Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 2:19 पर विचार
यह पंक्ति यिर्मयाह के संदेश के भीतर आया एक ठंडा और स्पष्ट स्मरण कराती है: मूर्त देवताओं के पक्ष में किया गया भटकना अंततः केवल हमारे लिये दंड का कारण बनता है। परमेश्वर सत्य, पवित्र और अपने लोगों से अपमान सहन न करने वाला है; इसलिए यदि हम यहोवा को त्यागते हैं, तो वह त्याग ही हमारी बुराई और ताड़ना बनकर हमारे सामने प्रकट होती है।
कथन का संदर्भ और अर्थ
यह वाक्य Jeremiah 2 के बड़प्पन में आया है, जहां यहोवा अपने चयनित लोगों को स्मरण कराते हैं कि उन्होंने किस तरह अपनी विरासत और उनके साथ की गई चुप्पी के बावजूद यहोवा को छोड़ दिया है। “तेरी बुराई ही तेरी ताड़ना करेगी” से यह स्पष्ट होता है कि नैतिक選ाओं के फल सीधे व्यक्ति के बारे में ही होते हैं; आत्म-आत्मविश्वास और भटकाव से उत्पन्न परिणाम स्वयं-निर्मित होते हैं। “अपने परमेश्वर यहोवा को त्यागना” एक गहरा चेतावनी संकेत है कि परमेश्वर के साथ संबंधहीनता ही दु:ख और विपदा को आमंत्रित करती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
यह वाक्य दो विशेष धारणाओं को साथ लेकर चलता है: (1) कड़वा सच यह है कि धर्म-अमन की कमी से उत्पन्न भटकाव अंततः ताड़ना का कारण बनता है; (2) परमेश्वर का भय और उसके अनुसार जीवन जीना ही बचे रहने का मार्ग है। अगर हम अपने भाग्य को संभालना चाहते हैं, तो हमें यहोवा के भय और उसकी इच्छा के अनुरूप चलना होगा, वरना असंतोष, भय और विपत्ति हमारे साथ बने रहते हैं।
उल्लेखनीय तुलनात्मक दृष्टि (cross-references)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि ईश्वर के भय के साथ जीवन जीना, उसकी आराधना और उसकी आवाज़ पर चलना, आत्म-तोड़-फोड़ और विपत्ति से बचाने का मार्ग है।
सीखा गया लाभ और व्यावहारिक अनुप्रयोग
सारांश
यिर्मयाह 2:19 हमें स्पष्ट चेतावनी देता है: हमने यदि परमेश्वर को छोड़ रखा है, तो वही हमारी सर्वाधिक ताड़ना बनेगी। सच्चे भय और विश्वास के साथ उसका पालन ही जीवन-सार है। यह आत्म-नियंत्रण और समर्पण का समय है, ताकि भटकाव के परिणाम हमारी रक्षा करें और हमारा संबंध यहोवा के साथ मजबूती से बना रहे।
टिप्पणीकारों से संक्षेप (सार)**
यह कथन Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे प्रकटन-ग्रंथों के सार्वजनिक-domain विचारों से प्रेरणा लेता है: उन्होंने यह साधारण बोध व्यक्त किया कि पाप और भटकाव अपने परिणामस्वरूप दंड ही लाते हैं, और ईश्वर के भय में ही सच्ची सुरक्षा है। प्रमुख विचार यह है कि जब אדם अपने परमेश्वर से विमुख होता है, तो वह अपनी ही नीति के अनुसार दमन झेलता है।
उद्धरण: कुछ संदेशों में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke की वही साफ-साफ उधृत पंक्तियाँ मिलती हैं जो इन विचारों को पुष्ट करती हैं—पर यहाँ हमने संपूर्ण पाठ का उद्धरण नहीं दिया है, बल्कि उनकी व्याख्या के अनुरूप सार प्रस्तुत किया है।