Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 62:5 पर קומטरी परिहार: अध्याय बनाम आशीर्वचन
इस पद में यशायाह की बड़ाईपूर्वक भविष्यवाणी एक विवाह-चित्रण के माध्यम से दी गई है। परमेश्वर अपने प्रजापालक प्रेम से अपने लोगों को अग्नि-पथ्र से, चिंता से नहीं, बल्कि मान-सम्मान के साथ जोड़ना चाहता है। जैसे एक नवविवाहित युवक स्वयं को दुल्हन के आँगन में लाता है, वैसे ही तेरे पुत्र तेरे लिए आनंद के साथ आकर तेरे परमेश्वर के साथ एक नई, पवित्र संलग्नता की घोषणा करेंगे। यह उद्धार और पुनःस्थापना की दशा का संकेत है, जिसमें पूरे देश के लिए नवजीवन, सुरक्षा और परमेश्वर की निकटता है।
पद का अध्यायीय संदर्भ
यशायाह के संदर्भ में यह वाक्य उस समय के बाद के भव्य उद्धार-आह्वान का भाग है, जब परमेश्वर अपने शहर को एक नई पहचान और वीरता देता है। यह दुल्हे-स्त्री के रूपक के द्वारा लोगों की सुरक्षा, प्रतिष्ठा और आत्म-विश्वास की पुनर्स्थापना की आशा दर्शाता है। जय-जयकार की भाषा यह दिखाती है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए कितनी खुशी और संतुष्टि अनुभव करता है।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षण
अन्य बाइबिल अवतरणों से तुलना
यहां विवाह-चित्रण का प्रयोग पूर्व-पंक्तियों में भी आता है—यहोशू-उद्धरणों के संदर्भ में अति-आनंद, और पाप-त्याग के बाद प्रभु की निष्कपट उपस्थिति का संकेत मिलते हैं। यह संकेत दावत और सत्ता के साथ जुड़कर एक नई वास्तविकता के उद्घाटन की तरफ इशारा करता है: परमेश्वर अपने लोगों को एक नई पहचान, सुरक्षा और मान-सम्मान देता है।
उद्धार के संदर्भ में प्रेरणा देता है कि परमेश्वर की कृपा से इतिहास का संचालन प्रेमपूर्ण और अखंड उद्देश्य के अनुरूप है, भले ही वर्तमान परिस्थितियाँ विपरीत क्यों न हों।
व्यावहारिक आवेदन
Cross-references और उनका संक्षिप्त विश्लेषण
1) इब्रानी 2:11 के समान विचार—प्रियजन के रूप में सम्मिलित होना: यह दर्शाता है कि परमेश्वर भी अपने लोगों के साथ निकटता का संबंध बनाए रखना चाहते हैं, जैसे दुल्हा दुल्हन से जुड़ता है।
2) यिर्मयाह 33:9—उत्साहपूर्ण राजधानी और सुरक्षा: यह संकेत देता है कि परमेश्वर का उद्धार केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि शहर और जाति के लिए भी है।
3) अय्यूब 29:24—उत्साह और सम्मान की अनुभूति: परमेश्वर की कृपा से सुरक्षित और सम्मानित जीवन का अनुभव होता है।
संक्षेप में, यशायाह 62:5 हमें यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर अपने लोगों पर प्रेम-उत्साह से उन्मेषित है। वह उन्हें एक नई प्रतिष्ठा देता है, जैसे दुल्हन को नए संसार का आनंद मिलता है। इस संदेश की गहराई आज भी हमारे विश्वास, समुदाय और आस्था में नई रोशनी डालती है।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के विशिष्ट उद्धरणों के शॉर्ट-फॉर्म संस्करण उपलब्ध रहने पर ही उनके स्पष्ट शब्द शामिल हैं। नीचे उद्धृत उद्धरण केवल अगर उपलब्ध हों, अन्यथा विचार-आधार को संक्षेप रूप में लिखा गया है।