Old Testament
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यशायाह 34:6 — पाठ का तत्काल संदर्भ और अर्थ
यह पद यशायाह के चयनित दूतत्व (एज) भाग में आता है, जहाँ परमेश्वर के न्याय और अन्य देशों पर उसकी प्रभुता का उद्घोष किया गया है। यशायाह 34 अध्याय में यहोवा के क्रोधपूर्ण उग्र प्रहार का विराट चित्रण है, जो एडम देश के साथ-साथ बोस्रा नगर की संहारक भूमिका के माध्यम से प्रकट होता है। यहाँ यहोवा की तलवार लहू से भरी है और चर्बी, भेड़ों के लहू तथा मेढ़ों की चर्बी के साथ तृप्त है—यानी काफ़ी वजनदार और समापन-योजनाओं से भरा हुआ हिंसात्मक न्याय।
यह टेक्स्ट क्या दिखाता है—ईश्वर और विश्वास के बारे में
- परमेश्वर का न्याय सख्त और पूर्ण है: यहोवा की तलवार का लहू से भरा होना संकेत है कि विरोधी राष्ट्रों पर उसका निर्णय कठोर होगा।
- उसकी सख्ती में भी उद्धार का लक्ष्य है: राज्य और सभ्यता के विरुद्ध भयानक संहार से परमेश्वर का खेल ईश्वर की महिमा के लिए है, ताकि अन्याय पर रोक लगे और पवित्रता स्थापित हो।
महत्वपूर्ण शब्दों व चित्रों की स्पष्टता
संबद्ध पाठ और उनके विचार
- यशायाह 13:9-11 में भी परमेश्वर का विद्वेषपूर्ण प्रतिशोध दिखता है ताकि अत्याचार समाप्त हो।
- यहोशू 10:11 में यहोवा के बड़े युद्धों का चित्र है जो धर्म के लिए न्यायपूर्ण हैं।
- अन्याय के विरुद्ध परमेश्वर की सत्ता का स्मरण हमें सिखाता है कि सत्य और पवित्रता के लिए संघर्ष आवश्यक है, पर निष्कर्षतः परमेश्वर का उद्देश्य उद्धार और उसके राज्य की स्थापना है।
पूर्वक उद्धरण (हाल के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से संकलन)
एडम क्लार्क और Matthew Henry की टिप्पणियों में इस प्रकार की ध्वनि मिलती है: यहोवा की न्याय की तलवार दर्शाती है कि पाप से उत्पन्न दुष्टता का परिणाम अनिवार्य है; यह अन्यायियों के लिए एक चेतावनी भी है ताकि वे परिवर्तन करें।
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आज के लिए अनुप्रयोग
संक्षिप्त निष्कर्ष
यशायाह 34:6 में परमेश्वर का न्याय दृढ़ और पूर्ण रूप से दिखाया गया है। यह सूचक है कि शासन, दमन या युद्ध के सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव अत्यंत गहरे होते हैं, परन्तु परमेश्वर के उद्देश्य में उद्धार, पवित्रता और उसकी महिमा का प्रमुख स्थान है।
क्रॉस-रेफरेंस
1) यशायाह 63:1-6— परमेश्वर के प्रतिशोध और उद्धार की विस्तृत तस्वीर; यह बतलाता है कि उद्धारकर्ता कैसे न्याय के साथ-साथ होभाव भी लाते हैं।
2) रोमियों 12:19— प्रतिशोध की बात परमेश्वर के हाथ; हमारे लिए अन्याय के विरुद्ध प्रेम और बधुत्व की राह सुझाता है।
3) मत्ती 26:52— “तब यीशु ने कहा, जो तलवार उठाता है, वह तलवार से चलना सीखे”—सत्यापित करता है कि परमेश्वर का शासन भी प्रेम और vishvas के साथ चलता है।