Old Testament
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मत्ती 3:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यरूशलेम के और सारे यहूदिया के, और यरदन के आस-पास के सारे क्षेत्र के लोग उसके पास निकल आए।
मत्ती 3:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 3:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मरकुस 1:5 (HINIRV) »
सारे यहूदिया के, और यरूशलेम के सब रहनेवाले निकलकर उसके पास गए, और अपने पापों को मानकर यरदन नदी* में उससे बपतिस्मा लिया।

मत्ती 11:7 (HINIRV) »
जब वे वहाँ से चल दिए, तो यीशु यूहन्ना के विषय में लोगों से कहने लगा, “तुम जंगल में क्या देखने गए थे? क्या हवा से हिलते हुए सरकण्डे को?

लूका 16:16 (HINIRV) »
“जब तक यूहन्ना आया, तब तक व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता प्रभाव में थे। उस समय से परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार सुनाया जा रहा है, और हर कोई उसमें प्रबलता से प्रवेश करता है।
मत्ती 3:5 का संदर्भ और अर्थ
युहन्ना दाता (याह्वे के संदेशवाहक) के उपरोक्त प्रसंग में यह पद दर्शाता है कि मसीह के आगमन से पूर्व यहूदिया और यरूशलेम के लोगों में एक अत्यंत व्यापक जागरण-उत्साह उठा। यीशु की बपतिस्मा-यात्रा से पहले-यानी जब कुरेआन ने उत्तर दिया कि यहूदियों के नेता, जन-जन, और नदी-किनारे के क्षेत्रों के लोग सब एकत्र आ रहे हैं—यह दर्शाता है कि परमेश्वर के काम की सूचना जल-स्तर के ऊपर और नीचे हर जगह फैल रही थी। यह खबर सत्य के प्रकाश के पहले संकेत के रूप में उभरी: जनता तैयारी कर रही थी, पाप से मुक्ति के लिए दिल खोल रहे थे, और बपतिस्मा के प्रतीकात्मक औचित्य के लिए तत्पर थे।
मुख्य अर्थ
इस verse में जनता का विशाल प्रवाह दिखता है जो एक नए दौर की आशा को दर्शाता है—जो ईश्वर के आगमन के समय और संदेश को ग्रहण करने को तैयार थे। यह केवल टीका-चिह्न नहीं है, बल्कि यह उस परिवर्तन की मांग है जो दया, पश्चाताप और सचाई के रास्ते पर ले जाता है।
दो-तीन केंद्रीय विषय
संबद्ध उद्धरण और विचार
कई प्राचीन टिप्पणीकार इस दृश्य को एक बड़े प्रवाह के रूप में देखते हैं—जिनमें माउंटिंग-प्रवृत्ति के बजाय जन-संक्रांति और पाप के विरुद्ध तैयारी का प्रमुख स्वर रहता है।
यद्यपि हम सीधे ग्रंथ के शब्द का अनुसरण करें, यह भी समझना आवश्यक है कि यह एक समाज-व्यापी आह्वान है जो व्यक्तिगत परिवर्तन के साथ पूरी सभ्यता को नये मोड़ पर ले जाता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त जोड़
1) मत्ती 4:17 — जहां यीशु भी अपने प्रचार की शुरुआत में बुलाहट देते हैं: फलदायी परिवर्तन का संदेश पहले पहुँचता है।
2) मरकुस 1:5 — गांव-गांव से लोग बपतिस्मा लेने और आत्म-समर्पण के प्रतीक को ग्रहण करते हैं।
3) लूका 3:3 — आत्म-संस्कार और पश्चाताप के रास्ते पर जनता की खोज।
व्यावहारिक चिंतन
आज के समय में यह संदेश स्मरण दिलाता है कि धार्मिक तीर्थ-यात्रा से अधिक महत्वपूर्ण है दिल की तैयारी—पद-चिह्नों के भीतर पश्चाताप और सच-जीवन का अंगीकार। अपने जीवन के उन हिस्सों की जाँच करें जहाँ आप सच्चाई और दया के मार्ग पर बढ़ना चाहते हैं।
संक्षिप्त समापन
5 से शुरू होकर सभी क्षेत्रों का यह प्रवाह दर्शाता है कि ईश्वर के मुख्य संदेश का प्रसार एक समग्र जागरण बनकर फैल रहा था—जहाँ लोग पथ साफ करने, दिल बदलने और मसीह के आगमन के लिए तैयार रहने को प्रेरित थे। यह घटना आज भी हमें तैयारी और परिवर्तन के महत्व की याद दिलाती है।
नोट: परंपरागत टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचार—अगर आवश्यक हों—उनमें Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण केवल तभी बताये जाते हैं जब उपलब्ध हों।