अनुरूप चलना चाहिए, भले ही वह हमारे समझ से बाहर क्यों न हो।
praktikal application: आज के पाठक के लिए
- आध्यात्मिक जीवन में धर्म की पूर्णता के लिए नियमों का पालन आवश्यक है, पर यह केवल औपचारिक प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि दिल से पालन हो।
- जब कभी किसी कदम को लेकर संदेह हो, तो याद रखें कि यीशु ने धार्मिकता को पूरा करने के लिए सही समय पर सही मार्ग चुना।
विभागीय सार
यीशु ने कहा कि “हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।” यह कथन धर्म के प्रति उसकी दृष्टि को स्पष्ट करता है: न केवल स्वीकृति, बल्कि सत्यापित और मान्य नियमों के भीतर धार्मिकता की पूर्णता। इस लिए हम भी अपने विश्वास के पथ पर नियमों के साथ अपने दिल की ईमानदारी बनाए रखें।
cross-references with brief notes
- मत्ती 3:14-15: यीशु के बपतिस्मा की भूमिका और धर्म की पूर्ति का मुख्य विवरण।
- लूका 3:21-22: आकाश की उद्घोषणा और पिता की पुष्टि—यीशु के धर्मी कदम की पुष्टि।
- रोम 8:4: आत्मा के द्वारा धर्म की उत्तरण—हमारे कदमों में भी परमेश्वर की व्यवस्था का प्रभाव।
उद्धरण स्रोत (मत्ती हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क):
- “केवल हमारी धार्मिकता पर्वत-समरूपी न होकर परमेश्वर की इच्छा के अनुसार पूरी है।” (सार-सार, Matthew Henry के विचार) • यह धारणा कि धार्मिकता का maksat परमेश्वर के अनुरूप है, स्पष्ट रूप से इस वाक्य में परिलक्षित है।
- “यीशु की ओर से यह कदम नहीं था कि वह केवल एक रीतिगत कर्म करें, बल्कि वह यह दिखाते हैं कि धर्म कानून के भीतर सच है, ताकि अघोषित तर्क भी पूर्ण हो।” (Albert Barnes की टिप्पणी के सार) • प्रमुख संदेश: कर्म और नियम के साथ आत्म-समर्पण।
- “धार्मिकता की पूर्ति के लिए यही नियम है—उचित समय पर सही कदम।” (Adam Clarke का संकलन) • यह उद्धरण इस पाठ की एकरूपता को मजबूत बनाता है।