Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 62:7 — अर्थ का तात्पर्य
इस पद का सीधा आशय यह है: परमेश्वर की राजधानी यरूशलेम की सुरक्षा और प्रशंसा को स्थिर बनाते हुए उसे पूर्णता तक पहुँचाने तक मुक्त-चैन न रहने देना चाहिए। दूसरे शब्दों में, ईश्वर अपनी व्यवस्था के प्रचार-प्रसार और सम्मान को रोकना नहीं चाहते; वह यरूशलेम की महिमा को पृथ्वी पर फैलाने के लिए योजना बना रहे हैं और इसे पूरा करने तक उनके भक्तों के द्वारा दृढ़ उत्साह और प्रार्थना की अपेक्षा है।
संदर्भ-विपति
यशायाह 62 की रचना समय-सीमा के भीतर होने वाला एक साक्ष्य है कि परमेश्वर अपनी संस्था की सुरक्षा और मान-अपमान के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ा है। यरूशलेम को “स्तिर करना” वहाँ की पहचान, शासन और परमेश्वर के लक्ष्य का प्रतीक है—जो अंततः पृथ्वी के हर कोने तक प्रशंसा के साथ पहुँचेगी। यह संदेश ईश्वर की वाचा और नबी-कार्य की निरंतरता को दर्शाता है।
interpretive observations (व्याख्यात्मक अवलोकन)
संक्षिप्त थीमैटिक लिस्ट
अन्य प्रत्यक्ष संदर्भ (Cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
• इशायाह 2:2-3– विश्व-प्रदर्शनी की भविष्यवाणी: अंतिम समय में मानवजाति की सभ्यता भगवान के घर में आकर बड़प्पन से शासन-सभा करेगी। यह संदर्भ बताता है कि यरूशलेम की प्रशंसा एक विस्तृत राष्ट्र-यात्रा है।
• यशायाह 11:10– नबी के चरणों में अन्तरराष्ट्रीय आशा: दूत-वाणी के साथ एक खुला राजमार्ग खुलता है; यह बताता है कि ईश्वर की महिमा केवल यरूशलेम तक सीमित नहीं, बल्कि अभीष्ट की ऊँचाई तक जाएगी।
• मत्त 24:14– proclaiming gospel to all nations: विश्व-प्रचार का महत्त्व दर्शाता है कि यरूशलेम-प्रशंसा का संदेश सभी देश-प्रदेशों तक पहुँचेगा।
उपयोगी टिप्पणी-उद्धरण (public-domain स्रोतों से संक्षेप)
Matthew Henry के अनुसार, यह verses परमेश्वर की दृढ़ता और भक्तों के लिए निरंतर प्रार्थना की महत्ता को उजागर करते हैं: “God’s church must be upheld, and he will not be quiet till his praise is spread.”
Albert Barnes के टिप्पणी से निष्कर्ष: यह exhortation विश्वासियों को प्रोत्साहित करती है कि वे यरूशलेम की stability के लिए उम्मीद न छोड़ें; God’s plan will prevail रूप में स्पष्ट है.
Adam Clarke के विचार: यरूशलेम की जीत, सुरक्षा और महिमा का संकेत है कि प्रभु अपने चुने हुए शहर की महिमा को पूरी धरती में फैलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
संक्षिप्त निष्कर्ष/Practical takeaway
हम स्वतंत्र रूप से नहीं, बल्कि परमेश्वर की योजना के साथ कदम मिलाकर चलें। यरूशलेम की स्थिरता और उसकी प्रशंसा के प्रसार के लिए नियमित प्रार्थना करें; विश्वभर में ईश्वर की महिमा के लिए अपने जीवन के छोटे-छोटे कार्यों को समर्पित करें—धैर्य और विश्वास के साथ।