Old Testament
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मत्ती 3:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और अपने-अपने मन में यह न सोचो, कि हमारा पिता अब्राहम है; क्योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि परमेश्वर इन पत्थरों से अब्राहम के लिये सन्तान उत्पन्न कर सकता है।
मत्ती 3:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 3:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लूका 3:8 (HINIRV) »
अतः मन फिराव के योग्य फल लाओ: और अपने-अपने मन में यह न सोचो, कि हमारा पिता अब्राहम है; क्योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि परमेश्वर इन पत्थरों से अब्राहम के लिये सन्तान उत्पन्न कर सकता है।

गलातियों 3:27 (HINIRV) »
और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहन लिया है।

रोमियों 9:7 (HINIRV) »
और न अब्राहम के वंश होने के कारण सब उसकी सन्तान ठहरे, परन्तु (लिखा है) “इसहाक ही से तेरा वंश कहलाएगा।” (इब्रा. 11:18)
मत्ती 3:9 पर टिप्पणी — परमेश्वर की सन्तान निर्माण की स्वतंत्र सत्ता
पृष्ठभूमि: यूहान्न मसीही प्रचारक जॉन बपतिस्मा के उपदेश के बीच यह वाक्य आता है, जब वे यहूदी नेता-युवा और बहिर्गमन लोगों में यह दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि धार्मिक पहचान से परमेश्वर के आशीर्वाद मिलना नहीं मुमकिन है। वे यह स्पष्ट करते हैं कि दाऊदी समाज की सामाजिक-धार्मिक पहचान से भी परमेश्वर की कृपा नहीं जुड़ती; उसे सच्चे हृदय के विश्वास और परिवर्तन की आवश्यकता है।
मुख्य अभिप्राय
यह verse यह सन्देश देता है कि परमेश्वर के वरदान की सत्ता उसकी इच्छा-प्रियता पर निर्भर है, न कि हमारे पूर्व-निर्धारित पहचानांक पर। यहाँ पत्थरों से अब्राहम के बच्चों की बात कर के यह दिखाया गया है कि ईश्वर सीमाओं में नहीं बँधते; अगर वह चाहें तो निर्बल या असम्भव परिस्थितियों में भी पौधे उगाते हैं। धार्मिक सम्पन्नता और उत्पत्ति-आधार पर गर्व करना गलत है; भरोसा उसकी कृपा और आशीर्वाद पर रखना चाहिए।
दो-तीन मुख्य विषय
संबद्ध अनुभाग (कथनों के साथ सम्बन्ध)
• लुक 3:8–9 में बपतिस्मा-योग्य पेड़ों की भविष्यवाणी और प्रभु-प्रशंसा की आवश्यकता बताई गई है; परिणामस्वरूप ईश्वर उन पर कृपा करेगा जो परिवर्तनपूर्ण विश्वास में हैं।
• रोम 9:6–8 में स्पष्ट है कि परमेश्वर की योजना में “सच्चे पुत्र" की परिभाषा वह नहीं जो जन्म से आते हैं, बल्कि जो श्रद्धा में विश्वासयोग्य रहते हैं।
• जेम्स 2:18-19 में दिखता है कि विश्वास और कर्म एक साथ चलते हैं; मात्र कह देना पर्याप्त नहीं, उसे जीवन में दिखाना पड़ता है।
व्यावहारिक चिंतन
हम में से हर एक को यह प्रश्न करना चाहिए: क्या मैं अपनी धार्मिक पहचान या सामाजिक स्थिति पर निर्भर होकर आत्म-विश्वास बनाये रख रहा हूँ? क्या मैं परमेश्वर के आशीर्वाद के लिए स्वयं को तैयार करते हुए, हृदय की नम्रता और ईमानदारी से उसके सामने आने की कोशिश कर रहा हूँ? यदि परमेश्वर पत्थरों से पुत्र बनाते हैं, तो मेरा छोटा-सा विश्वास भी उद्धार के कार्य को प्राप्त कर सकता है।
छोटा क्रॉस-रेफरेंसेस संग सार्थक परिलक्षण
• मरकुस 12:27 — देवता पिता के पास जीवन और मृत्यू दोनों की अधिकारिता है; वह कीर्तन को नहीं छोड़ते।
• रोम 4:17 — “जो बड़ी आशा के कारण विश्वास करता है”; परमेश्वर के प्रतिज्ञान के अनुसार उसे जीवन देता है।
• 1 पतरस 1:3 — हमारे नवीन जन्म की वजह, परमेश्वर की करुणा और उद्धार की आशा।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वचन आलोचना नहीं, प्रेरणा है कि परमेश्वर की सच्ची संतति उसकी कृपा से ही बनती है — न किसी जाति, न किसी ऐतिहासिक पहचान पर निर्भर होकर। इसलिए अपना भरोसा उसे दें, और हृदय परिवर्तन के लिए तैयार रहें।
उद्धृत विचार (public-domain Kommentarियों के उद्धरण):
मैथ्यू हेनरी से संक्षिप्त विचार: “धर्मपूर्वक उद्धार का मार्ग मन की सच्ची परिवर्तन से होकर जाता है, न कि बाहरी आडंबर से।”
एल्बर्ट बार्न्स से संक्षिप्त विचार: “परमेश्वर की कृपा बिना किसी पूर्व-निर्धारण के नई सन्तान बनाती है।”
एडम क्लार्क से संक्षिप्त विचार: “ईश्वर की सत्ता हर बाधा को चुनौती देती है; वह पत्थरों से भी पुत्र उत्पन्न कर सकता है।”
नोट: ऊपर के उद्धरण क्रमशः हेनरी, बार्न्स और क्लार्क के सामुदायिक-उद्धरण स्वरूप संक्षेपित हैं और पूर्ण वाक्यों के रूप में नहीं दिए गए हैं।