Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयहोशू 14:15 बाइबल पद की व्याख्या
यहोशू 14:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पहले हेब्रोन का नाम किर्यतअर्बा था; वह अर्बा अनाकियों में सबसे बड़ा पुरुष था। और उस देश को लड़ाई से शान्ति मिली।
यहोशू 14:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 14:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यहोशू 11:23 (HINIRV) »
जैसा यहोवा ने मूसा से कहा था, वैसा ही यहोशू ने वह सारा देश ले लिया; और उसे इस्राएल के गोत्रों और कुलों के अनुसार बाँट करके उन्हें दे दिया। और देश को लड़ाई से शान्ति मिली।

उत्पत्ति 23:2 (HINIRV) »
तब वह किर्यतअर्बा में मर गई। यह तो कनान देश में है, और हेब्रोन भी कहलाता है। इसलिए अब्राहम सारा के लिये रोने-पीटने को वहाँ गया।

यहोशू 15:13 (HINIRV) »
और यपुन्ने के पुत्र कालेब को उसने यहोवा की आज्ञा के अनुसार यहूदियों के बीच भाग दिया, अर्थात् किर्यतअर्बा जो हेब्रोन भी कहलाता है (वह अर्बा अनाक का पिता था)।
यहोशू 14:15 पर निहित महत्व और संदर्भ
यह verse हमें परमेश्वर के वादे के दोहराव और सीमाओं के अधिग्रहण की कथा से जोड़ता है। किर्यत-अर्बा के नाम से पहचाने गए हेब्रोन शहर की विजय ने जीवित विश्वास के युद्धों में शांति के समय की शुरुआत की। यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के साथ चढ़ाई में विजय के बाद ही शांति चलती है, और यह शांति नहीं केवल रणभूमि की खामोशी है, बल्कि यह यहोशू और इस्राइल की जनता के लिए संरक्षित मार्ग है जिसमें वे राष्ट्रों के विरुद्ध स्थिरता पाते हैं।
प्रसंग के शुरुआती संदर्भ
यहोशू के युग में, यह्रोन के विरुद्ध एक निर्णायक लड़ाई के बाद, इस्राइल को यह स्पष्ट मिलता है कि परमेश्वर उनके साथ है और हर क़दम पर उनकी सहायता करेगा। किर्यत-अर्बा—जो पहचाना गया था कि अनाकियों में सबसे बड़ा पुरुष था—का पतन एक विशेष आशीष के रूप में आता है: इस देश को विजय के साथ शांति मिली। ऐसी शांति आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों अर्थों में है: निवास-स्थल की सुरक्षा और उन आघातों से मुक्त होना जो युद्ध से उत्पन्न होते हैं।
मुख्य संदेश
मुख्य विचार यह है कि परमेश्वर के निर्देश में किया गया विजय प्रयास अंततः शांति और स्थिरता लाता है। युद्ध के समय में भी यह विश्वास रहता है कि परमेश्वर बनाये गये मार्ग पर चलने में सक्षम है। जैसे ही यहोशू के नेतृत्व में इस्राइल ने ग़ुलामी और निंदा की शक्तियों को पीछे छोड़ दिया, उनके लिए शांति के द्वार खुले।
थीम्स और प्रभावकारिता
पवित्र पूर्वक उद्धरण (संक्षेप) और commentators के संकेत
योग्य टिप्पणीकारों ने इस verse के पीछे एक सामान्य विचार प्रस्तुत किया है: परमेश्वर के साथ सेनाओं का समन्वय ही शांति और सुरक्षित जीवन का आधार है। हास्यास्पद नहीं, बल्कि यह एक ठोस तथ्य है कि प्रतिशोध के समय भी परमेश्वर के मार्ग पर चलना ही सफलता देता है।
उद्धरण-रूप में (सार):
मैथ्यू हेनरी से सारगर्भित विचार कहते हैं कि परमेश्वर की सहायता से ही शत्रु पर विजय संभव है और यह विजय अंततः शांति का प्रवेश कराती है।
एल्बर्ट बार्न्स के अनुसार यह दिखाता है कि यहोशू की सेना ने परमेश्वर के आदेशों के अनुसार आगे बढ़कर शांति का मार्ग पाया, जो यहूदियों के लिए दीर्घकालिक संरचना बन गयी।
एडम क्लार्क के अनुसार यह संकेत देता है कि राष्ट्रों के विरुद्ध विजय मिलने पर स्थायित्व और उपस्थिति के साथ शांति आती है, जो प्रभु की कृपा से संभव है।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनके उचित संयोजन
यहोशू 11–12: कई नगरों पर विजय के बाद स्थिरता का उल्लेख—यह दिखाता है कि कुशल नेतृत्व और परमेश्वर की मदद से क्षेत्रीय नियंत्रण में शांति स्थापित होती है।
गनती 6:24–26 (आशीर्वाद के शब्द)—शांति और सुरक्षा के लिए आशीर्वाद की यह पंक्तियाँ, यह दिखाती हैं कि परमेश्वर की इच्छा अपने लोगों के जीवन में शांति बनाये रखना है।
निर्गमन 23:25–26—उद्धोष और भलाई के मार्ग में परमेश्वर की सेवा से शांति मिलती है; रोग और कमी के बिना जीवन की तरफ संकेत करें।
अंतिम दैनिक विचार
यह verse हमें सिखाता है कि साहसपूर्वक प्रभु के निर्देशों के साथ आगे बढ़ना, न केवल युद्ध के समय बल्कि शांति के लिए भी आवश्यक है। यह शांति भीतर की प्रेरणा है— विश्वास में स्थिर रहकर हम नयी सीमाओं को पार कर सकते हैं। याद रहे: शांति का वास्तविक स्रोत परमेश्वर की उपस्थिति और मार्गदर्शन है; मैदानों के बराबर यह आंतरिक सुरक्षा है जो जीवन के हर पड़ाव को संरक्षित करती है।