Old Testament
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रूत 2:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मोआबिन रूत ने नाओमी से कहा, “मुझे किसी खेत में जाने दे, कि जो मुझ पर अनुग्रह की दृष्टि करे, उसके पीछे-पीछे मैं सिला बीनती जाऊँ। उसने कहा, “चली जा, बेटी।”
रूत 2:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रूत 2:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लैव्यव्यवस्था 23:22 (HINIRV) »
“जब तुम अपने देश में के खेत काटो, तब अपने खेत के कोनों को पूरी रीति से न काटना, और खेत में गिरी हुई बालों को न इकट्ठा करना; उसे गरीब और परदेशी के लिये छोड़ देना; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।”

लैव्यव्यवस्था 19:9 (HINIRV) »
“फिर जब तुम अपने देश के खेत काटो, तब अपने खेत के कोने-कोने तक पूरा न काटना, और काटे हुए खेत की गिरी पड़ी बालों को न चुनना।

व्यवस्थाविवरण 24:19 (HINIRV) »
“जब तू अपने पक्के खेत को काटे, और एक पूला खेत में भूल से छूट जाए, तो उसे लेने को फिर न लौट जाना; वह परदेशी, अनाथ, और विधवा के लिये पड़ा रहे; इसलिए कि परमेश्वर यहोवा तेरे सब कामों में तुझको आशीष दे।
रूत 2:2 — immediate setting
पद्य में मोआब की युवती रूत तथा नाओमी के बीच की परिस्थिति पहली बार स्पष्ट दिखती है: नाओमी के स्वीकृत परिवार-परिजनों के पेचीदा समय में रूत अपनी सुरक्षा और अन्न के लिए व्यक्त देहात की राह पकड़ती है। रूत कहती है कि वह खेत में जाकर उन पर दया के संकेत की खोज करेगी जो उसके प्रति कृपालु हों। इस छोटे-से कथन में वचन-विमर्श का ध्येय है—विश्वास और समुदाय के साथ एक नए संरचना की शुरुआत।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से स्पष्ट तथ्य
यह अंश दिखाता है कि ईश्वर मानव जीवन के छोटे-छोटे निर्णयों में भी मार्गदर्शक बनते हैं। नाओमी की नकारात्मक स्थिति के बीच रूत की विश्वास-भरी दृढ़ता और उसकी अगुवाई में लचीलापन ईश्वर की देखरेख को प्रकट करते हैं। यहूदियों के लिए फसल-यज्ञ और दया-योजना के साथ, अनाज एक प्रतीक बनकर आता है कि ईश्वर की कृपा कैसे अनाज और सुरक्षा के रूप में व्यक्त होती है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अन्य पाठ-संबंध (Related Passages)
घटक संकेतों के साथ कुछ प्रचलित क्रॉस-रेफरेंसेज:
आधुनिक उपयोग और आध्यात्मिक अनुप्रयोग
आज की दुनिया में भी हम देख सकते हैं कि अन्न-भोजन और सुरक्षा के लिए समुदाय-आधार पर निर्भर रहना होता है। रूत के साहस के साथ, हमें परायों के प्रति दया दिखाने, निर्धनों की सहायता करने और छोटी-छोटी गतिविधियों से ईश्वर के उद्देश्य को पूरा करने की प्रेरणा मिलती है. कठिन समय में भी विश्वास-योजना के साथ कदम बढ़ाने से ही हमारे जीवन में आशा बनती है और समुदाय मजबूत होता है.
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क से संक्षिप्त संदर्भ
यह अनुभाग इनके विश्लेषण से प्रेरित अंतर्दृष्टि प्रस्तुत करता है:
मैथ्यू हेनरी कहते हैं कि रूत की यह इच्छा दिखाती है कि वह नाओमी के साथ नहीं, बल्कि परमेश्वर के आदेश के तहत विश्वास के पथ पर चलना चाहती है, और यह साधारण शब्दों में भी ईमानदारी की मिसाल है।
अलबर्ट बार्न्स के अनुसार, जहां दया दिखती है, वहां ईश्वर की कृपा जीवंत हो उठती है; खेत में जाकर अनाज बीनना एक सामाजिक-स्तर पर सुरक्षा के संकेत देता है।
एडम क्लार्क उदाहरण देते हैं कि यह कदम रूत के दृढ़ विश्वास और नाओमी के भाग्य के बीच एक नई संभावना खोलता है, जिससे आगे उनके भाग्य-निर्माण की प्रक्रिया आरंभ होती है।
निष्कर्षतः, इस छोटे से Verse में ईश्वर की व्यवस्था और मानवता की करुणा मिलकर एक ऐसी राह दिखाते हैं जहां विश्वास, कर्म और समुदाय—तीनों एक साथ चलते हैं।