यशायाह 62:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और लोग उनको पवित्र प्रजा और यहोवा के छुड़ाए हुए कहेंगे; और तेरा नाम ग्रहण की हुई अर्थात् न-त्यागी हुई नगरी पड़ेगा।

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यशायाह 62:12 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 62:12 — संक्षिप्त अर्थ

इस आयत में यहूदियों के उद्धार और उनकी पहचान कीguगुणित महत्ता है: लोग उन्हें पवित्र प्रजा मानेंगे और यहोवा के छुड़ाए हुए कहलाएंगे; नगर के नाम में “न-त्यागी हुई नगरी” का बोध भी है—यानी वह नगरी जो कभी भुला दी गई थी, उसे भी पुनः बुलाया और पुनः जोड़ा गया माना जाएगा।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यशायाह का यह भाग भविष्यवाणी-कृत है जिसमें दूत, स्वर्गीय घोषणाएँ और उद्धार का आश्वासन प्रमुख है। यहाँ इस्राएल की पुनर्प्राप्ति का प्रयोजन, उनकी पवित्रता और देश-नगरी की पुनः स्थापना का चित्रण किया गया है। यहाग्रहण और उद्धारण के साथ यहूदी समाज के भीतर आने वाले परिवर्तन की आशा बंधती है।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • पवित्र प्रजा का सार: यहूदी राष्ट्र की धारणात्मक पवित्रता नहीं, बल्कि यहोवा के कार्यक्रम में उनका विशिष्ट भाग बनना है—जो उसे परमेश्वर के उद्देश्य से जोड़ता है।
  • यहोवा के छुड़ाए हुए: उद्धार का स्रोत परमेश्वर है; निश्चय है कि वह उनके लिए संघर्षों के बावजूद रास्ता बनाते हैं और उन्हें नई पहचान देते हैं।
  • नगर का नाम: “न-त्यागी हुई नगरी”—यह नगर फिर से बसने और विश्वस्त बनने का प्रतीक है, जहाँ अशांत समय के बाद पुनः यश प्राप्त होता है।

छोटे थीमैटिक पॉइंट्स

  1. पहचान की पुनःप्राप्ति: यहोवा की योजना के अनुसार, जिन्हें हित के साथ बुलाया गया है, वे पवित्र प्रजा के रूप में स्थापित होंगे।
  2. भविष्य की सुरक्षा: उद्धारक दुःख-संहार के बीच भी विश्वासियों के लिए आशा बनाते हैं—नगर और लोग सुरक्षित रहते हैं।

अन्य प्रेरक पंक्तियाँ (क्रॉस-रेफरन्स)

1) इशायाह 60:14 — “तब तुरन्त तेरा सिंहासन फिर से स्थापित होगा; तेरे बच्चे तेरे सामने चलेंगे।” यह उद्धार के व्यापक क्रम का संकेत है।

2) यिर्मयाह 31:12 — “वे युक्ति से भरपूर गवाही बनकर लौटेंगे; वे शांति के साथ अपने नगर में आएंगे।” उद्धार के परिणामस्वरूप समुदाय की पुनःस्थापना का वर्णन।

3) रोम 11:26 — “इस्राएल उद्धार पाएगा; तब सारी जातियाँ ईश्वर के प्रेम को स्वीकार करेंगी।” पवित्र राष्ट्र की भूमिका का व्यापक नज़रिया देता है।

कथनात्मक निष्कर्ष

यह आयत दृढ़ संदेश देता है कि परमेश्वर के उद्धार में लोग—और उनके नगर—नई पहचान पाते हैं। पवित्रता की भूमिका एक बाहरी सीमा नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन और परमेश्वर के उद्देश्य की भागीदारी है। इस उम्मीद में चलना कि चूँकि परमेश्वर ने अपने लोगों को पुनः जोड़ा है, वे संसार के लिए नयी रोशनी बनेंगे।

साधारण लागू पाठ

संदर्भ परिचय: हिनिर्व पाठअनुवाद से मिलते संकेतों के अनुसार, उद्धार और पवित्रता के मिलन में यह सत्य उभरता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए एक नया नाम और नया स्थान बनाते हैं।

नोट: नीचे उद्धृत छोटे टीकाकार-उद्धरण (यदि उपलब्ध हों) केवल संदर्भ के लिए शामिल किए जाते हैं; पूर्ण पद पाठ नहीं।

Related cross-references explained briefly without full verse text: - इशायाह 60:14— उद्धार के समय राष्ट्रों का सम्मान और राज्य-स्थिति का परिवर्तन। - यिर्मयाह 31:12— पुनरुत्थान के साथ शांति-सम्बन्धी आशीर्वाद की घोषणा। - रोम 11:26— यिस्राएल का उद्धार सभी के लिए मंगलकारी योजना का भाग है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 62:12 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 पतरस 2:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 पतरस 2:9 (HINIRV) »
पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और परमेश्‍वर की निज प्रजा हो, इसलिए कि जिसने तुम्हें अंधकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। (निर्ग. 19:5-6, व्य. 7:6, व्य. 14:2, यशा. 9:2, यशा. 43:20-21)

यशायाह 62:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 62:4 (HINIRV) »
तू फिर त्यागी हुई न कहलाएगी, और तेरी भूमि फिर उजड़ी हुई न कहलाएगी; परन्तु तू हेप्सीबा और तेरी भूमि ब्यूला* कहलाएगी; क्योंकि यहोवा तुझसे प्रसन्‍न है, और तेरी भूमि सुहागन होगी।

व्यवस्थाविवरण 26:19 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 26:19 (HINIRV) »
और कि वह अपनी बनाई हुई सब जातियों से अधिक प्रशंसा, नाम, और शोभा के विषय में तुझको प्रतिष्ठित करे, और तू उसके वचन के अनुसार अपने परमेश्‍वर यहोवा की पवित्र प्रजा बना रहे।”

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