यशायाह 34:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा सब जातियों पर क्रोध कर रहा है, और उनकी सारी सेना पर उसकी जलजलाहट भड़की हुई है*, उसने उनको सत्यानाश होने, और संहार होने को छोड़ दिया है।

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यशायाह 34:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 34:2 का सरल अर्थ

यह वचन कहता है कि प्रभु यहोवा सभी जातियों पर क्रोध कर रहा है और उनकी सेनाओं पर उसकी जलजलाहट भड़की हुई है; सभी निर्बल, दुष्ट सामर्थ्यें नष्ट होने के साथ संहार की स्थिति में आ जाएँगी।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यशायाह के उजाड़ क्षेत्र और दूर-दूर देशों की दुष्टता के बारे में भविष्यवाणी करते समय यशायाह की लेखनी सीधे परमेश्वर के न्याय को दर्शाती है। यह अध्याय 34 में दुष्ट राष्ट्रों के विरुद्ध परमेश्वर के निर्णायक क्रोध को उजागर करता है, ताकि इस्राइल के विश्वासी पाठक यह समझ लें कि परमेश्वर बुराई पर अपना नियंत्रण रखता है और वह न्याय के साथ सांसारिक शक्तियों को ढहाने वाला है।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • मुख्य क्रिया: “क्रोध कर रहा है” से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का क्रोध नैतिकता और धर्मसत्य के विरुद्ध नहीं, बल्कि दुष्ट देशों के समर्थन एवं अत्याचार के विरुद्ध है।
  • कथा की दिशा: यहोवा की जलजलाहट “सेना” और उनकी ताकत पर प्रकट होती है, जिसका अर्थ है कि शक्तिशाली शक्तियाँ अपने में बिखर जाएँगी और संहार का सामना करेंगी।
  • निष्कर्ष: सत्यानाश और संहार—यह ठोस परिणाम बताता है कि दुष्ट राष्ट्रों के लिए कोई बचाव नहीं—परमेश्वर न्याय करते हैं।

थीमैटिक नोट्स

  1. ईश्वर का न्याय और सार्वभौमिक प्रभुत्व: परमेश्वर सभी राष्ट्रों की स्थिति जानते हैं और समय का चयन कर सही निर्णय लेते हैं।
  2. निर्भरता बनाम दुष्ट सामर्थ्य: कथन दिखाता है कि मानव-शक्ति कितनी भी प्रबल क्यों न हो—उसकी सत्ता जब परमेश्वर के विरुद्ध हो, तब उसे हाड़-तोड़ संहार का सामना करना पड़ता है।

प्रासंगिक क्रॉस-रेफरंस के साथ संक्षिप्त स्पर्श

1) यशायाह 2:12— परमेश्वर के दिन व्यापार और महिमा के बीच उच्च-दृश्यता: दुष्टों का अहंकार चूर हो जाएगा; यह 34 के संदेश से संगत है कि यहोवा कड़ी सजगता से न्याय करता है।

2) डैनिएल 2:44— पृथ्वी के हर राज्य पर परमेश्वर का शासन स्थिर है; अंतिम दिन “मानवीय सामर्थ्य” से परे एक साम्राज्य मिलेगा जो शाश्वत है।

3) प्रकाशितवाक्य 19:15— परमेश्वर के दण्ड के समय में एक स्पष्ट विजयी क्रोध: यहोवा की जलजलाहट वीर-हृदयों को नष्ट करती है और उद्धारकर्ता के साथ आस्था की विजय दिखाती है।

व्यावहारिक takeaway

जो लोग गलत मार्ग पर चल रहे हैं, उन्हें चेतावनी है कि परमेश्वर धर्म और न्याय के साथ कार्य करते हैं। विश्वासियों को यह याद रखना चाहिए कि प्रभु का न्याय पवित्र है, और वह अपने लोगों की रक्षा के लिए प्रत्यक्ष रूप से लड़ सकता है। विश्वासियों के लिए यह संकटों में भी धैर्य और आज्ञापालन की शिक्षा है, ताकि वे परमेश्वर की सार्वभौमिक प्रतिष्ठा के लिए जीएं।

यहूदी-यूहिदी धारणा के साथ एकीकृत दृष्टिकोण में हम पाते हैं कि यशायाह की यह घोषणा दुष्ट राष्ट्रों के विनाश से अधिक परमेश्वर के अधिकार और न्याय की पुष्टि है।

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यशायाह 34:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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सपन्याह 3:8 (HINIRV) »
इस कारण यहोवा की यह वाणी है, “जब तक मैं नाश करने को न उठूँ, तब तक तुम मेरी बाट जोहते रहो*। मैंने यह ठाना है कि जाति-जाति के और राज्य-राज्य के लोगों को मैं इकट्ठा करूँ, कि उन पर अपने क्रोध की आग पूरी रीति से भड़काऊँ; क्योंकि सारी पृथ्वी मेरी जलन की आग से भस्म हो जाएगी। (प्रकाशित. 16:1)

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यशायाह 30:25 (HINIRV) »
उस महासंहार के समय जब गुम्मट गिर पड़ेंगे, सब ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों और पहाड़ियों पर नालियाँ और सोते पाए जाएँगे।

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यशायाह 30:27 (HINIRV) »
देखो, यहोवा दूर से चला आता है, उसका प्रकोप भड़क उठा है, और धुएँ का बादल उठ रहा है; उसके होंठ क्रोध से भरे हुए और उसकी जीभ भस्म करनेवाली आग के समान है।

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