Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40



निर्गमन 1:10 — पृष्ठभूमि और व्याख्या
पद का तुरंत अवसर: इस पाठ में मिस्र के फरोह ने यह योजना बनाई कि यहूदियों की बढ़ती संख्या और शक्ति से निपटने के लिए चतुराई से काम लिया जाए। वे कहते हैं, “आओ, हम उनके साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करें...” यह अल्पकालिक भय का संकेत है और सत्ता की सुरक्षा के लिए रणनीतिक विचार है।
ईश्वर और विश्वास के प्रकाश में पाठ का संदेश
यहुदियों के प्रति फ़रोह के विचारों में भी एक महत्वपूर्ण धड़ी है—लोकसंख्या के कारण उत्पन्न जोखिम को महत्त्व देना, किन्तु परमेश्वर के उद्देश्य से उनका नियंत्रण नहीं होता। यह टेक्स्ट विश्वास के बनाम भय की धमनियों को उजागर करता है: भरोसा यदि है तो यह परिस्थितियों के बीच में भी स्थिर रहता है—परिणाम चाहे जो भी हों, राजा का भय उन पर हावी है, पर परमेश्वर की योजना ऊपर है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवि-व्याख्या
अन्य सत्यों से सम्बद्ध पवित्र पद
1) पूर्ववर्ती कथन में जब देश-राज्य का भय हो, तो परमेश्वर के लोग विवेक में चलें—यही प्रेरणा हमें दाऊद की वीरता और निर्भयता में भी मिलती है, जहां विश्वास भय से ऊपर रहता है।
2) इसके विपरीत, अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध ईश्वर-निर्णय में धैर्य और प्रतिरोध के बीच संकल्प चाहिए, जैसा कि कई बार नागरिक अधिकारों के लिए युक्ति और संयम की आवश्यकता पड़ती है।
3) परमेश्वर के संरक्षण के साथ, राजनीतिक चालों से भी दिव्य मार्ग बनते हैं—यही प्रेरणा हमें राजा-नियोजन के पीछे परमेश्वर की विश्वसनीयता पर टिके रहने का कहता है।
आज के संदर्भ में प्रयोग
संक्षिप्त संयुक्त टिप्पणी
यह पाठ हमें सिखाता है कि फरीसी-राजनीति या भय से प्रेरित चालों के बीच भी ईश्वर के लोग विवेकपूर्वक व्यवहार करें। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke ने भी संकेत किया है कि बुद्धिमानी से निर्णय लेते समय परमेश्वर के कल्याण और समुदाय की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। स्पष्ट उद्धरणों के अनुसार, इन कोट्स में विवेक, नैतिकता और समुदाय-कल्याण के तत्व प्रमुख रहे हैं (नीचे उद्धृत छोटे अंश देखें)।
प्रमुख क्रॉस-रेफरेंसेज:
कथन-तत्व में उद्धृत पंक्तियाँ: “अध्ययनों में” Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रासंगिक विश्लेषण सीमित रूप में शामिल हैं—पर इनका संपूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिया गया है। कृपया स्रोत-संदर्भों को देखें।