Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40



निर्गमन 1:5 के सन्निकट संदर्भ में जो कुछ दिखता है
परिसर के भीतर का तात्पर्य इस बात से जुड़ा है कि मिस्र में आ चुके यूसुफ के वंशज सब मिलकर सत्तर व्यक्तियों के रूप में गिने जाते हैं। यह पंक्ति यूसुफ के इतिहास के बाद की परिस्थितियों को उद्घाटन करती है—कैसे वह बड़े परिवार के साथ मिस्र पहुँचा और वहाँ उनका निवास आरंभ हुआ।
आदेश और आस्था की दिशा
यह पाठ परमेश्वर के चमत्कारपूर्वक बनाए गए विकास की दिशा में संकेत देता है। याकूब और उसके पुत्रों के साथ जोदू यहूदियों का समूह मिस्र में स्थानांतरित हुआ, वह परमेश्वर की योजना के अनुसार हुआ। यह दिखाता है कि विश्वास के साथ संगठित उत्तराधिकार, कठिन समय में भी एक पहचान बनाते हैं।
मुख्य शब्दों और चिह्नों की स्पष्टीकरण
अन्य प्रावर्तक पाठ्य संदर्भ
आधिकारिक पाठ के साथ ये दृष्टांत अन्य जगहों से भी जुड़ते हैं:
भविष्य के संदर्भ के साथ लिंक
इन संदर्भों में संदेह से परे एक सत्य उभरता है—परमेश्वर अपने लोगों के लिए योजना बनाते हैं और उनका इतिहास उनकी आस्था का अभिन्न हिस्सा बनता है:
आज के जीवन में उपयोग
आज के संदर्भ में यह पाठ स्मरण दिलाता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर हमारे साथ है और वह हमारी बस्तियों को संरक्षित करता है। परिवार और समुदाय की एकजुटता से हम विश्वास पर खड़े रहते हैं और भविष्य के लिए आशा बनाते हैं। यह विचार भी देता है कि परमेश्वर की योजना समय के साथ स्पष्ट होती है, भले ही स्थिति अस्थिर क्यों न हो।
संक्षिप्त एकीकृत विश्लेषण
यह पंक्ति एक ऐतिहासिक मोड़ है जो दिखाती है कि याकूब के परिवार के सत्तर सदस्य मिस्र में आए और वहीं उनका इतिहास आरम्भ हुआ। इससे पता चलता है कि परमेश्वर की देखरेख कैसे और कब--कब एक समुदाय की पहचान बनाती है, और कैसे विश्वास उनके जीवन की संरचना में निर्णायक भूमिका निभाता है।
ध्यान दें
खुली प्रेरणा—यूहदी वंश के क्रमिक विस्तार के संकेत, परमेश्वर की स्थिरता और विश्वास की निरंतरता का प्रमाण हैं। साथ ही यह भी बताता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर अपने लोगों को नहीं छोड़ता; उनके लिए मार्ग बनाता है।
संदर्भ नोट: निम्न उद्धृत टिप्पणीकारों के शब्दों के छोटे उद्धरण उपलब्ध हों तो सीधे उद्धृत नहीं किया गया है; उनके विचारों के सार यहाँ संक्षेपित रूप में समाहित हैं जिन्हें पाठ के साथ जोड़ा गया है:
मैथ्यू हेन्न्री (Matthew Henry), अलेक्जेंडर बार्न्स (Albert Barnes) और एडम क्लार्क (Adam Clarke) के सामान्य विचारों के अनुसार, परिवार की स्थिति, ईश्वर की योजना और विश्वास की दृढ़ता पर बल दिया गया है—परन्तु यहाँ किसी स्पष्ट वाक्यांश का छोटा-सा उद्धरण नहीं दिया गया है.