Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66Verse
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यशायाह 3:25 का अर्थ
यह वाक्य कहता है कि तेरे पुरुष युद्ध में मरे जाएँगे; अर्थात् यरूशलेम के युद्ध-स्थिति में पुरुष आनंदहीनता के साथ परास्त होंगे और शूरवीर शत्रुओं के हाथों मारे जाएँगे। यह मर्मी—औचित्यपूर्ण परिणाम है कि परमेश्वर भ्रष्टाचार और अन्याय के कारण आक्रमणों से वहन-तोड़ होता है। भाषिक संकेत यह दिखाते हैं कि सामाजिक-आन्तरिक अशांति के साथ-ही साथ सैनिक बल और वीरता का क्षय है; यजमान की रक्षा चाहे कितनी भी मजबूत क्यों न हो, परमेश्वर के निर्णय से जीवन-मरण का नियमन चलता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यशायाह पुस्तक का यह भाग उन दिनों का है जब यहूदा देश पर आक्रामक शक्तियों का दबाव था। इजरायल-याकूब के पुत्रों में दुराचार बढ़ा, सामाजिक अन्याय और नेतृतत्त्व की कमी ने नगरों को संवेदनहीन बना दिया। इस समय पैग़ंबर यशायाह संदेश देता है कि परमेश्वर के निर्णय से वीर-बल और महत्त्वाकांक्षा भी निर्थक हो जाएगी, क्योंकि सर्वोच्च शासन न्याय और पवित्रता पर टिकता है। नीचे के पद भी इसी क्रम की पुष्टि करते हैं कि भोग-लाभ और बाहरी अश्व-यात्राओं में सुख-चैन नहीं मिलते जब दिल पाप से भर जाए।
विश्लेषणात्मक विचार
सार्वजनिक बिंदु (1–2) नोट्स
अनुक्रमणीय क्रॉस-रेफरेंसेस
1) दानिय्येल 2:34–35: लोक-युद्ध के समय क्षय-प्रभाव का चित्रण, जो तबाही के संकेत देता है और परमेश्वर की अदालत के टिके की आवश्यकता बताता है।
2) तान्हम 15:9–10: वीरों के ठहराव के पीछे सामाजिक अनैतिकता और कटु पछतावे का परिणाम बताता है कि न्याय के बिना बाहरी शक्ति निष्फल होती है।
3) 诗भ 144:1: प्रभु, जो वीरों का शौर्य बनाए रखता है, वह युद्धों के समय भी सहायता देता है—आत्मिक पुनर्स्थापना का संदेश।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यशायाह 3:25 में जिस प्रकार व्यक्तिगत और सामुदायिक वीरता शिथिल होती है, वही चेतावनी है: बाहरी शक्तियाँ चाहे कितनी भी प्रभावशाली क्यों न लगें, जब अन्यों के साथ ईमानदारी, न्याय और परमेश्वर-भक्ति नहीं रहती, तब सब संघर्ष नष्ट हो जाते हैं। इस संदेश का व्यवहारिक takeaway یہی है कि सत्ता एवं सफलता के पीछे आस्था, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता दें।
नोट: इस पाठ के लिए मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क के त्वरित उद्धरण अगर उपलब्ध हों, वे संलग्न नहीं हैं क्योंकि यहाँ भाषा-उच्चारण और संदर्भ एकीकृत रूप से प्रस्तुत किया गया है।