यशायाह 16:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

सम्मति करो*, न्याय चुकाओ; दोपहर ही में अपनी छाया को रात के समान करो; घर से निकाले हुओं को छिपा रखो, जो मारे-मारे फिरते हैं उनको मत पकड़वाओ।

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यशायाह 16:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 16:3 — संदर्भ-संवाद

यह पद यशायाह के कटु आह्वान–विधायाताओं के संदर्भ में है, जिसमें नाझीह के राजा ऐसी स्थिति की ओर संकेत कर रहे हैं जो बाहर से सामरिक नीतियों और आंतरिक सुरक्षा के उपाय मांगती है। वार्ता इस बात पर केंद्रित है कि कैसे एक उन्नत समाज या राष्ट्र अपनी अस्थिरता के क्षणों में सहमति, न्याय और संरक्षा के प्रमाण दिखा कर अपने निवासियों को सुरक्षित रख सकता है।

पाठ से मिलता हुआ संदेश: परमेश्वर की व्यवस्था और विश्वास

यह उद्घोषणा बताती है कि परमेश्वर के सामने कबूला गया मानक विविध परिस्थितियों में भी स्थिर रहता है: सम्मति, न्याय, छाया का सुरक्षा के रूप में उपयोग, और निष्कलंकता का अनुसरण। नीतियों के समय भी ईमानदार निर्णय, अन्याय से बचना और समाज के कमजोर वर्गों के लिए संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

महत्वपूर्ण शब्द और चित्र

  • सम्मिति करो — समूह के भीतर मिलकर योजना बनाना और एकमत से निर्णय लेना, ताकि निराश्रितों पर उठते संकटों का हल शांतिपूर्ण और उचित तरीके से हो।
  • न्याय चुकाओ — अन्याय के विरुद्ध त्वरित, निष्कपट और सही निर्णय देना; कानून के अनुसार अपराध और दंड की व्यवस्था सुनिश्चित करना।
  • दोपहर ही में अपनी छाया को रात के समान करो — प्रतीकात्मक रूप से सुरक्षा के आकाश को रोशनी में बराबरी से बाँधना; तत्काल सुरक्षा और राहत की स्थिति बनाना, ताकि अंधकार में अंतर नहीं रहे।
  • घर से निकाले हुओं को छिपा रखो — समाज के सबसे कमजोर और निर्बल लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी; शरण और आश्रय प्रदान करना।

अन्य संदर्भों से सहारा

- पूर्व और निकट संदर्भ: सामाजिक-राजनीतिक संकट के समय निष्पक्ष न्याय और संरक्षित लोगों की सुरक्षा की ओर इशारा।

- दूसरी पुस्तकें: न्याय, शरण और संरक्षण की धारणा को अन्य इशारों में भी समाहित किया गया है, जैसे जो लोग प्राय: मार-पीट में पड़ते हैं उन्हें बचाने की आवश्यकता पर बल।

मददगार उद्धरण (संक्षेप)

यहां उल्लेखित ठोस उद्धरण स्रोतों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमिन उद्धरण मिलते हैं; संगत संदिग्ध शब्दों का सीधे टेक्स्ट उद्धरण नहीं दिया गया है, बल्कि उनकी सरल टिप्पणियाँ और पाठ के साथ संलग्न सल्लाह शामिल होते हैं।

आज की उपयोगिता

इस आयत से आज की समाज-जीवन में हम नीचे के पाठ सीखते हैं:

  • समान-निर्णय के लिए समुदाय में एकता जरूरी है; बहस नहीं, सहमति जरूरी है ताकि कानून-संरचना निष्पक्ष बने।
  • न्याय-प्रक्रिया में त्वरित और निष्पक्ष निर्णय समाज के कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षा की गारंटी बनें।
  • संकट के समय लोगों को ढाल-सुरक्षा प्रदान करना, विशेषकर वे जो घर-परिवार से दूर हैं या दबे-कुचले हैं।

चर्चा के लिए 2-3 सारगर्भित क्रॉस-रेफरENCES

  • यशायाह 1:17 — न्याय के साथ समाज की प्रगति के लिए साक्ष्य-आधारित कदम उठाने की शिक्षा; “अच्छे कार्यों” को पहचानना और उनके लिए बुलावा।
  • यशायाह 58:6-9 — आंतरिक नीतियों और सांसारिक व्यवस्था का मेल: उपेक्षितों के लिए राहत और रूढ़ीवादी धार्मिकताओं से ऊपर उठना।
  • न्याय के साथ संरक्षण — व्यवस्थाएं जो शरणार्थी और निर्बलों के लिए सुरक्षा बनें, परिशीलन और करुणा से परे न रहें।

इस प्रकार यह पाठ यह दर्शाता है कि ईश्वर की राह में एकता, न्याय और सुरक्षा एक दूसरे से संयुक्त रहते हैं। समाज जब इन मूल्यों को एक साथ अपनाता है, तब ही संकट के समय में सच्ची सुरक्षा संभव होती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 16:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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