Old Testament
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यहोशू 3:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और याजक यहोवा की वाचा का सन्दूक उठाए हुए यरदन के बीचों बीच पहुँचकर स्थल पर स्थिर खड़े रहे, और सब इस्राएली स्थल ही स्थल पार उतरते रहे, अन्त में उस सारी जाति के लोग यरदन पार हो गए।।
यहोशू 3:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 3:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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निर्गमन 14:29 (HINIRV) »
परन्तु इस्राएली समुद्र के बीच स्थल ही स्थल पर होकर चले गए, और जल उनकी दाहिनी और बाईं दोनों ओर दीवार का काम देता था।

निर्गमन 14:22 (HINIRV) »
तब इस्राएली समुद्र के बीच स्थल ही स्थल पर होकर चले, और जल उनकी दाहिनी और बाईं ओर दीवार का काम देता था।

यशायाह 25:8 (HINIRV) »
वह मृत्यु को सदा के लिये नाश करेगा, और प्रभु यहोवा सभी के मुख पर से आँसू पोंछ डालेगा, और अपनी प्रजा की नामधराई सारी पृथ्वी पर से दूर करेगा; क्योंकि यहोवा ने ऐसा कहा है। (1 कुरि. 15:54, प्रका. 7:17, प्रका. 21:4)
यहोशू 3:17 पर टिप्पणी
यह verse जुड़ाव का क्षण है जब इस्राएली लोग यरदन पार कर एक नई अवस्था की ओर बढ़ रहे थे। यहोशू के नेतृत्व में यहूदी समुदाय ने वाचा के सन्दूक के साथ यरदन के बीचों-बीच पहुंचकर उसे स्थिर खड़े रहने दिया, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परमेश्वर की शक्ति से ही नदी का प्रवाह अवरुद्ध होकर उनके लिए मार्ग बना चाहिए। याजक और सारा समुदाय क्रमशः पार उतरते रहे और अंततः सभी एक-एक करके स्थल-ही-स्थल पार कर गये। यह दृश्य आस्था, आदेश और ईश्वर की वाचा के अनुरोध का प्रतीक बन गया।
मुख्य विचार
इस verse में तीन प्रमुख बातें स्पष्ट होती हैं: ईश्वर की पवित्र आज्ञा के अनुसार माध्यम बनना (याजकों का सन्दूक स्थिर खड़ा होना), परमेश्वर की क्रियाशीलता पर भरोसा करते हुए कदम बढ़ाना, और समुदाय के लिए एक स्पष्ट मार्ग-निर्माण। यह बताता है कि बिना पवित्र केन्द्र के बिना मार्ग संभव नहीं, और विश्वास से कदम उठाने पर ईश्वर तुरंत आशीष देता है।
दो-तीन महत्वपूर्ण विषय
संबंधित अन्य पाठ
योग्य क्रॉस-रेफरेंसेज: - यहोशू 4:14 — इस स्मारक के पत्थरनुमा संकेत और प्रत्येक कुल के लिए स्मरणीय बनता है. - निर्गमन 14:21-22 (उद्धृत भावनाएं): परमेश्वर की प्रचंड सहायता और मोशे के साथ प्रेरणा—आस्था की गहराई दिखती है। - विश्वासी संकल्प के पंक्तियाँ: यहूदियों के लिए निर्भरता और निर्देश के मानक को पुष्ट करती हैं कि परमेश्वर के साथ चलना ही सुरक्षा है.
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि पवित्र स्थान और चिह्न केवल स्मारक नहीं, बल्कि आस्था के पथ के मार्गदर्शक हैं—यहोशू 3 की घटना इस बात का प्रतीक है कि परमेश्वर के आदेश के अनुरूप चलना जीवनभर का मार्ग बनाता है।
व्यावहारिक मनन
जब कभी हम नए चरण में प्रवेश करें—चाहे वह व्यक्तिगत परिवर्तन हो या सामुदायिक योजना—तो परमेश्वर की वाचा के केन्द्र को बनाए रखें। कठिनाई के बीच भी ईश्वर की स्पष्ट योजना पर विश्वास रखें, और क्रियान्वयन से पहले उसकी आज्ञा को मानना न भूलें।
संक्षेपित निष्कर्ष
यही verse यह दर्शाता है कि विश्वास–आज्ञा–आंशिक जोखिम उठाकर आगे बढ़ना परमेश्वर की शक्ति को वास्तविकता में लाने का मार्ग है। याजकों के सन्दूक का स्थिर होना और जातियों का क्रम से पार होना यह दिखाते हैं कि परमेश्वर के नियम में संगठित आचरण से आश्चर्यजनक रास्ते खुलते हैं।
उद्धृत प्रमुख विचारधारा (सूक्ष्म उद्धरण)
यह पाठ सीधे किसी विशिष्ट बाहरी उद्धरण को नहीं देता; परन्तु Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain विचारों के साथ मिलकर एक संगत चित्र बनता है: वे इस घटना को आध्यात्मिक सुरक्षा और ईश्वर की प्रेरित योजना के प्रमाण के रूप में देखते हैं—याजकों के हस्तक्षेप और लोगों की निर्भरता में ईश्वर की वह शक्ति प्रकट होती है जो आगे बढ़ने का मार्ग बनाती है।