Old Testament
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मत्ती 3:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और यह आकाशवाणी हुई, “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ।”* (भज. 2:7)
मत्ती 3:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 3:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 42:1 (HINIRV) »
मेरे दास को देखो जिसे मैं सम्भाले हूँ, मेरे चुने हुए को, जिससे मेरा जी प्रसन्न है; मैंने उस पर अपना आत्मा रखा है, वह जाति-जाति के लिये न्याय प्रगट करेगा। (मत्ती 3:17, लूका 9:35,2 पत. 1:17)

मत्ती 17:5 (HINIRV) »
वह बोल ही रहा था, कि एक उजले बादल ने उन्हें छा लिया, और उस बादल में से यह शब्द निकला, “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं प्रसन्न हूँ: इसकी सुनो।”

भजन संहिता 2:7 (HINIRV) »
मैं उस वचन का प्रचार करूँगा: जो यहोवा ने मुझसे कहा, “तू मेरा पुत्र है; आज मैं ही ने तुझे जन्माया है।” (मत्ती 3:17, मत्ती 17:5, मर. 1:11, मर. 9:7, लूका 3:22, लूका 9:35, यूह. 1:49, प्रेरि. 13:33, इब्रा. 1:5, इब्रा. 5:5, 2 पत. 1:17)
मत्ती 3:17 पर टिप्पणी—यह मेरा प्रिय पुत्र है
मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु: ईश्वरीय स्वीकारोक्ति और पिता-पूर्वज्ञीय संबंध। इस वचन में पिता परमेश्वर का उद्घोष है कि यीशु के सामने वे प्रसन्न हैं, न कि केवल उनका चुनाव, बल्कि उनकी पहचान और मिशन की स्वीकृति। यह घोषणा क्रियात्मक रूप से ईस्वर के चahrित्रण के रूपांतरण के बाद भी जीवनभर यीशु के दायित्वों को ठोस बनाती है: वह अपने पिता की आशा के अनुरोध पर पूर्णतया समर्पित है और विश्व की उद्धार योजना में केंद्र बिंदु बनता है।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरीकॉन्टेक्स्ट)
यह वाक्य मत्ती के प्रारम्भिक अध्यायों में एक त्रयी-घटना के बीच आता है— यीशु का प baptism हो जाना और परमेश्वर की यह उद्घोषणा। यह घटना यूहन्ना बैप्स्टीज के प्रवचन के साथ एक साथ आती है, जहां आत्मा दक्षणी रूप में शांति-नीड़ पर उतरती है; फिर यह आकाशवाणी बताती है कि यीशु परमेश्वर के पुत्र हैं। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसी सार्वजनिक-domain टीका-लेखकों के अनुसार, यह उद्घोषणा एक कानूनी-आशीर्वाद-स्वीकृति है, जो यीशु के दुखद, निर्बन्धित सेवा-यात्रा के लिए आध्यात्मिक अधिकार-संरचना बनाती है। “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिसे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ”—यह शब्द पुत्र के निष्ठा-पूर्ण प्रेम और पिता की अप्रतिम स्वीकृति को उजागर करते हैं।
वैचारिक गरिमा और ठोस संदर्भ
1) पिता-स्वीकृति: यीशु का प baptism एक आधिकारिक पुष्टि है—पिता उसका उद्धारकार्य स्वीकार करते हैं। यह दर्शाता है कि यीशु, पृथ्वी पर देव-कार्य के लिए भेजा गया है, न कि मानव-योजना के विरुद्ध।
2) पुत्र-रूप में पहचान: यह उद्घोष यीशु की परमात्मीय-गणना और उसकी मिशन-उद्देश्य को स्पष्ट करता है—उन्हें त्रुटिहीन प्रेम और निष्ठा के साथ भेजा गया है।
3) प्रसन्नता का स्वर: पिता की प्रसन्नता यह संकेत है कि सत्य और धर्म का रास्ता, obedience और पूर्ण आचरण के साथ चलना, परमेश्वर की इच्छा के साथ संगत है।
परिशुद्ध सृजनात्मक सम्बन्ध (Cross-References)
इन संदर्भों के भीतर, उद्घोषणा यह उद्धार-योजनाओं का केंद्र बिंदु बन जाती है: एक सुशासन-शासन वाले प्रभु के रूप में यीशु, दिव्य प्रेम से भरे हुए, मानवता के लिए पूर्णतया समर्पित।
Reflection के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह आकाशवाणी परम-पिता के परम-प्रेम और यीशु की मिशन-स्वीकृति का अभिध्यान है—एक ऐसी उद्घोषणा जो धार्मिक प्रवचनों से ऊपर उठकर क्रियाशील आचार-स्तर तक जाती है। यीशु के पुत्रत्व के इस उद्घोष से समझ आता है कि उद्धार का रास्ता पिता की इच्छा के अनुरूप, अविनाशी प्रेम और पूर्ण विश्वास पर टिकता है।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण नोट: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी-रूपों में से, नीचे के पंक्तियों के साथ सीधा उद्धरण उपलब्ध हैं—“यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिसे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ”—यह उद्घोष स्वयं मूल पाठ से जुड़ा है और उसी भाव को स्पष्ट करता है।