Old Testament
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मत्ती 3:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और अपने-अपने पापों को मानकर यरदन नदी में उससे बपतिस्मा लिया।
मत्ती 3:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 3:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रेरितों के काम 19:18 (HINIRV) »
और जिन्होंने विश्वास किया था, उनमें से बहुतों ने आकर अपने-अपने बुरे कामों को मान लिया और प्रगट किया।

यूहन्ना 1:25 (HINIRV) »
उन्होंने उससे यह प्रश्न पूछा, “यदि तू न मसीह है, और न एलिय्याह, और न वह भविष्यद्वक्ता है, तो फिर बपतिस्मा क्यों देता है?”

मुख्य व्याख्या बिंदु
यरदन नदी में उनके पाप स्वीकार कर बपतिस्मा लेने की घटनायें यहाँ सार्वजनिक पाप-स्वीकृति और परमेश्वर के राज्य के लिए आगमन की तैयारी को दर्शाती हैं। यीशु के शुरूआती प्रचार-कार्य से पहले जार्ज के समय में यह दावत, प्रेरणा और नैतिक परिवर्तन के संकेत हैं।
साहित्यिक संदर्भ
यह पद मत्ती 3:6 में नागरिकों के पाप स्वीकार कर नदी-जल में बपतिस्मा लेने की तस्वीर प्रस्तुत करता है। ईश्वर के राज के आगमन के पूर्व, जॉने थे, जो अपने पापों को मानकर पश्चात्ताप कर रहे थे। बपतिस्मा यहाँ प्रतीक है—पाप से बदली हुई मानसिकता और परमेश्वर के साथ एक नई शुरुआत। संदर्भ में यह एक समूह-जागृति का दृश्य है, जिसे आगे के पदों में यीशु के बपतिस्मा और प्रेरितों के प्रवचन से जोड़ा गया है।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व
इस पाठ के तीन प्रमुख तथ्य हैं: (1) पश्चात्ताप की मान्यता—पापों को स्वीकार करना और आत्म-निरीक्षण करना; (2) संकल्पित परिवर्तन—बपतिस्मा से जुड़ी प्रतीकात्मक सफाई और नया जीवन की शुरुआत; (3) तैयारी का संकेत—यह बपतिस्मा मसीह के मंत्रालय के आगमन के अग्रदर्शक के रूप में काम करता है। पुराने और नए नियम में बपतिस्मा का स्वरूप परिवर्तनशील है, परन्तु यहाँ यह नैतिक-आत्मिक परिवर्तन की आधिकारिक मान्यता है।
पवित्रशास्त्रीय कड़ियाँ (Cross-references)
उपरोक्त संदर्भ एक समेकित दृश्य बनाते हैं जहाँ पाप-स्वीकृति, बपतिस्मा, और राज-आगमन के बीच समन्वय स्पष्ट होता है।
विचार-विमर्श के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यरदन में लोगों द्वारा अपने पापों को मानकर बपतिस्मा लेना संदेश देता है कि परमेश्वर के राज्य के लिए तैयारी सरल आस्था नहीं, बल्कि आध्यात्मिक परिवर्तन की आवश्यक प्रक्रिया है। यह घटना मसीह के आगमन के पीछे की नैतिक संकल्प और परिवर्तन की गूंज है, जो आगे के उद्धार-कार्य के लिए द्वार खोलती है।
विशेष उद्धृत तत्त्व
यदि आप इस अनुवाद के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट शब्द-उद्धरण ढूंढ़ना चाहें, तो वे इस घटना को पाप-स्वीकृति और बपतिस्मा के प्रतीक के रूप में व्याख्यायित करते हैं—परन्तु इस प्रस्तुति में हमने उनके संकल्पनात्मक संकेतों को एक संयुक्त, निर्बाध हिंदी रूप में संकलित किया है।