यशायाह 22:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु क्या देखा कि हर्ष और आनन्द मनाया जा रहा है, गाय-बैल का घात और भेड़-बकरी का वध किया जा रहा है, माँस खाया और दाखमधु पीया जा रहा है। और कहते हैं, “आओ खाएँ-पीएँ, क्योंकि कल तो हमें मरना है।” (1 कुरि. 15:32)

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यशायाह 22:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 22:13 पर टिप्पणी (HINIRV)

यह वचन यशायाह के विरोध-स्थल पर घटित एक घटना का चित्रण है, जहाँ दिन के उल्लास और धरोहर-आनन्द के बीच आत्म-विश्वास और धार्मिक चेतना का अभाव दिखता है। संदर्भ में फाटे हुए जीवन के संकेत मिलते हैं: भक्ति-उत्सा के स्थान पर सांसारिक उत्सव, और आंतरिक भय के बजाय मुँह-देखी खुशियाँ। गड़बड़ शब्दावली में বলা गया है कि भीषण हर्ष-उल्लास और गड़गड़ाहट के बीच जिंदगी की असली दिशा भुला दी गई है। यह संदेश इतनी स्पष्ट है कि ईश्वर के साथ निष्ठा और संवेदनशीलता बनाए रखना महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि समय की कठोरता और भय की अनिवार्यता दोनों एक साथ आ खड़ी हो सकती हैं।

मुख्य अर्थ: यहाँ कहा गया है कि लोग मौत पर विचार न करके वर्तमान आनंद-उत्साह में मशगूल हैं—मांस-खाना और मदिरा परोसा जा रहा है, क्योंकि “कल हमें मरना है” जैसी निष्क्रियता और धिक्कार-सी स्थिति दिखती है। यह न केवल उत्सव-खोरी की आलोचना है, बल्कि ईश्वर के संदेश और विवेक से विमुख होकर जीवन के गंभीर सवालों से पलायन को भी दर्शाती है।

तीन प्रमुख विषय

  • उत्सव और आत्म-विश्वास का असंतुलन: विचार यह है कि तुरंत के सुख स्वास्थ्य या धर्मानुष्ठान से बढ़कर हो जाते हैं, जबकि आज की चेतावनी और भविष्य की तैयारी गौण रह जाती है।
  • आंतरिक विवेक की कमी: लोग जान-बूझकर भक्ति-समझ और विनय-जीवन को भुलाकर सांसारिक रसों में लिप्त रहते हैं।
  • काल-निर्णय की तैयारी: जब मृत्यु का पूर्वाभास हो, तब जीवन के दायित्व और परमेश्वर के निर्देश कितने महत्त्वपूर्ण रहते हैं, यह उठकर दिखता है।

संबंधित आयतें

• 1 कुरिन्थियों 15:32 — पवित्र लेखक ने इसी विषय में मृत्यु और जीवन के दायरे को स्पष्ट किया है कि अगर मसीही विश्वास मृत्यु के साथ संगति में नहीं है, तो जीवन की दिशा विषम बन जाती है।

• नूह के दिनों के विचार—अतीत की निष्क्रियता को चुनौती: समय-समय पर चेतावनियाँ मिलती हैं कि ईश्वर के अनुसार जीना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है।

• निर्गमन 12:14 के स्मरण से जीवन के उत्सवों के साथ निरंतर पवित्रता का संतुलन भी याद आता है: उत्सव के अवसर रहते हुए भी एक धार्मिक दृष्टिकोण बना रहना चाहिए।

व्यावहारिक विचार

今天 की वास्तविक जोर वह है: क्या हम अपने दैनिक उत्सवों में ईश्वर के निर्देश को पहली प्राथमिकता देते हैं? यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि सुख-सुविधाओं के बीच भी आत्मिक सचेतना बनाए रखना आवश्यक है—जीवन की वास्तविक सार तब प्रकट होती है जब भय और भविष्य-चिन्ता के बावजूद परमेश्वर के साथ सही संबंध बना रहे।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यशायाह 22:13 एक चेतावनी है कि सांसारिक आनंद के पीछे ईश्वर के पथ से विमुख होना विपत्ति को निमंत्रण देता है। सही उत्तर है—විश्वास में आत्म-समर्पण के साथ विवेकपूर्ण जीवन, ताकि संकट में भी ईश्वर की इच्छा को मान्यता मिल सके।

कंटेंट नोट: पूर्व-नोट्स और उद्धरण

यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से संक्षिप्त उद्धरणों को देखना चाहें, तो उनके प्राथमिक विचारों में समान चेतावनियाँ मिलती हैं: आध्यात्मिक जागरण, आत्म-निष्ठा और मृत्यु-जीवन के वास्तविक प्रश्नों के प्रति उत्तर की आवश्यकता। इस टिप्पणी में सीधे उद्धरण नहीं दिए गए हैं ताकि पाठ का प्रवाह मूल रहे; आवश्यक होने पर आप उनके सामान्य टिप्पणियों के सार को देख सकते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 22:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 56:12 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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वे कहते हैं, “आओ, हम दाखमधु ले आएँ, आओ मदिरा पीकर छक जाएँ; कल का दिन भी तो आज ही के समान अत्यन्त सुहावना होगा।” (लूका 12:19-20, 1 कुरि. 15:32)

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जैसा नूह के दिनों में हुआ था, वैसा ही मनुष्य के पुत्र के दिनों में भी होगा। (इब्रा. 4:7, मत्ती 24:37-39, उत्प. 6:5-12)

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1 कुरिन्थियों 15:32 (HINIRV) »
यदि मैं मनुष्य की रीति पर इफिसुस में वन-पशुओं से लड़ा, तो मुझे क्या लाभ हुआ? यदि मुर्दे जिलाए नहीं जाएँगे, “तो आओ, खाएँ-पीएँ, क्योंकि कल तो मर ही जाएँगे।” (यशा. 22:13)

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