1 शमूएल 2:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु शमूएल बालक बढ़ता गया और यहोवा और मनुष्य दोनों उससे प्रसन्‍न रहते थे। (लूका 2:52)

पिछला पद
« 1 शमूएल 2:25
अगला पद
1 शमूएल 2:27 »

1 शमूएल 2:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 शमूएल 2:26 – बालक शमूएल की उन्नति और ईश्वर-मानव दोनों की प्रसन्नता

यह छंद एक छोटी परन्तु गहरी स्थिति को दर्शाता है: शमूएल बालक के रूप में बढ़ता है, और यहोवा तथा मनुष्य—दोनों—उसे प्रसन्न रहते हैं। अध्याय यह दिखाते हैं कि परमेश्वर की कृपा का आरम्भ किसी का जन्मोत्सव नहीं, बल्कि उसकी आस्ति में धीरे-धीरे विकसित होने वाली सत्ता है। लूका 2:52 के साथ तुलना हमें दिखाती है कि गहराई से परवरिश और शिक्षा दोनों मानवीय विकास का मूल हैं—यानी शास्त्र-जीवन के साथ साथ सामाजिक सराहना भी एक साथ आती है।

पाठ का संक्षिप्त दृश्य

शमूएल, जो भविष्य में इस्राइल की बड़ी नबी और विधायक बनेंगे, अभी एक बालक के रूप में अपना दैनिक जीवन जी रहा है। उसका आचरण, बड़प्पन और परमेश्वर के साथ उसका संबंध यह बताता है कि देव-योजनाएं बच्चों में भी उभरती हैं और समाज उसे सम्मान देता है। यह पाठ हमें परिच्छेद-परिच्छेद में यह सिखाता है कि योग्यता सिर्फ बड़ी उम्र या कलह नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा और नैतिक आदर्श से बनती है।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

  • ईश्वर की कृपा प्रभावी ढंग से बच्चों में भी काम कर सकती है; वीरत्व और शुद्धता कोर्तन-योग्यता बनाती है।
  • परमेश्वर के उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता समाज से प्रशंसा जुटाती है, फिर भी सच्ची ताकत आंतरिक विश्वास और परमेश्वर के साथ निकटता से आती है।

अन्य शास्त्रीय टिप्पणी से संबंध

हिंदी सद्भाव की धारा में Matthew Henry और Adam Clarke के विचार मिलते हैं कि शमूएल का विकास एक अभ्यास-आधार पर केंद्रित है—नैतिकता, भक्तिपूर्ण जीवन, और परमेश्वर के प्रेरक पाठ के आंतरिक प्रभाव से। Barnes भी इस अवस्था को योग्य और नि:स्वार्थ आचरण के रूप में देखते हैं, जिसमें बालक की प्रेरणा और पठन-पाठन समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

क्रॉस-रेफरेन्स

याद रखें: पहला क्रॉस-रेफरेंस क्षेत्र में लुक 2:52—व्यक्ति में ज्ञान, पुरस्कार और प्रसार का चक्र; दूसरा संदर्भ 1 समूएल 1:11, 1:20 जहाँ बच्चों की पवित्र बुलाहट और ईश्वर-योजनाओं का प्रारम्भ दिखता है; तीसरा संदर्भ मल 2:15—परिवार में पवित्रता का संकल्प और नैतिकता की स्थिरता। इन आयतों से दिखता है कि बच्चों की संवर्धना, परमेश्वर-योजनाओं के साथ कैसे जुड़ी रहती है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • परिवार में बच्चों के आचरण पर सजग रहें; उनके नैतिक शिक्षा और ईश्वर-आस्था के निर्माण के लिए नियमित देह-आत्मिक अभ्यास अपनाएं।
  • स्कूल, चर्च या समुदाय में उन्हें सुरक्षित और समर्थ अनुभव दें ताकि वे बड़े होकर समाज के लिए सकारात्मक उदाहरण बनें।

संक्षेप निष्कर्ष

यह वाक्य हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर हर आयु में, हर परिस्थिति में अपने उद्देश्य को सिद्ध करता है। शमूएल का बाल्यकाल इसी शुभ संकेत का प्रस्तर है—ईश्वर के साथ निकटता और समाज की स्वीकृति, दोनों मिलकर एक पवित्र और प्रेरक जीवन की शुरुआत बनाते हैं।

उद्धरण सुझाव: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की टिप्पणी में संक्षिप्त कथन जब उपयुक्त हो सकता है, उसे ही आवाज दी जाएगी, ताकि पाठ और आध्यात्मिक अनुभूति एक साथ स्पष्ट हो सके।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 2:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

लूका 2:52 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लूका 2:52 (HINIRV) »
और यीशु बुद्धि और डील-डौल में और परमेश्‍वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ता गया। (1 शमू. 2:26, नीति. 3:4)

1 शमूएल 2:21 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 2:21 (HINIRV) »
यहोवा ने हन्ना की सुधि ली, और वह गर्भवती हुई और उसके तीन बेटे और दो बेटियाँ उत्‍पन्‍न हुईं। और बालक शमूएल यहोवा के संग रहता हुआ बढ़ता गया।

लूका 2:40 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लूका 2:40 (HINIRV) »
और बालक बढ़ता, और बलवन्त होता, और बुद्धि से परिपूर्ण होता गया; और परमेश्‍वर का अनुग्रह उस पर था।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें