Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 17:1 1 शमूएल 17:2 1 शमूएल 17:3 1 शमूएल 17:4 1 शमूएल 17:5 1 शमूएल 17:6 1 शमूएल 17:7 1 शमूएल 17:8 1 शमूएल 17:9 1 शमूएल 17:10 1 शमूएल 17:11 1 शमूएल 17:12 1 शमूएल 17:13 1 शमूएल 17:14 1 शमूएल 17:15 1 शमूएल 17:16 1 शमूएल 17:17 1 शमूएल 17:18 1 शमूएल 17:19 1 शमूएल 17:20 1 शमूएल 17:21 1 शमूएल 17:22 1 शमूएल 17:23 1 शमूएल 17:24 1 शमूएल 17:25 1 शमूएल 17:26 1 शमूएल 17:27 1 शमूएल 17:28 1 शमूएल 17:29 1 शमूएल 17:30 1 शमूएल 17:31 1 शमूएल 17:32 1 शमूएल 17:33 1 शमूएल 17:34 1 शमूएल 17:35 1 शमूएल 17:36 1 शमूएल 17:37 1 शमूएल 17:38 1 शमूएल 17:39 1 शमूएल 17:40 1 शमूएल 17:41 1 शमूएल 17:42 1 शमूएल 17:43 1 शमूएल 17:44 1 शमूएल 17:45 1 शमूएल 17:46 1 शमूएल 17:47 1 शमूएल 17:48 1 शमूएल 17:49 1 शमूएल 17:50 1 शमूएल 17:51 1 शमूएल 17:52 1 शमूएल 17:53 1 शमूएल 17:54 1 शमूएल 17:55 1 शमूएल 17:56 1 शमूएल 17:57 1 शमूएल 17:58


मतबल का संकेत: शाऊल को दाऊद के बारे में असमंजस और संदेश
सीधी बात का मतलब: जब शाऊल ने पलिश्ती दानव से भिड़ने वाले दाऊद को अपनी आंखों से देखा, वह जानना चाहता था कि यह युवक किस का पुत्र है। अब्नेर ने स्पष्ट किया कि राजा नहीं जानता, और यह पहेली बन गई कि वह युवा कौन है और किस कारण उसे यह भूमिका मिली है।
संदर्भ पृष्ठभूमि
यहोवा के राज्य के बीच दाऊद का रोल अहम मोड़ पर है। यह दृश्य शाऊल की व्यक्तिगत असमंजसता और राजनीतिक जोखिमों को सामने लाता है: क्या एक नन्हे लड़के के साथ पलिश्तियों के विरुद्ध राष्ट्र की उम्मीद लगाई जाए? संपत्ति, सिंहासन और युद्ध-निर्णय की दृष्टि से यह प्रश्न तत्कालीन नेताओं के लिए चुनौती बन गया था। अब्नेर वह अधिकारी है जो राजसी कार्यालय और वास्तविकता के बीच दूरी को संभाल रहा है।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
कथात्मक थीम और अनुसंधानीय संकेत
यह पद शासकीय निर्णय और नेतृत्व-परख की एक प्रचलित समस्या का चित्र बनाता है—किसी भी समय, कौन सा व्यक्ति और कैसे भरोसेमंद है, यह बताने में अनुमान से बचना चाहिए। साथ ही, यह दृश्य यह भी इंगित करता है कि परमेश्वर के चुनाव पर मानवीय दृष्टिकोण कितना गुप्त रहता है, और कभी-कभी बाहरी सतह से भिन्न वास्तविकता होती है।
क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप में)
1) एक अन्य प्रेरित-नाटक में ऐसे क्षण मिलते हैं जहाँ शक्तिशाली राजा परंपरागत सुरक्षा-निर्णयों के बजाय आस्था और ईमानदारी पर निर्भर होते हैं।
2) एक समान कथा-तत्व में यह दिखाया गया है कि द uitz; (संकेत) के समय में परमेश्वर की योजना मानव सोच से अलग दिशा दिखाती है।
3) पवित्र पत्र में नेता और चिह्नों के बीच स्पष्टता की मांग मिलती है—झूठी गम्भीरता से नहीं, बल्कि सत्य और दया के साथ निर्णय लेना चाहिए।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
संरेखित निष्कर्ष
यह पंक्ति शाऊल तथा अब्नेर के बीच जानकारी की प्यास और निर्णय की जिम्मेदारी की तस्वीर प्रस्तुत करती है। परमेश्वर की योजनाओं में मानव अनुमान सीमित होते हैं; सच्ची नेतृत्व शक्ति सत्य को पहचानने और सही मार्ग चुनने में निहित है।