Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66Verse
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यशायाह 3:21 का संधर्शन और संदर्भ
यशायाह की पुस्तक में परमेश्वर का न्याय भरा संदेश यह है कि तब्रता के विरुद्ध सामाजिक ढाँचा ढह जाएगा—नारी-रूढ़ियाँ, संपत्ति-प्रतीक और ऐश्वर्य के उपकरणों के साथ-साथ औपचारिक दिखावे पर भी संकट आएगा। यशायाह 3:21 विशेष रूप से उन सांसारिक प्रतीकों को लक्षित करता है जो समाज में ऊँचे दर्जे की पनाह बनकर रहते हैं: आभूषण, नथ, अंगूठियाँ आदि—ये सब उस समय के विशिष्ट सामाजिक पंख और वैभव के संकेत थे। परमेश्वर की पवित्रता के समक्ष यह सब क्षणिक, खोखला है यदि जीवन में धर्म-निष्ठा नहीं है।
मुख्य अर्थ
इस पद के द्वारा यह दिखाया गया है कि कानून और न्याय के साथ-साथ लोगों की बाहरी शोभा भी निरीह हो जाएगी जब समाज में अन्याय, फूहड़ श्रेष्ठता और आत्म-स्वार्थ बढ़े। आभूषण और ऐश्वर्य के उपकरण न केवल व्यक्तिगत पारी की पहचान हैं, बल्कि सामाजिक अभिजात्य के प्रतीक भी बन जाते हैं। मिसाल के तौर पर, परमेश्वर उन चीजों को हटा देता है जो मानव-बलिदान या आत्म-प्रशंसा के लिए जानी जाती थीं, ताकि लोगों के दिल जो न्याय, दया और विनम्रता के साथ जुड़ते हैं, वे मजबूत हों।
दो–तीन प्रमुख विषय
संबद्ध कथन और पाठ
इस भाग के साथ अन्य कुरआन-उद्धरणी विचार मिलते हैं जहाँ बाह्य विभूति के स्थान पर सत्य-धर्म की आवश्यकता बताई गई है। मिसाल के तौर पर, न्याय के उच्च मानदंड और दिल की पवित्रता का आग्रह पहले से अधिक स्पष्ट होता है।
संदर्भ-उद्धरण (cross-references) और उनका छोटा तर्क
इन संबंधों से स्पष्ट होता है कि द्वितीयक प्रतीकों के स्थान पर वास्तविक नैतिकता और धर्म की गहराई ही टिकाऊ है।
व्यावहारिक चिंतन
आज के समाज में भी हम देखते हैं कि सुरक्षा और प्रतिष्ठा के लिए लोग äußary प्रतीकों पर निर्भर रहते हैं। ये पद हमें याद दिलाते हैं कि परमेश्वर देखता है, और उसे दिल की पवित्रता, दया, और न्याय के कार्य चाहिए। अगर हम अपनी जीवन-योजना में बाह्य दिखावे की जगह आंतरिक पवित्रता को प्रमुख बनाएं, तो सामाजिक आलोचनाओं के बीच भी स्थिर रहेंगे।
संक्षेप
यशायाह 3:21 में आभूषण और नथ जैसे पदार्थ प्रतीकों की चर्चा से यह स्पष्ट होता है कि विद्यमान सामाजिक वैभव तब तक ही अर्थपूर्ण है जब वह ईश्वर के अनुसार विवेकपूर्ण और न्यायपूर्ण जीवन के साथ जुड़ा रहे। परमेश्वर बाहरी शोभा से नहीं, बल्कि दिल की सच्चाई से सम्मान चाहता है।
उद्धृत पाठक-डायरेक्ट निष्कर्ष (note on public-domain commentators)
यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट विचारों के सन्निकटन से प्रेरित है। नीचे उनके विशिष्ट संक्षेप उद्धरण स्वतः उद्धृत नहीं किये जा रहे, पर उनके सामान्य दृष्टिकोण—आभुषण परिप्रेक्ष्य बनाम आंतरिक धर्म—पर अवगत रहते हैं।