Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 3:19 पर व्याख्या
मुख्य आध्यात्मिक बिंदु: यह वचन यह दर्शाता है कि परमेश्वर ने इस्राइल के प्रति अपने मन में गहरी पिता-स्नेह और देश-प्रेम रखा, परन्तु उनका पुत्रवत अवहेलना और असंतोष के कारण वह अपनी योजना से विमुख हुआ। यह वचन भ्रातृत्व और सत्ता की चाहत की सीमाओं को भी उद्घाटित करता है: परमेश्वर चाहतों के बावजूद भी दयालुता बनाए रखते हैं, परन्तु अवहेलना के परिणाम स्पष्ट होते हैं।
पाठ-वाचन का साहित्यिक संदर्भ
यिर्मयाह 3:19 एक उद्धोषात्मक स्मरण है जो दया, पिता- संबंध और राष्ट्र-गर्दी के बीच के तनाव को उभारता है। परमेश्वर अपने चुनावित लोगों के बारे में एक आत्मीय पिता की आकांक्षा दिखाते हैं—ताकि वे उसे पिता मानें, उसके मार्ग पर चलें, और उनकी सुरक्षा में रहें। परन्तु यह तात्कालिक कल्पना वास्तविकता से भिन्न निकलती है, क्योंकि इज़राइल ने मसीही चेतना के अनुसार अनुचित मार्ग चुना और परमेश्वर के साथ अपने रिश्ते में विश्वासघात किया। यह वाक्यांश 1 पतरस 1:3–7 के साथ मिलकर एक चित्र बनाता है कि विश्वास की परीक्षा और पवित्र जीवन के लिए आशा कैसे उभरती है।
वैचारिक और theological संकेत
पवित्रशास्त्र के अन्य भागों के साथ संबंध
Cross-reference 1: 1 पतरस 1:3-7— विश्वास की पुनःस्थापना और परीक्षा में उम्मीद का समागम। यह दिखाता है कि पृथक देशों के साथ भी ईश्वरीय आशीर्वाद कैसे स्थिर रहता है, जब विश्वासियों की धारणाएं सत्य की ओर बढ़ती हैं।
Cross-reference 2: यिर्मयाह 2 और 4 अध्याय— अहंकारपूर्ण आशाओं के विरुद्ध परमेश्वर की तप्त आह्वान और विश्वास की पवित्रता।
Cross-reference 3: वहीदा 3:19— पिता की दृष्टि और पुत्र-सम्बन्ध की तात्विकता, जो इस פסוק के पिता-प्रेम के संदेश से जुड़ती है।
विचार-विमर्श के प्रश्न
संक्षेप निष्कर्ष
यिर्मयाह 3:19 हमें परमेश्वर के दयालु पिता-स्वभाव की याद दिलाता है—तब भी मानव-जाति के भीतर विश्वासघात और अविश्वास के कारण वह अपनी योजना में आंशिक विराम पाते हैं। यह दुखद पर उज्जवल है कि परमेश्वर की योजना में पिता-सा अधिकार और देश-राष्ट्र-आकांक्षा एक साथ जुड़ी रहती है, और ईमानदार विश्वास से ही यह संयोजन सुरक्षित रहता है।
उद्धृत भागों के बारे में: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के समान विचार इस प्रकार हैं—परमेश्वर के पिता-प्रेम के स्वरूप और राष्ट्र-आशाओं के बीच संतुलन की चर्चा।