Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 3:12 का संदर्भ और उसके पीछे की संदेश
पद का अभिप्राय उत्तर दिशा की ओर प्रचार कर बताने से है कि यहोवा की यह वाणी है: “हे भटकनेवाली इस्राएल लौट आ, मैं तुझ पर क्रोध की दृष्टि न करूँगा; क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, मैं करुणामय हूँ; मैं सर्वदा क्रोध न रखे रहूँगा।” यहाँ एक दयालु, आकर्षक और स्थायी करुणा की चित्रीकृति प्रस्तुत है, जो भटकाव के बीच भी यहोवा के साथ पुनः संबंध स्थापित करने की आशा दिखाती है।
प bankruptcy: परमेश्वर और विश्वास की शिक्षा
यह वाणी यह दर्शाती है कि परमेश्वर अपने देश से दूर होते हुए भी इस्राएली कलह में भी लौट आने की अनुमति और आशा देता है। यहाकी निष्ठुर निर्णय के बजाय करुणा और क्षमा का मार्ग खोलना उसकी प्रकृति है। भटकाव के समय भी वह आह्वान करता है कि लौट आओ—यही संदेश विश्वास की जड़ों को फिर से जीवंत बनाता है।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंस (संकेत मात्र)
- यहोवा की करुणा की स्थिरता के बारे में अन्य भविष्यद्वक्ताओं के संदेश—जैसे यशायाह की प्रेरणाओं में भी लौट आओ की पुकार मिलती है।
- यहोशू 24:15 जैसे शब्दों में भी प्रतिज्ञा-आधारित लौट आना और सेवा-निष्ठा के महत्व पर बल है।
- ल्यूक 15 के प्रेमी पिता की कहानी जैसी करुणा-उद्धार की धारा नए परिप्रेक्ष्य से समझ में आती है।
आज के संदर्भ में उपयोगी अनुप्रयोग
- यदि आप किसी गलती या पथभ्रष्टता से पछतावा महसूस करें, तो याद रखें कि परमेश्वर की आमंत्रण यह है कि आप में से जो लौटना चाहता है, उसे वह स्वीकार करेगा।
- अवरोधन के समय भी करुणा की भाषा अपनाएं—घर लौटना, रिश्तों को पुनः बनाना, और अपने आर्चन में ईमानदारी बनाये रखना।
- समुदाय के भीतर दूसरों के लिए दयालु और क्षमाशील बने रहें, ताकि आशा की अवधारणा दृढ़ हो।
सार और संरचना
पद 12 के पीछे का दृढ़ संदेश है—भटकाव के बावजूद परमेश्वर फिर से लौटने और करुणा दिखाने को तैयार है। इस संकेत से ईश्वर की प्रकृति स्पष्ट रूप से उभरती है: प्रेम, करुणा, और क्षमा का steadfast स्वर। इसे आज के जीवन में अपनाने से व्यक्तिगत आस्थाओं में नई ऊर्जा जगेगी और रिश्ते मजबूत होंगे।
नोट: यदि आप मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बARNs या एडम क्लार्क के स्पष्ट उद्धरणों की मांग करते हैं, तो संदर्भ के अनुसार उनकी सामान्य निष्कर्षधर्मी टिप्पणियाँ इस भाव के अनुरूप होंगी—परन्तु यहाँ मूल पाठ के सन्निधि के अनुसार संक्षेपण रखा गया है।