Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
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इस पवित्र पाठ का तत्काल Setting: पलिश्ती और दाऊद
1 शमूएल 17:42 के संदर्भ में पलिश्ती गढ़े हुए मैदान में दाऊद को देखते हैं। दाऊद वह लड़का था जिसे लोग साधारण मानते थे, परोह पलिश्तियों के योद्धाओं के सामने वह छोटा दिखता था; उसका रंग-रूप और सरल बर्ताव भी उसकी युववस्था की निशानी है। पलिश्ती उसे “तुच्छ” बताकर दाऊद की वीरता में आँच लगाते हैं, ताकि भय उत्पन्न किया जा सके। फिर भी यह दृश्य एक गहरे उद्देश्य की ओर इशारा करता है: परमेश्वर के साथ निर्भरता और विश्वसनीयता का मूल्यांकन मानवीय मानकों से नहीं, बल्कि परमेश्वर की शक्ति से होता है।
पाठ से निकलने वाला ईश्वर या विश्वास का संदेश
दाऊद को देखकर स्वर्गीय दृष्टि से परमेश्वर की योजना स्पष्ट होती है कि वह मानवीय निर्बलता के बावजूद भी ईश्वर के लिए प्रयोजन पूरा कर सकता है। यह verses दिखाते हैं कि ईश्वर के काम के लिए मानवीय बाहरी रूप या अनुभूत शक्ति आवश्यक नहीं है; विश्वास, विनय और ईश्वर की अनुमति महत्त्वपूर्ण होते हैं। यह पाठ यह भी सिखाता है कि परमेश्वर द्वारा चुने गए साधारण और असामान्य लोग कब्रों से नहीं, बल्कि उनकी विश्वास-प्रेरित साहस से प्रेरित होकर महान कार्य कर जाते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अन्य से मिलते-जुलते बाइबली उद्धरण
यह पाठ हमें अन्य घटनाओं से भी प्रेरित करता है कि परमेश्वर किस प्रकार सामान्य व्यक्ति को शक्तिशाली बनाता है—जैसे दाऊद की आँखों में निर्भय विश्वास और उनके हृदय की प्रतिबद्धता। ध्यान दें कि आगमन और चयन की धारणा पर जो संदेश है, वह कुल मिलाकर इसे सतही रूप से नहीं देखते, बल्कि विश्वास के स्रोत को केंद्रित करते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षिप्त अर्थ
— अन्य उदाहरण जहाँ परमेश्वर ने बाहरी रूप से कमतर दिखने वाले व्यक्तियों को बड़े कार्य दिए: धातु की कुटिल चाल से नहीं, बल्कि विश्वास से कार्य होता है। यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर का चयन मानवीय मानकों से परे है।
— दाऊद के विरूद्ध गडगड़ाहट के समय उसकी आशा केवल परमेश्वर के वचनों और वचनबद्धता पर थी।
आज के लिए अनुप्रयोग
हममें से प्रत्येक कभी-कभी ऐसी स्थिति का सामना करता है जहाँ दृष्टि में हम कमज़ोर दिखते हैं—बावजूद इसके परमेश्वर की सहायता से हम बड़े उद्देश्यों को सिद्ध कर सकते हैं। चुनौतियाँ आयें, तब भी निराश न हों; विश्वास को दृढ़ करें, परमेश्वर की योजना में भागीदारी करें, और देखें कि कैसे वह हमारे अन्दर से शक्ति प्रकट करता है।
संक्षेप सार
यह ग्रंथ हमें बताता है कि परमेश्वर के साथ निर्भरता में मानवीय रूप-रेखा महत्त्वहीन हो जाती है। दाऊद की मामूली उपस्थिति और पलिश्ती की अहमीयत में असमानता को देखकर भी ईश्वर ने उसकी सहायता से महान कार्य कराया। यह विश्वास की वास्तविक ताकत है: परमेश्वर जिसको चुन ले, वही असंभव को संभव बनाता है।
मौलिक उद्धरणों के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से उपलब्ध शाब्दिक शब्द-उद्धरण यहां संक्षेप रूप से जोड़े गए हैं:
— "God chooses the weak things of the world" (Adam Clarke संदर्भ में विशेष रूप से सामान्यीकृत विचार).
— "The probability of man is not the measure of God’s work" (Barnes के सिद्धांतगत प्रवचनों के अनुरूप).
— "God often looks to the heart, not to the outward appearance" (Henry के विश्लेषण के अनुरूप सार).