यशायाह 14:27 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि सेनाओं के यहोवा ने युक्ति की है और कौन उसको टाल सकता है? उसका हाथ बढ़ाया गया है, उसे कौन रोक सकता है?

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यशायाह 14:27 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 14:27 — संदर्भ और अर्थ

यशायाह 14 में कौमी दासता और दमन के बाद यहोवा की sovereignty तथा हुकूमत की पुष्टि दी जाती है। यह विशेष वचन—“क्योंकि सेनाओं के यहोवा ने युक्ति की है और कौन उसको टाल सकता है? उसका हाथ बढ़ाया गया है, उसे कौन रोक सकता है?”—आश्वस्त करता है कि परमेश्वर की योजना अटल है और उसकी सत्ता से कोई प्रतिरोध नहीं कर सकता। यह उद्धार की योजना के उद्घोष का एक भाग है जिसमें नegy यहूदी-बंधन के समय की अस्थिरता के बीच भी उसकी अंतिम विजय और नियति पर भरोसा बढ़ाया गया है।

केंद्रीय अर्थ

इस वाक्य में दो मुख्य विचार उभरते हैं: पहला, परमेश्वर की योजना अचल है—यहोवा ने अपनी युक्ति बनाई है और उसका कार्य अनवरत चलता है। दूसरा, उसकी सत्ता अत्यंत निर्णायक है—कौन उसे रोक सकता है या उसका हाथ रोका सकता है? यह दर्शाता है कि मानवीय प्रतिरोध चाहे जैसा हो, परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध नहीं टिक सकता। यह आश्वासन मानव इतिहास के हर क्षण के लिए प्रोत्साहन है कि राज-ताकतें, सामरिक योजनाएं और राजनैतिक उतार-चढ़ाव भी उसकी निर्धारित योजना के बाहर नहीं।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • परमेश्वर की नियति और नियंत्रण: युक्ति की घोषणा से स्पष्ट है कि इतिहास में हर घटनाक्रम परमेश्वर के हाथ में है, और उसकी योजना पूर्ति की दिशा में बढ़ती है।
  • अहं और प्रतिरोध का क्षय: “कौन उसको टाल सकता है?” यह प्रश्न न केवल ताकत का सूचक है, बल्कि मसीह-युग में निंदा और दमन के समय भी परमेश्वर की विजय की गारंटी दर्शाता है।
  • उद्धार की पूर्व-स्पष्टता: यह पाठ विश्वासियों को बताता है कि दमन के समय भी divine purpose बन बना रहता है और अन्ततः संघर्ष समाप्त होकर उद्धार आता है।

संबद्ध पद (Cross-references) और छोटा स्पष्टीकरण

1) इब्रानियों 6:18-19 जैसे पाठ यह याद दिलाते हैं कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर अचल विश्वास हमारे आश्वासन के कारण है।

2) ទयशायाह 46:10 में प्रभु खुद कहता है कि “मैं आरम्भ से अंत तक योजना बनाता हूँ”—यह इस शास्त्र में समान विचार है कि उसकी प्रचारित योजना स्थिर है।

3) रोमियों 8:28 — सभी वस्तुएँ मिलकर उन के लिए कार्य करती हैं जो उन्हें प्रेम करते हैं—यह भी इस वचन की आत्मा को समर्थ बनाता है कि परमेश्वर की युक्ति सर्वश्रेष्ठ परिणाम तक पहुंचती है।

नोट: उपरोक्त संदर्भ पूर्ण वचन-हरफ नहीं हैं; वे विचार में सहायता के लिए सुझाए गए हैं।

व्यावहारिक विचार

इस वचन से सीख: भय के समय भी परमेश्वर की सच्ची सत्ता संरक्षित रहती है; हमें भी धैर्य और विश्वास के साथ अपनी परिस्थिति में उसकी योजना पर भरोसा करना चाहिए। जब संसार में अस्थिरता बढ़े, तब प्रार्थना और उपासना के साथ उसकी योजना की पुष्टि में तल्लीन रहें।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यशायाह 14:27 का संदेश है कि परमेश्वर की योजना परम-निश्चित है और उसकी सत्ता किसी प्रतिरोध से नहीं हारती। यह वचन हमें स्मरण कराता है कि चाहे स्थिति कैसी भी हो, उसकी युक्ति पूरी होती है और हाथ बढ़ाने वाले का दृढ़ हाथ ही संचालक रहता है।

संकेत उद्धरण (अगर अनिवार्य समय उपलब्ध)

माथ्यू Henry, Barnes, Clarke के प्राथमिक टिप्पणीकारों के निर्विवाद-पर आधारित संकेतक विचारों को समेकित करते हुए, नीचे उनके संक्षिप्त सार शामिल हैं:

“ताकत-युक्त परमेश्वर की योजना अविचल रहती है; उसे रोकना संभव नहीं।”

“हाथ बढ़ाया गया है”—यानी उसकी सहायता और निर्णय का स्पष्ट प्रमाण हर परिस्थिति में उपस्थित है।

नोट: ऊपर दिये गए शाब्दिक उद्धरण केवल संदर्भ हेतु संकेतित हैं; पूर्ण पाठ नहीं लिखे गये।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 14:27 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“मैं ही परमेश्‍वर हूँ और भविष्य में भी मैं ही हूँ; मेरे हाथ से कोई छुड़ा न सकेगा; जब मैं काम करना चाहूँ तब कौन मुझे रोक सकेगा।” बाबेल से बच जाना (1 तीमु. 1:17, रोम. 9:18-19)

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परन्तु वह एक ही बात पर अड़ा रहता है, और कौन उसको उससे फिरा सकता है? जो कुछ उसका जी चाहता है वही वह करता है*।

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यह कहने लगा, “हे हमारे पितरों के परमेश्‍वर यहोवा! क्या तू स्वर्ग में परमेश्‍वर नहीं है? और क्या तू जाति-जाति के सब राज्यों के ऊपर प्रभुता नहीं करता? और क्या तेरे हाथ में ऐसा बल और पराक्रम नहीं है कि तेरा सामना कोई नहीं कर सकता?

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