Old Testament
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यहोशू 14:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब उस दिन मूसा ने शपथ खाकर* मुझसे कहा, 'तूने पूरी रीति से मेरे परमेश्वर यहोवा की बातों का अनुकरण किया है, इस कारण निःसन्देह जिस भूमि पर तू अपने पाँव धर आया है वह सदा के लिये तेरा और तेरे वंश का भाग होगी'।
यहोशू 14:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 14:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 1:36 (HINIRV) »
केवल यपुन्ने का पुत्र कालेब ही उसे देखने पाएगा, और जिस भूमि पर उसके पाँव पड़े हैं उसे मैं उसको और उसके वंश को भी दूँगा; क्योंकि वह मेरे पीछे पूरी रीति से हो लिया है।'

यहोशू 1:3 (HINIRV) »
उस वचन के अनुसार जो मैंने मूसा से कहा, अर्थात् जिस-जिस स्थान पर तुम पाँव धरोगे वह सब मैं तुम्हें दे देता हूँ।

गिनती 14:22 (HINIRV) »
उन सब लोगों ने जिन्होंने मेरी महिमा मिस्र देश में और जंगल में देखी, और मेरे किए हुए आश्चर्यकर्मों को देखने पर भी दस बार मेरी परीक्षा की, और मेरी बातें नहीं मानी, (इब्रा. 3:18)
यहोशू 14:9 का भावार्थ और संदर्भ
इस वाक्य का मूल संदेश है: परमेश्वर के वचन और शपथ का पालन करने से भूमि का भाग सुरक्षित रहता है। मूसा की शपथ के अनुसार जो ने आज तक שपथ किया है, वही वादा किया गया है कि वह और उसका वंश उस भूमि के भागदार होंगे। यहोशू 14:9 में यह सिद्धांत पुष्ट होता है कि परमेश्वर की बातों के अनुरूप जीवन बिताने पर दी गई प्रतिज्ञा प्रत्येक पीढ़ी के लिए स्थिर रहती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
व्यवस्थित पूर्व-इतिहास में मोशे ने यरुशलेम के निष्कर्षों से पहले इस भूमि-आशीषा का स्मरण करवाया था। यहां वह यह बताने के लिए मूसा से एक पक्का दायित्व प्राप्त करता है कि जिस भूमि पर तुम्हारे पांव पड़े हैं, वह तेरे और तुम्हारे वंश के लिए है। यह पल उस समय का है जब यरदन के पूर्वी किनारे से मूसा के समापन-कार्य के बाद यहोशू नेतृत्व संभालता है और नए परिवारों को उनकी धरोहर मिलती है।
interpretive observations (व्याख्यात्मक बिंदु)
थीमैटिक ब्रह्म-वाक्य
क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेतित सम्बन्ध)
1) इब्रानी 11:30-31 जैसी चढ़ती आस्था की चर्चा इस तथ्य को पुष्ट करती है कि विश्वास से नगर-यात्रा संभव होती है।
2) व्यवस्थावली 28:1-14 — शास्त्रीय अनुग्रह और आशीर्वाद के नियम, जहाँ वचन के अनुसार चलने पर आशीष मिलती है।
3) व्यवस्थावली 32:20-23 — परमेश्वर के वचनों की पवित्रता और उनके प्रति श्रद्धा का महत्व।
इन संबद्ध पाठों से स्पष्ट है कि शपथ और वचनों की आज्ञा मानना विश्वास-जीवन के लिए आवश्यक है।
संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway
जो कुछ परमेश्वर ने बताया है, उसे मानकर चलना ही जीवन के भविष्य के लिए सुरक्षा देता है। आपके घर-परिवार और समुदाय में भी धार्मिक नियमों के प्रति सच्चाई और निष्ठा बनाए रखें ताकि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार आपकी धरोहर सुरक्षित रहे।
आवश्यक उद्धरण (संदर्भित पूर्व-विश्वासित टिप्पणीकारों के स्पष्ट उद्धरण)
मार्थ्यू हेनरी (Matthew Henry) और अबर्ट बेर्न्स (Albert Barnes) तथा एडम क्लार्क (Adam Clarke) के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारिता से संकल्पित विचारों को एकीकृत किया गया है।
कृपया ध्यान दें: नीचे दिए गए दैनंदिन उद्धरण केवल संदर्भार्थ हैं और पूर्ण पाठ नहीं हैं:
“अध्याय के हिसाब से परमेश्वर की वाणी का पालन करना ही वास्तविक धार्मिकता है।” (सारांश, Matthew Henry) — यह एक प्रेरक विचार है जो बताता है कि वचन-संरक्षण से ही आशीष मिलती है।
नोट: यदि आप चाहें तो मैं अधिक विशिष्ट अंश (कठोर शब्दों में) Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के होंठ-उद्धरणों के अनुसार दे सकता हूँ, बशर्ते आप पाठ की अनुमति दें।