Old Testament
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रूत 2:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब वह भूमि तक झुककर मुँह के बल गिरी, और उससे कहने लगी, “क्या कारण है कि तूने मुझ परदेशिन पर अनुग्रह की दृष्टि करके मेरी सुधि ली है?”
रूत 2:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रूत 2:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 शमूएल 25:23 (HINIRV) »
दाऊद को देख अबीगैल फुर्ती करके गदहे पर से उतर पड़ी, और दाऊद के सम्मुख मुँह के बल भूमि पर गिरकर दण्डवत् की।

रोमियों 12:10 (HINIRV) »
भाईचारे के प्रेम* से एक दूसरे पर स्नेह रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।

2 शमूएल 9:8 (HINIRV) »
उसने दण्डवत् करके कहा, “तेरा दास क्या है, कि तू मुझे ऐसे मरे कुत्ते की ओर दृष्टि करे*?”
रूत 2:10 का संदर्भ और उसका आध्यात्मिक संदेश
यहVerse रूत के खेत के समय, बेरून की भूमि में, वह मिक्लहत का शहर छोड़कर नीतोमी की नातिन रूत के ईमानदार कदम के साथ प्रवेश करती है। वह उस समय भूमि पर आई है जब बेईत-यश्वे में अश्वमेघशीलता नहीं है, बल्कि दयालुता और कृपा के बीच एक नई आशा उभरती है। रूत ने बोला: तब वह भूमि तक झुककर मुँह के बल गिरी, और उससे कहने लगी, “क्या कारण है कि तूने मुझ परदेशिन पर अनुग्रह की दृष्टि करके मेरी सुधि ली है?”
कथन की वास्तविक गहराई: परमेश्वर की दयालुता और विश्वास का आकर्षण
यह शब्दात्मक क्षण एक सार्वजनिक व्यक्ति-चाल से भरा है, परन्तु उसकी गहराई में ईश्वर की कृपा के संकेत उपस्थित हैं। रोमैनी 8:28 के समान, रूत ने जो किया, वह एक तनावपूर्ण सामाजिक स्थिति में भी पूर्ण विश्वास का उत्तर है। नीतोमी की नज़र में अनजान एकपरदेशिन को इतनी श्रद्धा से देखना कि वह खेत-मालिक के सामने झुककर विनम्रता प्रदर्शित करे—यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के भीतर ऐसी भरोसेमंद बातों को कैसे देख सकता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्टीकरण
संबंधित आयतें और उनकी संचारक भूमिका
— अन्य प्रेरक प्रवचनजो के अनुसार यह अनुभाव कड़ा है, परन्तु प्रायः निम्न आयतें इस खाके को पुष्ट करती हैं: 1) रूत 1:16–17: नीतोमी के साथ अपनी निष्ठा की घोषणा; 2) रू 2:12: चेतावनी और आशीष का एक मिश्रण, जिसका आधार ईश्वर की सुरक्षा है; 3) न्यायशास्त्र 2:12: हस्तांतरणीय आशीर्वाद और कर्तव्य-निष्ठा।
आज का अनुप्रयोग
आज के जीवन में भी देखना पड़ता है कि ईश्वर की दयालुता से कैसे परिचित हों। जब हम सामाजिक सीमाओं या आचरण-बंधनों के बीच खड़े होते हैं, तब विनम्रता, विश्वास और ईमानदार दिल से किया गया प्रयास परमेश्वर के पास पहुंचने का मार्ग बन सकते हैं। रूत का उदाहरण कहता है कि अनजान लोगों के साथ व्यवहार में भी ईश्वर की कृपा फैली रहती है, और यह कहते हुए कि जो कोई भी अपनी स्थिति से ऊपर उठकर दूसरों की गरिमा और जरूरत को समझते हैं, उसे आशीष मिलती है।
cross-references
संक्षेप में, इस क्षण से हमें यह सीख मिलती है कि विश्वास और विनम्रता ईश्वर की दृष्टि को आकर्षित करते हैं, और बहिष्कृत भी अपने पथ पर आशीष पाने के योग्य हो सकता है जब वे व्यवहार-निष्ठा और करुणा से कदम उठाते हैं।
उद्धरण नोट: इस पाठ के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से सीधे उद्धरण आवश्यक हो तो वे निम्नानुसार हो सकते हैं—“the Lord is gracious to the humble”—परन्तु हमने मूल प्रवाह में उनकी शब्दावली को समाहित किया है; यदि आप चाहें तो संस्थागत उद्धरण सीधे उद्धृत किए जा सकते हैं।