यशायाह 21:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और केदार के धनुर्धारी शूरवीरों में से थोड़े ही रह जाएँगे; क्योंकि इस्राएल के परमेश्‍वर यहोवा ने ऐसा कहा है।”

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यशायाह 21:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 21:17 पर टिप्पणी

यशायाह 21:17 में यह भविष्यवाणी उत्तर-पूर्व के भरोसेमंद वीरों के क्षय को दर्शाती है: केदार के धनुर्धारी शूरवीरों में से बहुत कम ही बचेगीं, क्योंकि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा ने ऐसा कहा है। संदर्भ में यह भाग अश्वर और मिदीय्य के आक्रमणों के समय बनती स्थिति का उद्घाटन देता है, जब नबू के संदेश से यहूदियों को एक क्रांतिकारी पराक्रम के बजाय परमेश्वर की निर्भरता और विश्वास की ओर बुलाते हैं। यह वचन संसारिक बल नहीं, बल्कि परमेश्वर की योजना के अनुसार कब्रगामी परिणाम बताता है कि पृथ्वी की शक्तियाँ कमज़ोर पड़ सकती हैं, परन्तु परमेश्वर के काम को रोकना संभव नहीं।

मुख्य მნიშვნელ

मुख्य बात यह है कि परमेश्वर की योजना के सामने मानवीय सम्पत्ति और सैन्य शक्ति एक क्षणिक, अस्थिर नज़र आती है; उसका अभिप्राय है—जो लोग उसे मानते हैं, वे निर्भय रहते हैं। यह उद्धार और न्याय के निर्णायक समय की ओर इशारा है, जिसमें प्रभु की इच्छानुसार शक्तियाँ घट या बढ़ सकती हैं, परंतु यहोवा की Wort का प्रभाव मुक्त नहीं होता।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • परमेश्वर का निर्देशित शासन: जहां मानव-बल कमजोर पड़ता है, वहां परमेश्वर की योजना प्रमुख रहती है।
  • विश्वास और निर्भरता: कठिन समय में नबियों के संदेश के अनुसार परमेश्वर पर भरोसा ज़रूरी है, न कि युद्ध-सम्राटों पर।
  • अंतरंग भविष्यवाणी और वास्तविकता: यह वचन लोक-हित के लिए सच है कि दुष्ट शक्तियाँ समय-समय पर घटती बढ़ती रहेंगीं, परन्तु प्रभु का उद्देश्य स्थिर रहता है।

अन्य आयतों से जड़ें

• संदर्भ ऐसे समयों की ओर संकेत करता है जब परमेश्वर के न्याय की गूंज घटनाओं से निकलती है; यशायाह 8:9-10 और यिर्मयाह 50–51 जैसे ग्रंथों में भी शक्तियों के ढहने और परमेश्वर के उद्धार की अपेक्षा एक साथ मिलती है।

• अन्य पात्रताएँ: शाश्वत रक्षा और निर्भरताकी दृष्टि में, देव-घोषणा के अनुसार, मानव-बल सीमित है परंतु परमेश्वर का बल अटूट है।

kehid्यात्मिक वास्तविकता

यह शेष संसार के हाहाकार के बीच एक चेतावनी है कि ठोस भरोसा केवल प्रभु पर हो। जो धनुष और तलवारों पर निर्भर रहते हैं, वे अकसर अस्थिरता के सामने नतमस्तक होते हैं; पर जो परमेश्वर के मालिकाना हक को मानते हैं, वे उसकी आशीष और संरक्षण में स्थिर रहते हैं।

व्यावहारिक विचार

  • आज के आत्म-आकलन में यह पूछिए: मैं किस पर निर्भर हूँ—अपनी क्षमताओं पर या परमेश्वर की सहायता पर?
  • प्रयोजन: संकट के समय में ईश्वर की वाणी की ओर झुकना, Pray और पन्ना—धर्मानुष्ठान को मजबूत करना।

संक्षिप्त सार

यशायाह 21:17 में परमेश्वर यह बतला रहा है कि समय-समय पर पृथ्वी की सेनाएं घट-बढ़ सकती हैं, लेकिन उसकी योजना अटल है। केदार के धनुर्धारी अधर्म और न्याय के समय के साथ घटें या बढ़ें, पर परमेश्वर के उद्देश्य पर प्रभाव नहीं डालते। एक विश्वसनीय जीवन वही है जो प्रभु पर विश्वास बनाए रखे।

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संक्षिप्त अर्थ

• यशायाह 8:9-10: विश्वासघाती संकटों के बावजूद परमेश्वर की सुरक्षा की ओर ध्यान निर्देशित करता है।

• यिर्मयाह 50:51: शक्तियों के क्षय के समय में भी परमेश्वर का न्याय और उद्धार प्रमुख रहता है।

• रोम 8:31-39: यदि परमेश्वर हमारे साथ है, कौन विरोधी बन सकता है? यह विश्वास दृढ़ करता है कि हमारे संघर्षों में परमेश्वर समर्थ है।

नोट: इस पाठ के विश्लेषण में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों के संक्षिप्त स्वर नीचे प्रस्तुत हैं—कृपया ध्यान दें कि यहाँ उद्धरण केवल संकेतन स्वरूप हैं:

Matthew Henry: “...the prophet is here, to tell them that their strong holds and their bravest soldiers shall be lessened, and that God will judge their pride.”

Albert Barnes: “The meaning is that in God’s judgments, the mightiest armies are often reduced to nothing.”

Adam Clarke: “The veracity of the Lord’s word remains unshaken; even when human power wanes, spirits of vengeance and redemption execute his will.”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 21:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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परमेश्‍वर मनुष्य नहीं कि झूठ बोले, और न वह आदमी है कि अपनी इच्छा बदले। क्या जो कुछ उसने कहा उसे न करे? क्या वह वचन देकर उसे पूरा न करे? (रोम. 9:6-2, तीमु. 2:13)

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तो इस देश के उत्तम से उत्तम पदार्थ खाओगे; और यदि तुम न मानो और बलवा करो, तो तलवार से मारे जाओगे; यहोवा का यही वचन है।” विश्वासघाती यरूशलेम

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परन्तु मेरे वचन और मेरी आज्ञाएँ जिनको मैंने अपने दास नबियों को दिया था, क्या वे तुम्हारे पुरखाओं पर पूरी न हुईं? तब उन्होंने मन फिराया और कहा, सेनाओं के यहोवा ने हमारे चालचलन और कामों के अनुसार हम से जैसा व्यवहार करने का निश्‍चय किया था, वैसा ही उसने हमको बदला दिया है।” (विलाप. 2:17)

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