Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 10:15 पर क्षणभर की दृष्टि — क्यों यह वचन मायने रखता है
यह वाक्य मिस्र देश पर प्राकृतिक आपदा की चरम सीमा का चित्रण है। खेतों के अनाज और वृक्षों की पत्तियाँ चट कर जाना, और वहाँ अंधकार का फैलना—ये सब एकornada एक ही समय में, परमेश्वर के उद्धारक कार्य के साथ जुड़कर, पाप की घोर कठोरता और ईש्वरीय न्याय की गम्भीरता दर्शाते हैं। यह केवल भय का विषय नहीं है, बल्कि परमेश्वर के क्रोध एवं कृपा–कार्य के बीच पड़ी स्थिति का स्पष्ट अवलोकन है: जब परमेश्वर पाप पर न्याय करता है, तब वह जनता के विश्वास, भय और परिवर्तन में अपने लोगो की रक्षा कैसे करता है, यह भी उजागर होता है।
आदि प्रसंग की原 संदर्भ
यह उसके पहले के दस प्लागों में से दसवां विकट भाग है—परमेश्वर का संदेश स्पष्ट है: मिस्र के फरोह ने इस बात को नहीं समझा कि उसकी सत्ता के बावजूद पराक्रम और अधिकार परमेश्वर के हाथ में है। जब इस प्रकार की दण्डात्मक घटनाओं का क्रम चलता है, तब इस्राइलियों के लिए सुरक्षा का प्रमाण यह है कि वे अपने परमेश्वर की ओर सच्चे विश्वास के साथ देखेंगे तो उन्हें आपत्ति के बीच भी राहत मिलेगी—जैसे पंछी अपने घोंसले में सुरक्षित रहते हैं।
मुख्य संदेश
अनुस्मरणीय बाइबल विचार
इस अध्याय में प्रकाशित घटनाविधि यह दिखाती है कि परमेश्वर की शक्तियाँ साधारण लोगों के जीवन को भी प्रभावित कर सकती हैं, परन्तु जिनके प्रति उसका आशीर्वाद है, वे संकट के बीच भी अपने ईश्वर के साथ रहते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षिप्त अर्थ
- योहन्ना 15:19 के अनुरूप, पाप के समय ईश्वर अपने लोगों को अलग करता है ताकि वे उसकी रोशनी में चलें।
- प्रवस्थियों 28:28 के समान, दण्ड और कृपा एक साथ होते हैं; दण्ड से बचना और कृपा प्राप्त करना विश्वासियों के लिए प्रमुख लक्ष्य है।
- भजन 33:18–19—परमेश्वर जो अपने भक्तों की सहायता करता है, उन्हें उद्धार और सुरक्षा देता है जब वे भय और आपत्ति में होते हैं।
व्यावहारिक आवेदन
किसी भी समुदाय के लिए यह याद दिलाता है कि कठिन समय में भी ईश्वर के पथ पर चलना चाहिए। अंधकार और अकाल जैसे संकेत हमें यह सिखाते हैं कि विश्वास और आज्ञापालना कैसे केंद्रित रक्षा बन जाते हैं। अपने जीवन के खेत-खलिहान में भी यदि आप परमेश्वर के साथ अडिग रहते हैं, तो वह सुरक्षा प्रदान करता है।
संक्षिप्त देवotional विचार
जब सब कुछ ठहरता है और अंधकार अधिक स्पष्ट होता है, तब भी परमेश्वर की गम्भीरता में आशा की बुनियाद फिर से बनती है। भरोसा रखें कि ईश्वर अपने लोगों के लिए संघर्षों के पीछे भी एक उद्देश्य रखते हैं—आत्मिक उन्नति और विश्वास का अधिक गाढ़ा होना।