यशायाह 31:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उस समय तुम लोग सोने चाँदी की अपनी-अपनी मूर्तियों से जिन्हें तुम बनाकर पापी हो गए* हो घृणा करोगे।

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यशायाह 31:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 31:7 का सीधे अर्थ

इस Verse में कहा गया है कि वह समय आएगा जब लोग अपने सोने-चाँदी के बनाने हुए मूर्तिपूजक पाप से घृणा करेंगे, अर्थात् वे उन वस्तुओं को छोड़कर परमेश्वर के समकक्ष पूर्ण विश्वस्तता और विश्वास की ओर लौटेंगे।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यशायाह की पुस्तक में ईश्वरीय न्याय और उद्धार के संदेश के साथ बहुधा पाप और निर्बल सुरक्षा की राहत जो एक साथ आए। यहाँ उद्धारक भूमिका-यशायाह 31 में असुर और मिस्र की संपत्ति पर निर्भर रहने के वैकल्पिक विकल्प प्रस्तुत हैं। यह संदेश इस बात पर जोर देता है कि भौतिक संपदा और मूर्तियाँ मनुष्य को ईश्वर की ओर नहीं, बल्कि आत्म-विश्वासी सुरक्षा की ओर धोखा देते हैं; परन्तु परमेश्वर अपनी सच्ची सुरक्षा ही देता है।

विश्लेषणात्मक अवलोकन

  • घृणा की पुनर्विचार: मूर्तिपूजा से घृणा करना एक नैतिक और आध्यात्मिक परिवर्तन का संकेत है, जो परमेश्वर के साथ सीधे संबंध की जरूरत दर्शाता है।
  • आत्म-विश्वास बनाम देव-विश्वास: सोने-चाँदी से बने पदार्थों पर निर्भरता मानव की कमजोरियों को उजागर करती है; ईश्वर वरदान के रूप में अपनी रक्षा देते हैं यदि लोग उनकी ओर लौटें।
  • समय-निर्धारण संकेत: यह परिवर्तन उन लोगों के लिए है जो अपने पाप से मुँह फेर कर सत्य की तरफ आना चाहेंगे, और यह उनकी सच्ची भक्ति को दर्शाता है।

एक संक्षिप्त विषय-वस्तु

  • विश्वास का स्थान: परमेश्वर के स्थान पर संपत्ति या मूर्तियाँ टिकाने की प्रवृत्ति पर स्पष्ट रोक।
  • उद्धार का माध्यम: ईश्वर की ओर लौटना और उनकी कृपा पर भरोसा—न कि मानव-संपदा पर।
  • नया दृष्टिकोण: पाप से घृणा और परमेश्वर-निर्भरता का पुनःस्थापन।

संबंधित आयतें और संक्षिप्त व्याख्या

यशायाह 30:15— आस्था की सरलता के साथ ईश्वर पर भरोसा; यह बताता है कि सुरक्षा केवल उसी की है।

विलापगीत 3:24— मोक्ष पुत्रों के लिए यह गोलबंदी है कि परमेश्वर ही हमारा भाग है।

आमोस 6:8— दयालु रहने वाला परमेश्वर है; यह बताता है कि संपत्ति के कारण नहीं, बल्कि धर्मी आचरण से पहचान होती है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

हम में से प्रत्येक अपने जीवन की प्राथमिकताओं को देखने के लिये कहता है: क्या हमारी आशा परमेश्वर की कृपा में है, या अचल संपत्ति, वैभव, या मानव-परावलंबन में? प्रभु के साथ सीधी आस्था बनाकर ही हमें आंतरिक शांति और स्थिरता मिलती है।

मैथ्यू हेन्री, एलबर्ट Barnes और एडम क्लार्क के संकेत

इन टिप्पणीकारों के पुराने अनुमान से मिलते-जुलते तत्व इस प्रकार हैं: मूर्तिपूजा के खिलाफ आवाज, निज-विश्वास से ईश्वर-विश्वास की ओर परिवर्तन, और उद्धार के लिए परमेश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की आवश्यकता।

संक्षेप में यहVerse कहता है कि सत्य के पथ पर लौटना चाहिए; संपदा और मूर्तियाँ केवल भटकाव का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि सुरक्षा और अधिकार केवल परमेश्वर के हाथ में है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 31:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 30:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 30:22 (HINIRV) »
तब तुम वह चाँदी जिससे तुम्हारी खुदी हुई मूर्तियाँ मढ़ी हैं, और वह सोना जिससे तुम्हारी ढली हुई मूर्तियाँ आभूषित हैं, अशुद्ध करोगे। तुम उनको मैले कुचैले वस्त्र के समान फेंक दोगे और कहोगे, दूर हो।

यशायाह 2:20 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 2:20 (HINIRV) »
उस दिन लोग अपनी चाँदी-सोने की मूरतों को जिन्हें उन्होंने दण्डवत् करने के लिये बनाया था, छछून्दरों और चमगादड़ों के आगे फेकेंगे,

यहेजकेल 36:25 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहेजकेल 36:25 (HINIRV) »
मैं तुम पर शुद्ध जल छिड़कूँगा, और तुम शुद्ध हो जाओगे; और मैं तुमको तुम्हारी सारी अशुद्धता और मूरतों से शुद्ध करूँगा। (इब्रा. 10:22)

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