Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40


निर्गमन 1:3 (HINIRV) — तत्कालीन संदर्भ और पाठ का अर्थ
आदि से ही परमेश्वर का वादा लोगों की जातियों में उभरता है; निर्गमन की पंक्ति इस बात का संकेत देती है कि कैसे यह्वक समुदाय तात्कालिक संकटों और पारिवारिक केंद्रों से निकलकर विश्वासी जीवन की ओर बढ़ा। इस्साकार, जबूलून और बिन्यामीन אלה न सिर्फ युगल-युगल नाम हैं; ये याकूब के पुत्रों के परिवारों के सही-वर्तुल हैं, जो मिस्र के पाषाण-कालीन परिस्थितियों में भी đoàn-भक्ति और दुआ के साथ बने रहे। इस पंक्ति में उनकी उपस्थिति उत्तर-दक्षिण की एक व्यापकता दिखाती है—यानी परमेश्वर के आशीर्वाद का बहाव परिवार-परिवार से होकर पूरे इस्राइल तक फैल रहा है।
पद्य से प्रकट होने वाला ईश्वर और विश्वास
यह पाठ विश्वसनीयता और उत्तरदायित्व की बात करता है: परमेश्वर ने उन भाइयों के साथ जो किया, वह उनकी पहचान और वतन के साथ गहराई से जुड़ा रहा। विश्वास का मूल यही है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के साथ सत्य और सामंजस्य बनाए रखता है, भले परिस्थितियाँ कैसी भी हों। यह विश्वास उनके लिए प्रेरणास्रोत बना कि वे अपने प्रभु के उद्देश्यों को समझें और विश्वास के साथ आगे बढ़ें।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों का स्पष्टीकरण
संबद्ध आयतों के संकेत
संकेत रूप से नीचे बताई आयतें विषय की गहराई में मदद करती हैं —
तुलनात्मक टिप्पणी—प्रमुख पंडितों के विचार
इस पंक्ति पर ऐतिहासिक टिप्पणीकारों ने इस प्रकार विचार प्रस्तुत किए:
मैथ्यू हेनरी के अनुसार, परमेश्वर की चयनीत जाति के साथ सम्बन्धन और उनके भाइयों का खण्डन भी, एक समय-सारिणी है जिसमें दास-स्वतंत्रता और सेवा-सेवा की भाषा स्पष्ट होती है।
एल्बर्ट ब्रेन्स ने इस प्रकार कहा है कि यह सूची सूरजमुखी-सी स्पष्ट करती है कि परमेश्वर का उद्देश्य भिन्न-भिन्न वंशों के साथ भी स्थिर रहता है—वह एक ही विधान के अनुसार लोगों को एक साथ जोड़ता है।
आदम क्लार्क के व्याख्यान में यह पक्ष आता है कि परिवार के पुत्रों की गिनती इस बात की याद दिलाती है कि ईश्वर अपने लोगों की संरचना में क्रम और व्यवस्था रखना पसंद करते हैं।
जीवन-स्थितियों के लिए अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंस: उद्धार-योजना के संकेत के लिए देखें गृह-निर्गमन 12:40-41; राज-कथा 8:53; प्रेरितों के काम 7:9-10। इन संदर्भों में यह विचार उभरता है कि परमेश्वर अपने लोगों को एक साथ रखकर आगे बढ़ने देता है और हर पीढ़ी में उसकी इच्छा पूर्ण होती है।