यशायाह 46:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैं अपनी धार्मिकता को समीप ले आने पर हूँ वह दूर नहीं है, और मेरे उद्धार करने में विलम्ब न होगा; मैं सिय्योन का उद्धार करूँगा और इस्राएल को महिमा दूँगा।

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यशायाह 46:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 46:13 पर टिप्पणी (HINIRV)

यह आयत एक विमर्शात्मक वाक्य है जिसमें परमेश्वर अपनी धार्मिकता और उद्धार की योजना को नजदीक करने का आश्वासन देते हैं। यशायाह ग्रहणशील फिरौती के संदेश के समय यह संदेश दे रहा है कि प्रभु का उद्धार समय पर आएगा और वह अखंडता के साथ सत्य के साथ अपने लोगों को महिमा देंगे। श्रोताओं के लिए यह शब्द संकल्प और आश्वासन दोनों दोनों का स्रोत है—यह दर्शक को यह बताता है कि परमेश्वर अपने पवित्र प्रतिज्ञाओं को शिथिल नहीं करता, बल्कि उन्हें तुरंत और सुदृढ़ तरीके से पूरा करेगा।

कथन का पाठ-प्रसंग

यशायाह 46 अध्याय में एलिय्याह पत्रक लालायित-उत्सुकता के साथ ईश्वर की सत्ता और निर्भयता के बारे में बात करते हैं। यहाँ “मैं अपनी धार्मिकता को समीप लाने पर हूँ” से संकेत मिलता है कि परमेश्वर अपनी पवित्रता और न्याय के मानदंडों के अनुसार उद्धार को आगे बढ़ाते हैं, और यह दूर नहीं है। साथ ही, “मेरे उद्धार करने में विलंब न होगा” कहकर यह स्पष्ट किया गया है कि परमेश्वर अपने दायित्वों के प्रति ईमानदार है और अपने लोगों को समय में समाधान देगा। इस्राएल के लिए यह एक अत्यंत संवैधानिक संदेश है कि उद्धार उनके इतिहास के हर मोड़ पर उपस्थित है।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

  • ईश्वरीय निष्ठा: परमेश्वर अपनी धार्मिकता को समीप लाते हैं—यानी वह अपने कर्म के नियमों के अनुरंजन और पूर्णता के साथ है।
  • उद्धार में धैर्य और गति: उद्धार का समय निर्विकार नहीं है, परंतु वह निष्कलंक हित में बिना विलम्ब के आता है; विश्वासयोग्यों के लिए यह भरोसा है कि प्रभु अपना कार्य पूरा करेंगे।
  • यही संदेश सियोन के लिए: उद्धार और महिमा के कारण सियोन की प्रतिष्ठा पुनः स्थापित होगी—यह दया और न्याय दोनों के मिलन की प्रतीक है।

अनुरूप तुलनात्मक पथ

पूर्व-आंशिक संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि उद्धार का सिद्धांत पुरानी प्रतिज्ञाओं और भविष्यवाणी के अनुकूल है। उदाहरण के लिए:

  • यशायाह 40:9-11—शांतिदायक उद्धार की घोषणा, ईश्वर की तीक्षणता के बजाय दया-भरी देखभाल पर जोर। सामान्यतः यह पाठक को यह समझाता है कि उद्धार का कार्य प्रभु के हाथों में है।
  • रोमियों 10:11-13—यही विचार मुक्तियों के व्यापकपन के रूप में विश्वासयोग्यों के लिए उद्धार की सार्वभौमिकता बताता है।

इन उपमाओं से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की चरित्री-धारणा और उद्धार का समयकाल सांसारिक परंपराओं से ऊपर है और वह हर परिस्थिति में सत्य के साथ रहता है।

प्रयोग और ज़िंदगी पर प्रभाव

हमारे लिए यह आयत आज भी आह्वान है कि हम परमेश्वर की निष्कलंक उपलब्धियों पर भरोसा बनाएं—उसकी धार्मिकता समीप है और उद्धार में देरी नहीं होगी। - नियमित प्रार्थना और विश्वास अभ्यास में यह बोध आता है कि कठिन समय में भी प्रभु अपना पवित्र उद्धार दे सकते हैं।

क्रॉस-रेफरेंसेस के साथ संक्षिप्त स्पष्टीकरण

- यशायाह 40:9-11: उद्धार की घोषणा और ईश्वर की देखभाल का चित्रण—उद्धार का पहुँचना एक व्यक्तिगत, दयालु नेतृत्व है।

- रोमियों 10:11-13: उद्धार को विश्वास के कारण सभी के लिए उपलब्ध मानना—उद्धार का सार्वभौमिकता।

- योहन्ना 6:37: जो आऊँगा उसे मैं नहीं त्यागूँगा—ईश्वर के उद्धार में अनुग्रह और पूर्णता का संयोजन।

संक्षिप्त सार

यशायाह 46:13 में परमेश्वर अपने धार्मिकता को समीप लाते हैं और उद्धार को विलम्ब न कराने का वादा करते हैं। यह संदेश हमें आश्वस्त करता है कि प्रभु का उद्धार और महिमा निश्चित हैं, और उनका राज्य सत्य के साथ राजा बनेगा—सियोन की महिमा इसी के द्वारा पुनः स्थापित होगी।

नोट: यदि आप चाहें तो इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के छोटे उद्धरणों के संदर्भों सहित मौलिक टिप्पणी के छोटे हिस्से जोड़े जा सकते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 46:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और सिय्योन के विलाप करनेवालों के सिर पर की राख दूर करके सुन्दर पगड़ी बाँध दूँ, कि उनका विलाप दूर करके हर्ष का तेल लगाऊँ और उनकी उदासी हटाकर यश का ओढ़ना ओढ़ाऊँ; जिससे वे धर्म के बांज वृक्ष और यहोवा के लगाए हुए कहलाएँ और जिससे उसकी महिमा प्रगट हो। (भज. 45:7,30:11, लूका 6:21)

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“परमेश्‍वर मेरा उद्धार है, मैं भरोसा रखूँगा और न थरथराऊँगा; क्योंकि प्रभु यहोवा मेरा बल और मेरे भजन का विषय है, और वह मेरा उद्धारकर्ता हो गया है।” (भज. 118:14, निर्ग: 15:2)

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हे आकाश ऊँचे स्वर से गा, क्योंकि यहोवा ने यह काम किया है; हे पृथ्वी के गहरे स्थानों, जयजयकार करो; हे पहाड़ों, हे वन, हे वन के सब वृक्षों, गला खोलकर ऊँचे स्वर से गाओ! क्योंकि यहोवा ने याकूब को छुड़ा लिया है और इस्राएल में महिमावान होगा। (भज. 69:34,35, यशा. 49:13)

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