Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 58:10 — nghĩa जीवन के लिए प्रकाश
सीधे शब्दों में अर्थ: उदारता से भूखे को खाना खिलाने और दीन-दुःखी को संतुष्ट करने पर ईश्वर का प्रकाश अंधकार में उभरकर चमक उठता है; तब आपका अंधकार दोपहर के समान उज्ज्वल हो जाएगा। यह आयत धार्मिक उपदेश के साथ साथ सामाजिक संवेदना की पंक्ति भी है: जीवन के वास्तविक दीपक प्रेम और सेवा से ही जलते हैं।
प्रसंगगत पृष्ठभूमि
यह आयत भागय के एक बड़े संदेश का हिस्सा है जो यशायाह के बहार्गी-युग के संदर्भ में है। दासत्व के बाद यहूदियों को यह याद दिलाता है कि तप्त रात (दुख) से निकलकर वे ईश्वर के ठीक-ठाक जीवन-चरित्र को साधना करें: उपकार, दीनों की सहायता और न्यायपूर्ण व्यवहार ही वेदी की लौ बनते हैं जो समाज को रोशन करती है।
व्याख्यात्मक बिंदु
महत्वपूर्ण टिप्पणी (प्रकाशन-धर्मी सूक्ष्म दृष्टिकोण)
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों को संक्षेप में समाहित करते हुए: इस आयत में आत्म-उन्नतिशीलता नहीं, परोपकार और न्यायपूर्ण जीवन का आह्वान है। यदि मानवता भूख और अभाव के विरुद्ध खड़ी है, तो परम प्रकाश स्वयं मार्गदर्शक बनता है। Henry कहते हैं कि भलाई की ठोस क्रिया से शरीर और आत्मा दोनों प्रकाश पाते हैं; Barnes इसे दीन-हीन सेवा के प्रतिफल के रूप में देखते हैं; Clarke इसे व्यवहारिक मोड़ के रूप में प्रस्तुत करते हैं—प्रकृत परमेश्वर का आशीर्वाद उन लोकों पर उतरता है जो समाज के सबसे कमजोरों के लिए कदम उठाते हैं। (इन तीनों स्रोतों के संकेतन के भीतर शब्द-उद्धृत अंश केवल संकेतित हैं।)
संकेत-आधारित क्रॉस-रेफरेंसे
संक्षेपित व्यावहारिक निष्कर्ष
संदर्भ-सम्बन्ध
यह आयत प्रभारी सामाजिक उत्तरदायित्व और दयालु जीवन के लिए एक स्पष्ट निर्देश देती है: वास्तविक धार्मिकता वही है जिसमें जरूरतमंदों के लिए व्यवहारिक सहायता की जाती है और इस से इंसान का आंतरिक अंधकार चुपचाप पीछे छूट जाता है।