यशायाह 21:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे तेमा देश के रहनेवाले, प्यासे के पास जल लाओ और रोटी लेकर भागनेवाले से मिलने के लिये जाओ।

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यशायाह 21:14 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 21:14 का अर्थ और संदर्भ

इस वचन में संदेश देता है कि तहसीश देश तेमा के निवासी किसी प्यासे और भूखे को सहायता देने के लिए जल और रोटी लेकर तुरंत तैयार रहें। यह पुकार एक तीखी चेतावनी के बीच दया और उदारता की मिसाल प्रस्तुत करती है—भले ही यह चारों ओर संकट और अराजकता का समय हो, तब भी निवेदन के साथ सहायता का हाथ बढ़ाने की अपेक्षा रखी जाती है।

पृष्टभूमि और संदर्भ

यशायाह की पुस्तक एक ऐतिहासिक-धार्मिक संवाद है जिसमें यशायाह भविष्यवक्ता इस्राइल के निरंतर धर्म-अनुशासन और विदेशीय आक्रमणों के समय में परमेश्वर के न्याय और करुणा की बात करते हैं। तेमा एक स्थान निर्दिष्ट है, और यहाँ तीक्ष्ण आपातकाल के दौरान मदद की मांग आती है—pयासे और भूखे को साथ लेने हेतु तैयार रहने की सीख। यह संदेश पड़ोसियों के बीच भाईचारे, करुणा और समुदाय की जिम्मेदारी पर बल देता है।

पारिशुद्ध टिप्पणी और व्याख्या

यहाँ जल और रोटी का उल्लेख केवल भौतिक सहायता नहीं—बल्कि मानवीय सहभागिता, आस्था औरinguish के साथ दी जाने वाली सहायता का प्रतीक है। सामाजिक दबाव और संकट के समय मानवीयता को मुखर करना इब्रानी साहित्य का एक सामान्य प्रवाह है। यह वाक्य यह संकेत करता है कि धर्मावलम्बी को परिस्थितियों से ऊपर उठकर जरूरतमंदों के लिए प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि परमेश्वर ऐसे कदमों की आलोचना नहीं करता, बल्कि उनकी सराहना करता है।

विश्लेषण के प्रमुख निष्कर्ष

  • जल लाने और भूखे को मिलने की प्रतिज्ञा दयालुता और त्वरित सेवाभाव की मांग है।
  • यह समाज में आपसी सहायता और समुदाय की जिम्मेदारी का एक नैतिक मानदंड स्थापित करता है।
  • संकेत देता है कि संकट के समय भी भगवान के लोग मानवीय सहायता में सक्रिय रहें।

क्रॉस-रेफरेंस और उनके अर्थ

• नीचे दिए गए क्रॉस-रेफरेंसेस से इस संदेश की व्यापकता समझ में आती है:

  • यशायाह 58:7 — फालतू दावे नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को वस्त्र, भोजन, और व्यावहारिक सहायता देना सही धर्म है; यह उपासना की आत्मा को दिखाता है।
  • यिर्मयाह 22:16 — न्याय और करुणा के साथ शासन करना ही असली धर्म माना गया है; दान-धर्म से अधिक व्यवहारिक सहायता विशेष है।
  • रोमियों 12:13 — आवश्यकताओं के अनुसार समाज में भागीदारी और प्रेषणों का उत्साह ही ईसाई समुदाय की पहचान है।

इन उद्धरणों में एक ही धागा है: आस्थावान जीवन वह है जो भौतिक-आत्मिक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील और क्रियाशील हो।

संक्षिप्त प्रायोगिक takeaway

कठिन समय में भी सच्ची धार्मिकता वही है जो पड़ोस के प्यासे को जल दे और भूखे को रोटी दे—निराशा के बीच भी दया और सहायता की राह न छोड़े जाना चाहिए। छोटे-छोटे कदम, पर निरंतरता से, समुदाय को दृढ़ बनाते हैं।

यहां से जुड़ी प्रवचन-रेफरेंस

ध्यान दें कि यह संदेश एक सामाजिक-आध्यात्मिक दायित्व की ओर इशारा करता है: सहायता के व्यावहारिक कर्म, न केवल पूजा-अर्चना।

उद्धृत स्रोत (पौराणिक टिप्पणीकारों के विचार): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सिद्धांतों से प्रेरणा मिलती है कि समाज में करुणा को ठोस क्रिया बनना चाहिए और संकट के समय भी भाइयों के साथ खड़े होना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 21:14 समानांतर पद और संबंधित वचन

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