Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यशायाह 3:5 — तत्कालीन परिदृश्य और आत्ममंथन
पद में कहा गया है: “प्रजा के लोग आपस में एक दूसरे पर, और हर एक अपने पड़ोसी पर अंधेर करेंगे; और जवान वृद्ध जनों से और नीच जन माननीय लोगों से असभ्यता का व्यवहार करेंगे।” यह वही समय है जब ईश्वरीय न्याय और समाज की व्यवस्था टूटने लगती है। परमेश्वर के व्यवहार की करवट तब आती है जब ऐतिहासिक गड़बड़ी और नैतिक पतन सामाजिक जीवन को कसौटी पर खड़ा कर देते हैं। इस उथल-पुथल के बीच, یہ ún्ति तुम्हारे बीच विभाजन के कारण उभरती नहीं, बल्कि भीतर की आत्मा की अव्यवस्थित दशा के कारण उत्पन्न होती है।
ईश्वर और विश्वास के प्रति यह पाठ क्या बताता है
यह वाक्य धार्मिक-अनुशासन के टूटने की भयावह तस्वीर प्रस्तुत करता है—जो एक समुदाय के भीतर विश्वास की पवित्रता खो देने पर उत्पन्न होती है। एक समाज जो पहले एक दूसरे की रक्षा और सम्मान में खड़ा रहता है, अब बेमेल व्यवहारों, बदले की भावना और सामाजिक आपसी दबाव के कारण बिखर रहा है। अचानक नहीं, बल्कि अत्यधिक स्वार्थ और मानवीय कमजोरी के कारण यह स्थिति बनती है; और तबातार रूप से राजा-प्रजा-सामाजिक-जातीय बंधन कमजोर पड़ते हैं। 이러한 दृश्य में ईश्वर समुदाय के नैतिक ढाँचे की मज़बूती दिखाते हैं; जब लोग एक दूसरे के साथ दायर, असभ्य और तिरस्कारपूर्ण होते हैं, तो यह दर्शाता है कि संकट के समय में परमेश्वर के अधिकार और करुणा की आवश्यकता कितना अधिक है।
महत्वपूर्ण शब्दों/चित्रों की स्पष्टता
अन्य बाइबिल संदर्भ (क्रॉस-रेफरेंसेस)
ऊपर के विचारों के साथ संबद्ध पाठ्य-घटकों की समझ बढ़ाने हेतु:
इन संदर्भों के माध्यम से स्पष्ट होता है कि सामाजिक पतन से बचने के लिए आंतरिक परिवर्तन के साथ बाहरी व्यवहार में भी सुधार आवश्यक है।
मुख्य विचार और आधुनिक applications
इस वाक्य का संदेश आज के लिए भी प्रासंगिक है: समाज में असमानताएँ, भ्रष्टाचार और आपसी दुर्व्यवहार तब उभरते हैं जब लोग परम सत्य और प्रेम के नियमों के पीछे नहीं चलते। समुदाय के नेता, शिक्षा के केंद्र और हर व्यक्ति को यह सावधानी रखनी चाहिए कि छोटे-छोटे अनुचित व्यवहार बड़े सामाजिक संकट को जन्म देते हैं। ईश्वर का उद्देश्य है–न्याय के साथ दया, और शक्ति के साथ संयम।
दो-तीन संबद्ध विचारधारा—संयुक्त निष्कर्ष
संक्षिप्त टिप्पणी (सार)
यशायाह 3:5 में सामाजिक पतन की कठोर तस्वीर दिखती है, जहाँ अहंकार और असभ्यता परिवार, पड़ोस और समुदाय को तोड़ देते हैं। परमेश्वर चाहता है कि लोग एक-दूसरे के प्रति प्रेम, सम्मान और दया दिखाएं; तब ही समाज में सुव्यवस्था लौटेगी।
नोट: इस पाऊच में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण आवश्यक हो तो उनके संकथनों की प्रमुख पंक्तियाँ नीचे उद्धृत की जा सकती हैं—पर वे यहाँ संक्षेप में संदर्भ-उद्धरण के रूप में दिए जाते हैं।