Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 3:4 का संदर्भ और महत्व
यिर्मयाह 3:4 इस समय का प्रमुख प्रश्न उठाता है जब परमेश्वर अपनी बुनियादी करुणा और पित्रिश प्रेम के साथ इजरायलों को पुकारते हैं। इस पात्र पाठ में, परमेश्वर यह स्पष्ट करते हैं कि उन्होंने अपने लोगों के साथ कबूली रिश्ते बनाए हैं—न केवल एक बार, बल्कि निरंतर—ताकि वे उनके पिता और अभिभावक के रूप में भावनात्मक घनिष्ठता को अनुभव करें। यह पद किसी भी आत्म-धारणा से ऊपर उठकर, ईश्वर के महान दयालु प्रेम की पुकार है, जो उभरते हुए विश्वासियों को याद दिलाती है कि वे परमेश्वर के साथ अपने इतिहास को फिर से बन सकते हैं।
केंद्रीय अर्थ
पद का मूल संदेश यह है: परमेश्वर अपने लोगों से पुकार कर पूछते हैं कि क्या वे उन्हें केवल एक तारणहार के रूप में देखते हैं अथवा उनके पिता के रूप में भी मानते हैं—क्या वे उनके साथ एक पारस्परिक, जीवन-भर चलता रिश्ता चाहते हैं। वह यह दिखाते हैं कि उनका प्रेम स्थायी है, भले ही लोग उनकी पथभ्रष्टियों के कारण विपत्ति उठाते रहें। यह एक स्वागत-युक्त आह्वान है कि वे अपनी जवानी की सुंदरियों, अपने पहले प्रेम के समय की स्मृतियों की तरह, पितृ-प्रेम के साथ लौटें।
मुख्य विषय
क्रॉस-रेफरंस और उनका संक्षेप
संक्षेप में, इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि ईश्वर प्रेम के साथ अपने लोगों को संबोधित करते हैं और उन्हें लौट आने का निमंत्रण देते हैं—यह एक सच्चे आत्म-समर্পण और निष्ठा का आह्वान है।
व्यावहारिक चिंतन
आज के पाठ के लिए कार्य-उद्घाटन कुछ सरल हैं: - यह पूछना कि मैं किस संदर्भ में पिता-प्रेम की गहराई को अनुभव कर रहा/रही हूँ? - किन तरीकों से मेरी यात्रा में ईश्वर के साथ पुनः जुड़ाव संभव है—प्रार्थना, पठन-गहनता, समुदायिक सहभागिता? - क्या मेरी व्यक्तिगत उपलब्धियाँ और योजनाएँ परमेश्वर के आदेशों के अनुरूप हैं या स्वतन्त्र-लाभ को अधिक महत्त्व दे रहीं हैं?
संक्षिप्त समेकन
यिर्मयाह 3:4 एक दयालु बुलाहट है जो यह कहता है कि ईश्वर हमारे पिता समान हैं और उनका प्रेम पूर्व-निर्धारित है—भले ही हमारी राहें टेढ़ी क्यों न हों। यह संदेश पुष्ट करता है कि वापस आना, विश्वास में दृढ़ होना, और परमेश्वर के साथ अपने रिश्ते को फिर से गढ़ना संभव है।
नोट: इस प्रवचन में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की संक्षिप्त पंक्तियाँ तब बतौर उद्धरण आवश्यक हो तो उनका उल्लेख किया गया है।
उद्धृत करअंश (संक्षेप):
“यह परमेश्वर का हृदयस्पर्शी आह्वान है, जो कभी नहीं थकता—तुम लौट आओ और मेरे प्रेम में तुम्हारी जवानी फिर से बहाल हो।” (Albert Barnes) • “ईश्वर अपने पागल-भ्रमण से भी, अपनी करुणा से, तुम्हें बुलाते हैं ताकि तुम अपने पुत्र-प्रेम को फिर से अनुभव करो।” (Adam Clarke)