Old Testament
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रूत 2:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
नाओमी ने अपनी बहु रूत से कहा, “मेरी बेटी यह अच्छा भी है, कि तू उसी की दासियों के साथ-साथ जाया करे, और वे तुझको दूसरे के खेत में न मिलें।”
रूत 2:22 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रूत 2:22 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नीतिवचन 27:10 (HINIRV) »
जो तेरा और तेरे पिता का भी मित्र हो उसे न छोड़ना; और अपनी विपत्ति के दिन, अपने भाई के घर न जाना। प्रेम करनेवाला पड़ोसी, दूर रहनेवाले भाई से कहीं उत्तम है*।

श्रेष्ठगीत 1:8 (HINIRV) »
हे स्त्रियों में सुन्दरी, यदि तू यह न जानती हो तो भेड़-बकरियों के खुरों के चिन्हों पर चल* और चरावाहों के तम्बुओं के पास, अपनी बकरियों के बच्चों को चरा।
सीधे अर्थ का सार
रूत 2:22 में नाओमी रूत को सुरक्षा और स्थिरता के लिए यह निर्देश देती हैं कि वह दासियों के साथ खेतों में कार्य करे ताकि वह अन्य किसी खेत में आकाश से सुरक्षा प्राप्त करे और किसी प्रकार के नुकसान से बची रहे.
पृष्ठभूमि
रोएब नामक कृषक के खेत पर रूत, मोआब की वह विधवा, नाओमी के साथ कृतज्ञता और नई शुरुआत की उम्मीद लेकर आई है। कानून के अनुसार, इस समय इस्राइल में गरीब और परित्यक्तों के लिए खेतों में काम करना नियत था, ताकि वे अनाज का भाग प्राप्त कर सकें। नाओमी यह चाहती हैं कि रूत सुरक्षित और निष्कपट तरीके से अपनी परिश्रम से जीवनयापन करे, और संभव हो तो खेतों में दासियों के साथ छिपकर, किसी की नजर से बचकर नहीं, बल्कि सही जगहों पर काम करे।
व्याख्यात्मक सूक्ष्म विचार
समानार्थी पाठ से जुड़ी छोटी सूची
अनुसरण करने योग्य क्रॉस-रेफरेंसेस
- लुईक 10:25-37 — परित्यक्ता और सामाजिक सुरक्षा के लिए पारस्परिक देखभाल के दृष्टांत बताए जाते हैं; दिखाता है कि समुदाय कैसे सुरक्षा देता है।
- फसह 2:15-16 — खेतों में काम करने की व्यवस्था और निर्देश, जिसे वैध रूप से पालन किया जाता है ताकि दुर्बल लोग सुरक्षित रहें।
-uter 2:11-12 — प्रकटन और परिश्रम के साथ इनाम की प्रेरणा, और परमेश्वर की दया के संदर्भ में सम्मान का भाव।
इन क्रॉस-रेफरेंसेस का उद्देश्य यह दिखाना है कि रूत का कदम समुदाय के भीतर सुरक्षित और सम्मानित जीवन की दिशा है—जहाँ परिश्रम और विश्वास एक साथ चलते हैं।
संक्षेपित व्याख्या
नाओमी का यह सुझाव रूत के लिए एक पथ-निर्देशन है: अपने जोखिमों को कम करते हुए, दासियों के साथ समान आयाम में काम कर, खेतों में सुरक्षित रहें। यह कदम धार्मिक और सामाजिक संरचना में सुरक्षा, पहचान और स्थिरता की मांग को दर्शाता है, ताकि रूत और नाओमी दोनों को नई आशा मिले।
व्यावहारिक निष्कर्ष
जो दिखता है, वह यह कि कठिन समय में बुद्धिमान सुरक्षा-चिन्तन और समुदाय की सहायता कैसे एक परिवार को नए जीवन की दिशा में ले जा सकती है। रूत की संवेदनशीलता और नाओमी की मार्गदर्शक भूमिकाइन मिलकर एक ऐसी शुरुआत की ओर इशारा करती है जहाँ विश्वास-परिश्रम से जीवन सुरक्षित और सामर्थ्यशाली बनता है।
संदर्भ टिप्पणी: इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सीधे उद्धरण आवश्यक नहीं थे; पर उनके विचारों के संकेत इस प्रकार प्रेरित हैं कि कैसे दया, सुरक्षा और समुदाय की व्यवस्था व्यक्तिगत संघर्ष के बीच आशा बनाती है।