Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयहोशू 14:4 बाइबल पद की व्याख्या
यहोशू 14:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यूसुफ के वंश के तो दो गोत्र हो गए थे, अर्थात् मनश्शे और एप्रैम; और उस देश में लेवियों को कुछ भाग न दिया गया, केवल रहने के नगर, और पशु आदि धन रखने को चराइयाँ उनको मिलीं।
यहोशू 14:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 14:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 48:5 (HINIRV) »
और अब तेरे दोनों पुत्र, जो मिस्र में मेरे आने से पहले उत्पन्न हुए हैं, वे मेरे ही ठहरेंगे; अर्थात् जिस रीति से रूबेन और शिमोन मेरे हैं, उसी रीति से एप्रैम और मनश्शे भी मेरे ठहरेंगे।

1 इतिहास 5:1 (HINIRV) »
इस्राएल का जेठा तो रूबेन था, परन्तु उसने जो अपने पिता के बिछौने को अशुद्ध किया, इस कारण जेठे का अधिकार इस्राएल के पुत्र यूसुफ के पुत्रों को दिया गया। वंशावली जेठे के अधिकार के अनुसार नहीं ठहरी।

गिनती 35:2 (HINIRV) »
“इस्राएलियों को आज्ञा दे, कि तुम अपने-अपने निज भाग की भूमि में से लेवियों को रहने के लिये नगर देना; और नगरों के चारों ओर की चराइयाँ भी उनको देना।
यहोशू 14:4 – संक्षिप्त अर्थ
यहोशू 14:4 में कहा गया है कि यूसीफ (यूसुफ) के वंश के दो गोत्र बन गए: मनश्शे और एप्रैम; इसी देश में लेवी को कोई भाग नहीं दिया गया, बल्कि वे रहने के नगर पाए, और पशु-चराने की व्यवस्था उनके लिए रखी गई। इसका मतलब है कि दान-स्वरूपी भूभाग के लिए नहीं, बल्कि स्थायी निवास और पूण्य कार्यों के लिए लेवी को विशिष्ट व्यवस्था दी गई थी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहवाक्य योहशू के समय के आरम्भिक विरासत-विभाजन का हिस्सा है। यहूदियों के कनान के भूभाग का बंटवारा पूरे समय उहाँ में लेवी की भूमिका क्या होगी, यह निर्धारित करता है। लेवी पर विशिष्ट दायित्व और परमेश्वर की सेवा का उत्तरदायित्व है, अतः उन्हें भूभाग नहीं दिया गया ताकि वे मेंहदीयियाँ सेवा-कार्य में खड़े रहें।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संरचित विचार (थीमिक बिंदु)
क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त स्पष्टिकरण
1) स्पष्टता: नियम-परिवर्तन में लेवी को भाग नहीं मिला; नगर और चरागाहों के नियंत्रण के साथ उनकी भूमिका पारिश्रमिक से अधिक सेवा-कार्य की निश्चितता है।
2) संतुलन: दान-भूमि का विभाजन प्रत्येक वंश के लिए एक-एक संकीर्ण भूमिका नहीं बनाता—कई वंशों के बीच सेवा और पूजन के लिए समरूपता बनती है।
3) समुदाय और पूजन: लेवी की बस्तियों का नगर-पर्याय, पूजन-स्थल की निकटता से समुदाय की आध्यात्मिक प्रेरणा बनती है।
संदर्भ-योग और संक्षिप्त व्याख्या
- संदर्भ 1: अन्यत्र जहां लेवी को नगर और ग्राम मिले, वहाँ सेवा-कार्य प्रमुख रहा।
- संदर्भ 2: सभा-निवास और पूजन-स्थलों के निकटता से नेतृत्व-संरचना मजबूत होती है।
- संदर्भ 3: मनश्शे और एप्रैम के वंश-बंटवारे से याकूबीय परिवार के इतिहास में विविधता उजागर होती है।
छोटा व्यावहारिक takeaway
समुदाय में हर वर्ग की भूमिका भगवान के उद्देश्य के अनुसार निर्धारित होती है: लेवी सेवा-कार्य में समर्पित रहे, ताकि पूजा-स्थलों की पवित्रता सुरक्षित रहे और समुदाय को आध्यात्मिक दिशा मिलती रहे।
कोटि-उद्धरण (संदर्भित पाठ)
हमें Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट प्रकाशन से मिलते संकेत मिलते हैं। निम्न उद्धरण केवल संकेतिक रूप में दिए जाते हैं:
— "The Levites were not to have a territorial portion as the other tribes, but cities with suburbs for their dwelling and pasture." (अनुमानित सार)
— "God's service requires a distinct place and provision, that the priests might be free for the work of sacrifices." (अनुमानित सार)
नोट: उपरोक्त उद्धरण केवल संदर्भ-स्तम्भ के तौर पर संकेतित हैं; पूर्ण टेक्स्ट के लिए मूल टिप्पणियों के रूप-रूप देखें।