1 शमूएल 2:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा मारता है और जिलाता भी है; वही अधोलोक में उतारता और उससे निकालता भी है।

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1 शमूएल 2:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

यह छंद क्यों महत्वपूर्ण है

1 शमूएल 2:6 में व्यक्त एक अडिग सत्य यह है कि ईश्वर सभी परिस्थितियों पर शासन करता है—जीवन में उठापटक और मृत्यु के क्षणों में भी। यहवाणी दर्शाती है कि परमेश्वर ही जीवन और मौत के संचालक हैं, और वह बिना किसी पूर्व सूचना के किसी की दशा पलट सकता है। इस संदेश में हमें आश्वस्ति मिलती है कि हमारे प्रभु के हाथ में न केवल सुख और आनंद है, बल्कि दुख और क्षति का भी नियंत्रण है।

पार背景 और मूल संदर्भ

यह पद यहोवा के शासन के दायरे को स्पष्ट करता है—वह मारता है और जिलाता है; अधोलोक में उतारता और उससे निकालता है। यहूत समय के इस भाग में यहूदा और इस्राएल के नेता-योधाओं के बीच सत्य की आवश्यकता पर बल देता है कि जीवन की घटनाओं के पीछे एक परमपूज्य सत्ता है। शतोत पुराने नियम में ऐसे अनेक स्थान मिलते हैं जहां परमेश्वर के निर्णय के बिना एक बाल भी नहीं गिरता; यह संदर्भ यह स्पष्ट करते हैं कि इतिहास और व्यक्तिगत जीवन दोनों में उसकी योजनाएं मोड़ती हैं, परन्तु वह उन मोड़ों में भी अपनी न्यायपूर्ण प्रजा की सुरक्षा और उद्धार सुनिश्चित करता है।

मुख्य संदेश

मुख्य संदेश यह है कि जीवन की प्रकृति—जीवन आना और जाना—ईश्वर के हाथ में है। यह पद इसलिए भी अहम है ताकि विश्वासी अपने दिल के भय को त्याग कर निर्भय होकर जीएं, यह जानते हुए कि परमेश्वर हर घटना सेपरखा और संचालित है। यह हमें निर्भरता, नम्रता और परमेश्वर की के अनुसार आचरण की शिक्षा देता है।

धर्मशास्त्रीय विषय और थीम

  • ईश्वर की सर्वोच्च सत्ता और संहिता
  • जीवन-और-मौत के कर्म और परिणाम
  • परमेश्वर की उद्धारकारी कृपा—कठिन समय में भी वह उद्धार का रास्ता खोलता है

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में explanations)

- यहोवा के निर्णयों की सार्वभौमिकता: आयतों में यह स्पष्ट है कि प्रभु सभी घटकों को नियंत्रित करते हैं, जीवन-स्थिति चाहे कैसी भी हो।

- ईश्वर की प्रतिश्रुति और उद्धार: कठिन समय में भी वह अपने लोक के लिए आशा बनते हैं और निकासी प्रदान करते हैं।

- वास्तविक विश्व में विश्वास की गवाही: संकट के बीच भी भक्त को परमेश्वर की योजना पर विश्वास रखने की प्रेरणा मिलती है।

प्रेरक टिप्पणी और पूर्व-वत लेखन की छाया

यह न केवल एक चेतावनी है कि जीवन में कठिनाइयाँ आ सकती हैं, बल्कि यह आश्वासन भी है कि परमेश्वर उन कठिनाइयों के पीछे एक उद्देश्य रखते हैं। पवित्रशास्त्र के प्रसिद्ध विद्वान मत्ती होनरी, अॅल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की साहित्य-छवि से यह विचार उभरता है कि परमेश्वर के निर्णयों में न्याय, करुणा, और उद्धार का संगम होता है।

“यहोवा मारता है और जिलाता है; वही अधोलोक में उतारता और उससे निकालता भी है”—यह कथन एक कठोर परिशुद्ध सत्य है, जिसे वे स्पष्ट करते हैं कि भगवान के हाथ से मृत्यु-जीवन की कड़ी है।

उद्धरण: यदि उपलब्ध हो, तो मॅथ्यू हेन्री, अल्बर्ट बर्न्स या एडम क्लार्क के संकलन में इसी प्रकार के दृढ़ोद्गार मिलते हैं, परन्तु यहाँ मूल संदेश स्वयंरेखा से जुड़ा है: परमेश्वर का निर्णय पूर्ण और न्यायपूर्ण है।

संक्षिप्त देवotional reflection

आज के दिन हमें याद रखना चाहिए कि हमारे जीवन की धारा भी ईश्वर के नियंत्रण में है। जो स्तर बिल्कुल स्पष्ट हो, वह यही कि भय के बजाय विश्वास अपनाएं—यदि जीवन में आघात आएं, तब भी प्रभु के पलटने की उम्मीद रखें। उसकी कृपा और उसकी योजना की गहराई में शांति मिलती है, भले ही परिस्थितियाँ विपरीत क्यों न हों।

आशय-बिंदु

1) परमेश्वर की सत्ता: वह जीवन-जीवन और मौत- मृत्यु का अधिकारी है।

2) उद्धार की आशा: कठिन समय में भी वह बचाव का रास्ता बनाते हैं।

3) विश्वास की सक्रियता: भरोसे पर टिके रहें, और परमेश्वर के काम को मान्य करें।

आउटलुक के लिए क्रॉस-रेफरेंसे

यही संदेश अन्य verses में भी मिलते हैं जहाँ परमेश्वर के निर्णयों की निर्भीकता और उद्धार की कृपा उजागर होती है; ये पाठ विश्वासी को धैर्य और भरोसे के साथ जीवन की राह पकड़ने का पाठ देते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 2:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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