निर्गमन 1:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

शिप्रा और पूआ नामक दो इब्री दाइयों को मिस्र के राजा ने आज्ञा दी,

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निर्गमन 1:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

निर्गमन 1:15 का अभिप्रेषण और पाठ

तत्काल संदर्भ– स्थिति— मिस्र की जातियाँ बढ़ती देखकर राजा ने दो इब्री दाइयों, शिप्रा और पूआ, पर कड़ा आदेश दिया कि वे यहोवा के लोक के विरुद्ध दया दिखाने के बजाय कठिनता से व्यवहार करें। उनका उद्देश्य היה यह कि ईब्रियों के बच्चों की जनगणना और नियंत्रण बनाए रखा जा सके। यह आदेश उस समय के सामाजिक-राजनीतिक दबाव और नीतिगत दमन का संकेत है, जो ईश्वर के लोग बनाम मानव प्रतिशोध के संघर्ष को उद्घाटित करता है।

ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से स्पष्ट संकेत

यह टेक्स्ट हमें दिखाता है कि ईश्वर अपनीिष्ठता में क्रिया-प्रणाली के भीतर भी मानवीय संसार की राजनीति से अप्रभावित नहीं रहता। यहाँ राजा का आदेश शास्त्रीय बाधाओं के विरुद्ध है, परन्तु ईश्वर के प्राचीन चयनित लोक के लिए पथ प्रदर्शक बनकर रहते हैं। पाठ संकेत देता है कि ईश्वर विश्वसनीय है और जब लोग भय के साथ राजनीतिक दबाव में फँसते हैं, तब उनकी कथा में ईश्वर की सुरक्षा और मार्गदर्शन उपस्थिति बनाये रखते हैं।

महत्वपूर्ण शब्दों/प्रतिमान की स्पष्टीकरण

  • — मिस्र के भीतर रहने वाली एक जातीय-जातीय समुदाय से जुड़ी सेविका-कायनियाँ, जो इन दाइयों के रूप में संदर्भित हैं; इनकी भूमिका प्रशासनिक और सामाजिक नियंत्रण का हिस्सा है।
  • — मानव शासन की सूचीबद्ध हद; फिर भी परमेश्वर के आगे वे सीमित होते हैं, क्योंकि ईश्वर के रोल-निर्भर उद्देश्य उनसे आगे निकलते हैं।

संबंधित पाठ

इन्हीं विचारों को समझने के लिए देखें: - बचन-नियंत्रण और परमेश्वर के संरक्षण के प्रतिपादन के लिए उद्घोषों में भगवान का उद्धारक आशीर्वਾਦ। - दया तथा न्याय के बीच मानवीय निर्णयों का परीक्षण। - दया के बजाय दमन के परिणामस्वरूप परमेश्वर के लोगों की अपेक्षित रक्षा। (नोट: नीचे संक्षेप में क्रॉस-रेफरेंसेस दिए जा रहे हैं; वास्तविक पदों के टेक्स्ट को नहीं लिखा गया है।)

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके तात्पर्य

  • यहोशू की कथा में सुरक्षित बचाव—ईश्वर दमन के समय भी अपने अनुयायियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • आचार-संहिता के भीतर दायित्व बनाम परमेश्वर की योजनाओं की प्राथमिकता—कठोर आदेशों के बावजूद ईश्वर के वचनों की सर्वोच्चता।

आज के लिए अनुप्रयोग

1) भय के समय भी ईश्वर की प्रभु-योजना पर भरोसा रखें; सामाजिक दबाव के बीच भी ईश्वर के वायदे स्थिर हैं।

2) कठिन समय में दया और न्याय के दृष्टिकोण को संतुलित रखें—जो निर्णय बेरहमी को जन्म देते हैं, वे ईश्वर के चरित्र के अनुरूप नहीं होते; ईश्वर के लोक के लिए दया की प्रेरणा बनें।

3) परिस्थिति चाहे कैसे भी हों, विश्वासियों को एक दूसरे के साथ खड़े रहने, समर्थन देने और परमेश्वर की दिशा पर भरोसा बनाए रखने की प्रेरणा मिले।

उद्धरण-योग्य विचार— कुछ पुरानी टीका-व्याख्या से साहित्यिक संकलन में जुड़ते हैं, जहाँ प्रभु के विश्वासयोग्यता और मानव-नियमन के बीच संतुलन देखने को मिलता है; यदि आवश्यक हो तो नीचे दिए गए प्रस्तवित साहित्यिक संकेत देखें।

सीधे उद्धरण: नीचे के में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शाब्दिक संक्षेप उद्धरण मौजूद हो सकते हैं—कृपया पाठक नोट करें कि यह सार केवल संदर्भ-उद्धरण का संकेत है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 1:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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