Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 46:13 पर टिप्पणी (HINIRV)
यह आयत एक विमर्शात्मक वाक्य है जिसमें परमेश्वर अपनी धार्मिकता और उद्धार की योजना को नजदीक करने का आश्वासन देते हैं। यशायाह ग्रहणशील फिरौती के संदेश के समय यह संदेश दे रहा है कि प्रभु का उद्धार समय पर आएगा और वह अखंडता के साथ सत्य के साथ अपने लोगों को महिमा देंगे। श्रोताओं के लिए यह शब्द संकल्प और आश्वासन दोनों दोनों का स्रोत है—यह दर्शक को यह बताता है कि परमेश्वर अपने पवित्र प्रतिज्ञाओं को शिथिल नहीं करता, बल्कि उन्हें तुरंत और सुदृढ़ तरीके से पूरा करेगा।
कथन का पाठ-प्रसंग
यशायाह 46 अध्याय में एलिय्याह पत्रक लालायित-उत्सुकता के साथ ईश्वर की सत्ता और निर्भयता के बारे में बात करते हैं। यहाँ “मैं अपनी धार्मिकता को समीप लाने पर हूँ” से संकेत मिलता है कि परमेश्वर अपनी पवित्रता और न्याय के मानदंडों के अनुसार उद्धार को आगे बढ़ाते हैं, और यह दूर नहीं है। साथ ही, “मेरे उद्धार करने में विलंब न होगा” कहकर यह स्पष्ट किया गया है कि परमेश्वर अपने दायित्वों के प्रति ईमानदार है और अपने लोगों को समय में समाधान देगा। इस्राएल के लिए यह एक अत्यंत संवैधानिक संदेश है कि उद्धार उनके इतिहास के हर मोड़ पर उपस्थित है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुरूप तुलनात्मक पथ
पूर्व-आंशिक संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि उद्धार का सिद्धांत पुरानी प्रतिज्ञाओं और भविष्यवाणी के अनुकूल है। उदाहरण के लिए:
इन उपमाओं से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की चरित्री-धारणा और उद्धार का समयकाल सांसारिक परंपराओं से ऊपर है और वह हर परिस्थिति में सत्य के साथ रहता है।
प्रयोग और ज़िंदगी पर प्रभाव
हमारे लिए यह आयत आज भी आह्वान है कि हम परमेश्वर की निष्कलंक उपलब्धियों पर भरोसा बनाएं—उसकी धार्मिकता समीप है और उद्धार में देरी नहीं होगी। - नियमित प्रार्थना और विश्वास अभ्यास में यह बोध आता है कि कठिन समय में भी प्रभु अपना पवित्र उद्धार दे सकते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस के साथ संक्षिप्त स्पष्टीकरण
- यशायाह 40:9-11: उद्धार की घोषणा और ईश्वर की देखभाल का चित्रण—उद्धार का पहुँचना एक व्यक्तिगत, दयालु नेतृत्व है।
- रोमियों 10:11-13: उद्धार को विश्वास के कारण सभी के लिए उपलब्ध मानना—उद्धार का सार्वभौमिकता।
- योहन्ना 6:37: जो आऊँगा उसे मैं नहीं त्यागूँगा—ईश्वर के उद्धार में अनुग्रह और पूर्णता का संयोजन।
संक्षिप्त सार
यशायाह 46:13 में परमेश्वर अपने धार्मिकता को समीप लाते हैं और उद्धार को विलम्ब न कराने का वादा करते हैं। यह संदेश हमें आश्वस्त करता है कि प्रभु का उद्धार और महिमा निश्चित हैं, और उनका राज्य सत्य के साथ राजा बनेगा—सियोन की महिमा इसी के द्वारा पुनः स्थापित होगी।
नोट: यदि आप चाहें तो इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के छोटे उद्धरणों के संदर्भों सहित मौलिक टिप्पणी के छोटे हिस्से जोड़े जा सकते हैं।