Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 23:10 का संक्षिप्त संदर्भ और अर्थ
यशायाहवंश के साहित्य में यह वाक्य नील नदी के क्षेत्र की दिप्रस्थता और तलाशी की तीखी भाषा है। महत्वपूर्ण शहरों और राष्ट्रों पर परमेश्वर की न्याय या चेतावनी के अनेक भागों में तर्शीश को एक संकेतक के रूप में प्रस्तुत किया गया है कि वे अपनी निर्भीक आक्रामकता परimer नज़र डालें। यहाँ कहा गया है कि "हे तर्शीश के निवासियों, नील नदी के समान अपने देश में फैल जाओ, अब कुछ अवरोध नहीं रहा"—यह एक आचरण-स्वीकारक चेतावनी है कि राज्ययोजना में बाधाओं का अंत हो गया है और वे अपने-अपने सीमाओं के बाहर फैलने को आमंत्रित हैं।
मुख्य अर्थ
इस पद में परमेश्वर तर्शीश (टारसीस के लिए एक मध्यपूर्वी नगर) की राजनीतिक उन्नति और वैश्विक विस्तार की प्रवृत्ति को चेतावनी के साथ कैद करता है। नील नदी जैसी विशालता का प्रयोग यहाँ शक्ति-प्रदर्शन के प्रतीक के रूप में है ताकि यह संदेश दें कि जब लोग अपनी सेनाओं और व्यापार के अतिक्रमण पर निर्भर रहते हैं, तब परमेश्वर के नियमन से वे अनजाने में पतन की राह पकड़ लेते हैं। यह विरोधाभास स्पष्ट करता है कि अस्थिरता और दहशत तब बनती है जब सभ्यताएँ अपने परमेश्वर-निर्दिष्ट सीमाओं को छोड़ देती हैं।
दो-तीन मुख्य विषय
संबद्ध पदों से संयोग
निम्न विषय-वस्तु अन्य सूक्तियों के साथ सम्बद्ध हैं जिन्हें समझना उपयोगी है:
इन क्रॉस-रेफरेंसेस का लक्ष्य यह स्पष्ट करना है कि विशालता, शक्ति और विस्तार के बावजूद परमेश्वर की नियति सर्वोपरि है और मानव-योजना उसकी सीमा में है।
व्यावहारिक चिंतन
लगभग वर्तमान विश्व-परिपाटी में भी हम भौतिक विस्तार के मोह में पड़ जाते हैं— नए क्षेत्र, अधिक संसाधन, तेज शस्त्र। इस संदेश से याद रहे कि दुष्कर्म और बढ़त की संख्या कभी शांति नहीं लाती; सच से भटकना ही विपत्ति को आमंत्रित करता है। आत्म-नियंत्रण, नैतिक सिद्धांतों पर अडिग रहना, और परमेश्वर की दिशा-निर्देश অনুযायन रखना सही मार्ग है।
सार-सारांश
यशायाह 23:10 तर्शीश की महत्त्वाकांक्षा के प्रति परमेश्वर की चेतावनी का पाठ है: विस्तार के पीछे की सत्ता अगर परमेश्वर की सीमाओं को दरकिनार कर दे, तो परिणाम पतन के रूप में दिखते हैं। यह उद्धारक संदेश हमें बताता है कि विश्व-वैभव के पीछे नहीं, बल्कि ईश्वर के नियमों के अनुरूप जीवन जीना सर्वोच्च है।
उद्धरणों के नोट
केवल यदि उपलब्ध हों, तो नीचे उल्लेखित तीन पवित्र-दृष्टांतों के सार्वजनक-उद्धरण संलग्न किए जाएंगे: मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के शाब्दिक अंश।
यद्यपि नीचे सीधे उद्धरण नहीं दिए जा रहे, उनके विचार से यह पाठ संरक्षित रहता है: मार्गदर्शक तत्वों में—आनुवंशिक चेतावनी और नैतिक उत्तरदायित्व के विचार स्पष्ट रहते हैं।