निर्गमन 10:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब फ़िरौन ने फुर्ती से मूसा और हारून को बुलवाकर कहा, “मैंने तो तुम्हारे परमेश्‍वर यहोवा का और तुम्हारा भी अपराध किया है।

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निर्गमन 10:16 पद-दर-पद बाइबल टीका

सार अभिप्राय

निर्गमन 10:16 में वापस-आकर फरोहन अपने अपराध को स्वीकार करता है कि वह ईश्वर यहोवा और Moses-Harun के कारण जुर्मवार है; यह एक अचानक पल है जब उसने अपनी धारित दृढ़ता में कमी दिखाई और परमेश्वर के संदेश को स्वीकारने के लिए तैयार हो गया। यह वाक्य यह दर्शाता है कि शेषनागीन प्रतिरोध भी कभी-कभी आंशिक आत्म-झुकाव पैदा कर सकता है, किंतु यह भी संकेत है कि पश्चात्ताप और मान्यता के लिए अवसर रहते हैं।

पृष्ठभूमि

यह पाठ मिस्र की नस्य-नजाकत और पाप पर महीनों तक चली सजीव बाधाओं के बीच आता है। मूसा और हारून ने फरोहन को ईश्वर के संदेश सुनाए थे, पर वह अत्यंत कठोर बना रहा। जब दसवीं नहीं, बल्कि अंतिम आपदा का खतरा बढ़ा, तो फरोहन ने अपने मन का एक हिस्सा खोला और कहा कि उसने अपने अपराध को स्वीकार किया है। यह घोषणा उनकी अंतर्मन की जड़ता को पूरी तरह नहीं तोड़ती; यह एक क्षणिक संवेदना है जो आगे के निर्णयों पर निर्णायक प्रभाव डालती नहीं दिखती।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • आक्रोश बनाम पश्चात्ताप: फरोहन का वक्तव्य यह दिखाता है कि लोग अक्सर दबाव में अपराध-स्वीकार करते हैं, पर वास्तविक परिवर्तन भावना के साथ दुर्घटनापूर्ण होता है केवल बहरे-आँखों के साथ नहीं।
  • आत्म-स्वीकृति का स्थान: यह दर्शाता है कि परमेश्वर के सामने अपराध स्वीकारना एक पहला कदम है, पर यह पर्याप्त नहीं है जब तक आचरण में बदलाव न हो।

संकेतित विषय-विस्तार

  1. अधिकार-प्रतिरोध बनाम विनम्रता: जो आज्ञाओं के विरुद्ध रहता है, उसे भी कभी-कभी भीतर से आवाज सुनाई देती है कि उसने गलत किया।
  2. कथन बनाम परिवर्तन: तात्कालिक शब्द-स्वीकृति बनाम जीवन-परिवर्तन में अंतर समझना आवश्यक है।

अन्य पवित्र ग्रंथों से संबद्ध उद्धरण (संदर्भित विचार)

1) प्रेरितों के कार्यों में पाप के चालन के बारे में गवाही—क्योंकि सत्य का स्वागत शब्दों से नहीं, कर्मों से होता है।

2) शिकायत-स्वर के समय उद्धार का आश्वासन—परमेश्वर अन्याय नहीं चाहता बल्कि हृदय परिवर्तन चाहता है।

3) प्रत्येक मुखर कथन के भीतर वास्तविक परिवर्तन की आवश्यकता पर बल।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

किसी भी कष्टपूर्ण परिस्थिति में हमें सत्य स्वीकारने का साहस चाहिए, पर केवल शब्दों तक सीमित रहने की बजाय हमारे आचरण को भी ईश्वर की दिशा में बदलना चाहिए। परमेश्वर की आवाज़ सुनकर जब हम अपनी भूल स्वीकारते हैं, तो 그것 से ना केवल हमारे अपने मन की शांति बढ़ती है, बल्कि ऐतिहासिक घटनाओं में भी ईश्वर की योजना के अनुरूप परिवर्तन संभव होते हैं।

Cross-references

- Exodus 9:27 (फरोहन को पाप की पहचान से अवगत कराना) — समझ में आता है कि कठोरता के बीच भी आत्म-स्वीकृति का क्षण आता है।

- Psalm 51:17 (भक्ति-स्वीकार की महत्ता) — सत्य स्वीकारना भक्ति के केंद्रीय भाग है।

- Romans 2:4 (कृपा का अवसर) — दया और धैर्य से अपराध स्वीकारना वास्तविक परिवर्तन के संकेत होते हैं।

नोट: ऊपर के उद्धृत विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन व्याख्याओं के विचारों के सार से प्रेरित हैं; इनमें से किसी भी मूल वाक्यों के सीधे उद्धरण केवल आवश्यकतानुसार छोटे संकेत के रूप में दिए गए हैं और संपूर्ण पाठ नहीं हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 10:16 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब फ़िरौन ने मूसा और हारून को बुलवा भेजा और उनसे कहा, “इस बार मैंने पाप किया है; यहोवा धर्मी है, और मैं और मेरी प्रजा अधर्मी हैं।

गिनती 22:34 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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तब बिलाम ने यहोवा के दूत से कहा, “मैंने पाप किया है; मैं नहीं जानता था कि तू मेरा सामना करने को मार्ग में खड़ा है। इसलिए अब यदि तुझे बुरा लगता है, तो मैं लौट जाता हूँ।”

गिनती 21:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
गिनती 21:7 (HINIRV) »
तब लोग मूसा के पास जाकर कहने लगे, “हमने पाप किया है, कि हमने यहोवा के और तेरे विरुद्ध बातें की हैं; यहोवा से प्रार्थना कर कि वह साँपों को हम से दूर करे।” तब मूसा ने उनके लिये प्रार्थना की।

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