Old Testament
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रूत 2:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब बोआज ने अपने उस सेवक से जो लवनेवालों के ऊपर ठहराया गया था पूछा, “वह किस की कन्या है?”
रूत 2:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रूत 2:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रूत 2:5 पर टिप्पणी — संदर्भ और आत्मसार
पाठ के पूर्वकथन के अनुसार, रूत की कथा इसमें unfolds करती है कि कैसे ब्योअज़ ने लवनेवाला बनकर अपनी सेवा-कर्तव्य को निभाते हुए न केवल एक पारिवारिक सुरक्षा-चक्र बनाया, बल्कि दया, वफादारी और निष्ठा के मॉडल दिखाए। इस पात्र का प्रश्न—“वह किस की कन्या है?”—एक सूचक है कि सोच-समझकर रिश्तों की जड़ें, परिवारिक मेल-जोल, और सामाजिक उत्तरदायित्व कैसे एक साथ जुड़ते हैं।
मुख्य विचार
यहाँ बोअज़ का यह सवाल दो पहलुओं को उजागर करता है: एक यह कि वह अपने खेतों में आश्रय-व्यवस्था के नियमों को मानते हुए कर्मशील न्याय को प्राथमकिता देता है; और दूसरा यह कि वह युवती रूत की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और उसकी आस्था को पहचानने हेतु जाने-अनजाने एक अवसर बनाता है ताकि वे दोनों मिलकर शिक्षा, सुरक्षा और समुदायिक समरसता की दिशा में बढ़ सकें।
दो प्रमुख विषय
संबंधित पיור passages
1) रो़त 1:16–17 — निष्ठा और परिजन-सम्बन्ध की गहराई: रूत के निर्णय में कुटुंब के भीतर वफादारी की मिसाल मिलती है, जो आगे उनकी यात्रा के मार्ग को निर्धारित करती है।
2) रो़त 3:11 — सुरक्षा और सम्मान का बन्धन: समुदाय में महिलाओं की सुरक्षा के लिए योजनाबद्ध कदमों की भूमिका स्पष्ट होती है।
3) यिर्मयाह 31:3 — प्रेम और वफादारी द्वारा दिशा-निर्देश: परिश्रमी और दया दिखाने वाले का स्वागत और सुरक्षा के संदर्भ में दृष्टिकोण देता है।
व्यावहारिक चिंतन
हम अपने समाज में ऐसे समय में रहते हैं जब सहायता के छोटे-चोटे कदम बड़े परिवर्तन लाते हैं। बोअज़ का प्रबंधन और रूत की निष्ठा हमें यह सिखाती है कि किसी की स्थिति को समझकर, उचित अवसर और सम्मान देना, कितनी बड़ी संसाधन-सहायता बन सकता है। एक समुदाय जो सामाजिक सुरक्षा के लिए व्यावस्थित कदम उठाता है, वह परिवारों और निर्धन व्यक्तियों के लिए आशा बन जाता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
रूत 2:5 हमें बताता है कि रोशनी भाड़े पर नहीं, बल्कि कर्तव्य और दया के साथ आती है। बोअज़ का यह प्रश्न एक सक्रिय सुरक्षा-युक्ति का भाग है, जो रूत के लिए इतना ही नहीं बल्कि आगे के पुरालेख-आयुक्त घटनाक्रम के लिए दरवाज़े खोलता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके सार
- रो़त 1:16–17: निष्ठा और पारिवारिक बन्धन का विस्तार; रूत की करुणा-भरी प्रतिबद्धता का महत्त्व।
- रो़त 3:11: सुरक्षा और सम्मान के सामाजिक बंधन का संकेत; समुदाय में कदम-समझौते।
- यिर्मयाह 31:3: प्रेम-आधारित मार्गदर्शन जो दया और विश्वास के साथ जुड़े रहते हैं।
नोट: इस पाठ के लिए उपलब्ध प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के विचार सार को इस सार-संगठन में समाहित किया गया है, ताकि पाठक आसानी से केंद्रीय संदेश समझ सकें—परन्तु उद्धृत पूर्ण वाक्यों का संकलन नहीं किया गया है।