Old Testament
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यहोशू 14:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए अब वह पहाड़ी मुझे दे जिसकी चर्चा यहोवा ने उस दिन की थी; तूने तो उस दिन सुना होगा कि उसमें अनाकवंशी रहते हैं, और बड़े-बड़े गढ़वाले नगर भी हैं; परन्तु क्या जाने सम्भव है कि यहोवा मेरे संग रहे, और उसके कहने के अनुसार मैं उन्हें उनके देश से निकाल दूँ।”
यहोशू 14:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 14:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गिनती 13:33 (HINIRV) »
फिर हमने वहाँ नपीलों को, अर्थात् नपीली जातिवाले अनाकवंशियों को देखा; और हम अपनी दृष्टि में तो उनके सामने टिड्डे के सामान दिखाई पड़ते थे, और ऐसे ही उनकी दृष्टि में मालूम पड़ते थे।”

इब्रानियों 11:33 (HINIRV) »
इन्होंने विश्वास ही के द्वारा राज्य जीते; धार्मिकता के काम किए; प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएँ प्राप्त कीं, सिंहों के मुँह बन्द किए,

यहोशू 14:12 — एक दृढ़ विश्वास और संकल्प की पुष्टि
मुख्य बिंदु: यीशू के विरासत-प्राप्ति परिश्रम में कैसे धर्मी विश्वास और परमेश्वर के साथ निर्भरता एक नई उम्मीद दे देते हैं, यह verse एक उन्नत कदम है: मरूस्थली कठिनाईयों के बावजूद जोशू के मन में यहोतिया पर हिममत और परमेश्वर के वचन की दृष्टि उभरती है।
पाठ-विन्यास और साहित्यिक संदर्भ
यहोशू 14 में यहोशू ने यहूदियों को उन क्षेत्रों के साथ संकल्पित किया जो दावोद की विरासत के भीतर थे, खासकर पहाड़ों के क्षेत्र में अनाकीवंशी निवास की चर्चा के संदर्भ के साथ। यह verse सुदृढ़ता से दिखलाता है कि जोशू अपने समय के प्रति एक आस्था-आयाम बनाए रखते हैं: वे जानते हैं कि परमेश्वर के वचन में शक्ति है, और उसी के अनुसार वे अपने भूभाग को विजय के लिए प्रस्तुत करते हैं। मैथ्यू हेनरी की टिप्पणी से एकात्मता का संदेश मिलता है: यह निष्कपट दृढ़ता है कि परमेश्वर के साथ संगत होने पर बड़े-से-बड़े बाधक भी हट जाते हैं।
धर्मशास्त्री विचार
यह दृश्य तीन स्तरों पर प्रेरणा देता है:
रोशनी: अन्य शास्त्रीय टिप्पणीकारों से संजीव निष्कर्ष
Albert Barnes और Adam Clarke का दृष्टिकोण इस बात पर रोशनी डालता है कि दृढ़ विश्वास और परमेश्वर के साथ निकटता किस तरह मानवीय प्रयासों को दिशा देती है। Barnes के अनुसार यह दृश्य यहोशू की आत्म-विश्वास की प्रबलता को दर्शाता है—कि परमेश्वर के वचन के अनुसार कदम उठाने पर ही विजय संभव है। Clarke के शब्दों में, यह यहुदियों के इतिहास में एक भाग-न्याय की कसौटी है, जहाँ परमेश्वर की मदद से वे अनाकवंशी को जड़ से उखाड़ फेंकने की उम्मीद रखते हैं। (कृपया ध्यान दें: यहाँ विशिष्ट उद्धरण संक्षेप में दिए गए हैं ताकि पाठक संदर्भ स्पष्ट पाएं।)
क्रॉस-रेफरेंसेस
- यहोशू 14:6–12 — विस्तृत दृढ़ता और दाऊद की विरासत के साथ अन्याय-निवारण की सीमा-रेखा। स्पष्ट करता है कि किस प्रकार विश्वास-युद्ध में परमेश्वर की प्रतिज्ञा मार्गदर्शक होती है।
- निराकरण-व्यवस्था: यहह के वचन के साथ चलना—भरोसे के साथ भागीदारी की मांग करता है।
- निर्भरता पराक्रम: परमेश्वर के साथ निकटता से मनोबल बढ़ता है, और फिर दुष्प्रभावों पर विजय संभव होती है।
प्रत्येक संदर्भ यहाँ एक अभ्यास का संकेत देता है: विश्वास के साथ कदम उठाने पर परमेश्वर की सहायता स्पष्ट हो जाती है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।
सोच-विचार के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
जोशू 14:12 एक निश्चय का उद्घोष है: बड़ी बाधाओं के बावजूद परमेश्वर के साथ संबंध और उसकी आज्ञा-परायणता पर निर्भरता विजय का मूल मंत्र है। यहहूदी इतिहास में एक उदाहरण के समान है कि कैसे विश्वास, परमेश्वर के साथ निकटता, और धैर्य से जीवन के कठिन समतलों को पार किया जा सकता है।