Old Testament
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रूत 2:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
बोआज ने उत्तर दिया, “जो कुछ तूने पति की मृत्यु के बाद अपनी सास से किया है, और तू किस प्रकार अपने माता पिता और जन्म-भूमि को छोड़कर ऐसे लोगों में आई है जिनको पहले तू न जानती थी, यह सब मुझे विस्तार के साथ बताया गया है।
रूत 2:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रूत 2:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लूका 14:33 (HINIRV) »
इसी रीति से तुम में से जो कोई अपना सब कुछ त्याग न दे, तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता।

लूका 18:29 (HINIRV) »
उसने उनसे कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि ऐसा कोई नहीं जिस ने परमेश्वर के राज्य के लिये घर, या पत्नी, या भाइयों, या माता-पिता, या बाल-बच्चों को छोड़ दिया हो।

रूत 2:11 पर टिप्पणी – एक दृष्टिकोण
यह पद रूत के जीवन-यात्रा में एक निर्णायक मोड़ को दर्शाता है। वल्लभा के समय जहां सामाजिक सीमाओं से परे, एक माॅलिक प्रभावी कथा सामने आती है, वहीं रूत की निष्ठा और बहनत्व की माँग भी उभरकर सामने आती है। इस अध्याय में बोआज का अभिमत और उसकी दृष्टि से रूत के कार्यों की गहराई स्पष्ट होती है।
पद का वाचन और अध्याय के संदर्भ
रूत 2:11 में बोआज कहता है कि जो कुछ तूने अपनी सास से किया है, और किस प्रकार माता-पिता और जन्म-भूमि को छोड़कर ऐसे लोगों में आई है जिन्हें तू पहले नहीं जानती थी—यह सब उसने विस्तार से बताया गया है। यह संवाद न सिर्फ रूत के बारे में बोआज के सम्मान और देखभाल को रेखांकित करता है, बल्कि नये समाज में उसकी निष्ठा, त्याग और विश्वास का भी उद्घाटन करता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
- निष्ठा और पालन-पोषण की परिणति: रूत ने अपने जन्म-देश और परिवार को छोड़कर भी विश्वासघाती नहीं, बल्कि सच्चे रिश्ते बनाये। यह दिखाता है कि ईश्वर के गीत में व्यक्ति की आस्था और समर्पण बड़े मूल्य रखते हैं।
- समुदाय के लिए अपने कर्तव्य का ग्रहण: रूत ने न केवल अपनी सास, बल्कि पूरे समुदाय के लिए अपना स्थान ग्रहण किया। यह प्रेरणा देता है कि हमारा जीवन दूसरों के लिए कैसे गाइनेट, रक्षा और समर्थन बन सकता है।
अन्य पवित्र ग्रन्थों के साथ सम्बद्धता
शिक्षाप्रद विचार और व्यवहारिक अनुप्रयोग
1) निष्ठा बनाये रखें: कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर के प्रति आस्था बना रहना। यदि आप परिवार या समुदाय के साथ किसी तरह के आस्थागत कदम उठाते हैं, तो यह कहना उचित है कि निष्ठा वही है जो मुश्किल रास्तों में भी स्थिर रहती है।
2) समाज के साथ सहभागिता: अपने-अपने सीमाओं से ऊपर उठकर दूसरों की सहायता करना। रूत ने अपने नए वातावरण में भी मुस्कराहट के साथ योगदान दिया।
3) बहुप्रेरक निर्णय: जीवन के बड़े परिवर्तन—स्थान, परिवार, पुरानी पहचान—के बावजूद सचेत चयन और धैर्य से आगे बढ़ना।
छोटे पथ-चयन (Cross-references) के साथ संक्षिप्त स्पष्टीकरण
- रूत 1:16-17: रूत की दृढ़ प्रतिज्ञा—तुम मेरे साथ रहोगी, मैं तुम्हारे ईश्वर की आराधना करूँगी। यह पंक्ति दिखाती है कि अपने मानवीय रिश्तों के बीच आस्था कैसे नई व्यवस्था बनाती है।
- रोम 12:15-16: समुदाय में सहयोग: एक-दूसरे के साथ हंसी-खुशी और हर परिस्थिति में सहयोग का महत्व।
- উপজ 3:5-6: कर्तव्य-निष्ठा का उदाहरण—कठिन परिस्थितियों में भी सही मार्ग चुना जाना चाहिए।
सार संक्षेप
रूत 2:11 में बोआज का उत्तर यह संकेत देता है कि रूत ने किस प्रकार अपने जीवन की पहली पहचानों को पीछे छोड़कर नए समुदाय में स्थायित्व और सेवा को अपनाया है। यह घटना निष्ठा, परिश्रम, और समुदाय-भाव की मिसाल है, जो आने वाले समय के लिए भी प्रेरणा बनती है।