रूत 2:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जब वह बीनने को उठी, तब बोआज ने अपने जवानों को आज्ञा दी, “उसको पूलों के बीच-बीच में भी बीनने दो, और दोष मत लगाओ।

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रूत 2:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

रूत 2:15 का संक्षेप और संदर्भ

इस पद में बोआज ने रूत को खाने-पीने के लिए नहीं, बल्कि बीनने के क्षेत्र में आत्म-विश्वास के साथ काम करने की अनुमति दी। वह अपने जवानों को निर्देशित करता है कि बीनने के बीच-बीच में भी रूत को छोड़ कर न दें और उसे दोष न लगाएं, भले ही वह एक विदेशी महिला है। यह निर्देश दिखाता है कि क्षेत्र के भीतर सामाजिक नियमों के बावजूद दयालुता और न्याय के साथ व्यवहार संभव है, और उद्धारकर्ता के पूर्व आगमन की पहचान इस प्रकार के व्यवहार से झलकती है।

केंद्रीय भावार्थ

वस्तुतः यह वाक्य बताता है कि ईश्वर की providence के साथ मानव समुदाय में किस प्रकार की करुणा और सुरक्षा प्रकट होती है। बोआज का निर्देश एक सामाजिक सुरक्षा और बराबरी की भावना को प्रकट करता है: एक विदेशी महिला के लिए भी किसान समुदाय में जगह बनती है, ताकि वह भी आर्थिक रूप से निर्भर न रहे, और परमेश्वर के चुकाए गए नियमों के अनुरूप वह अपने भाग्य का कुछ भाग स्वयं बना सके।

म omissions प्रमुख विषय

  • धार्मिक और सामाजिक परंपराओं के भीतर करुणा का व्यवहार: बोआज का यह आदेश यह दर्शाता है कि कानून और परंपरा से ऊपर प्रेम और सुरक्षा का दायित्व है।
  • सुरक्षा और सम्मान का स्थान: रूत के लिए अलग से छूट नहीं बल्कि सामान्य अधिकारों के भीतर उसे काम करने की आज़ादी मिली है।
  • भगवान की योजना का संकेत: यह वाक्य न सिर्फ तत्काल आर्थिक व्यवस्था दिखाता है, बल्कि भविष्य के उद्धार के क्रम में रूत की भूमिका की ओर संकेत करता है।

अन्य संबंधित पाठ

— जुड़ते हुए विचार: रोम 12:17-21 में प्रेम और न्याय की प्रेरणा; 2 समुले 4:13-14 में भरोसेमंद कर्तव्य और कृपा का संयुक्त प्रभाव; मत्ती 25:35-36 में आवश्यकता में सहायता के संकेत।

व्यावहारिक प्रतिबिंब

आधार होता है कि समाज में कमजोर वर्गों के प्रति दया और सहायता बनी रहे। जब हम ठीक-ठीक जिम्मेदारी के साथ अन्याय से बचते हैं और आवश्यक मदद देते हैं, तो यह समुदाय के भीतर विश्वास और कल्याण को बढ़ाता है। यह वाक्य प्रेरणा देता है कि अवसरों के भीतर भी सुरक्षा और सम्मान बनाए रखना चाहिए, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।

संक्षिप्त निष्कर्ष

רूत 2:15 का यह निर्देश दिखाता है कि आध्यात्मिक परिवार के भीतर सहयोग और करुणा का वातावरण बन सकता है। बोआज के आदेश में व्यावहारिक नीति और मानवीय स्पर्श एक साथ जुड़ते हैं, जिससे रूत के लिए स्थिरता और सम्मान सुनिश्चित होते हैं। यह कहानी के भावी मोड़ के लिए एक महत्वपूर्ण चरण है, जो दिखाता है कि कैसे ईश्वर की योजना इन सरल, दैनिक प्रथाओं के द्वारा आरम्भ होती है।

क्रॉस-रेफरेंसेस

रोम 12:17-21 — बेईमान प्रतिफल के बजाय प्रेम से उत्तर देने का सिद्धांत; नीतिवचन 22:22-23 — कमजोर के अनुसार न्याय का सम्मान; मितव्ययिता और दया के साथ व्यवहार करने की प्रेरणा।

महत्वपूर्ण उद्धरण (Matt. Henry, Barnes, Clarke)

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रूत 2:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्‍वर से माँगो, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी।

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