यशायाह 23:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसके व्यापार की प्राप्ति, और उसके छिनाले की कमाई, यहोवा के लिये पवित्र की जाएगी; वह न भण्डार में रखी जाएगी न संचय की जाएगी, क्योंकि उसके व्यापार की प्राप्ति उन्हीं के काम में आएगी जो यहोवा के सामने रहा करेंगे, कि उनको भरपूर भोजन और चमकीला वस्त्र मिले।

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यशायाह 23:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 23:18 पर टिप्पणी — सरल अर्थ

इस पद का संक्षिप्त संदेश यह है: व्यापारी की कमाई और लूट-खसोट जो संसार की पूँजी बनती है, वह परमेश्वर के लिये पवित्र होगी; वह न तो भण्डार में रहेगी न संचय का साधन बनेगी। बल्कि उसकी आय उन लोगों के काम में समर्पित होगी जो यहोवा के सामने रहा करते हैं, ताकि उन्हें संतोषजनक भोजन और उत्तम वस्त्र मिल सकें।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यशायाह के होनेवाले संदेश में मिस्र, बiblian राजनीति और व्यापार-प्रणालियों का समावेश है। इस वचन में यहूदा-राजाओं की आर्थिक-व्यवस्थाओं पर प्रभु-नियम का संकेत है: जो कुछ व्यापार से आता है, वह पृथ्वी के धन के बजाय यहोवा के कामों के लिए उपयोग में लाया जाए। यह तब भी सत्य था जब लोग धन के कारण आत्म-स्वीकार करते थे, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि में असली धन वही है जो उसकी सेवा में जाता है।

व्याख्या के मुख्य बिंदु

  • पवित्र बनना: "पवित्र की जाएगी" यह दर्शाता है कि व्यापार से मिली आय का उद्देश्य शुद्ध और समर्पित होना चाहिए, न कि भोग-विलास।
  • केवल भण्डार न करना: यहोवा के राज्य के अनुरूप, धन के अस्थिर स्वभाव के विरुद्ध एक चेतावनी है कि सांसारिक संपत्ति अनिश्चित है; उसे परमेश्वर के उपयोगार्थ रखना चाहिए।
  • उपयोग-लक्ष्य: आय को उन लोगों तक पहुंचना है जो यहोवा के सामने रहते हैं और उनके लिए जीवन-यापन के साधन बनना चाहिए—भाईचारे का हिस्सा, भोजन और वस्त्र की पूर्ति।

हिंदी मौलिक व्याख्या (संयोजनित सार)

यह वचन एक सामाजिक-आर्थिक नैतिकता का संदेश देता है: धन यदि आता है, तो उसे ईश्वर के साथ-साथ समाज की जरूरतों पर भी केंद्रित किया जाए। परमेश्वर का लक्ष्य है कि विश्वासी रोटी और कपड़े जैसे दैनिक आवश्यकताओं के साथ-साथ दूसरी आत्मिक जरूरतों में भी एक उदार और सत्यनिष्ठ जीवन जिएँ। ध्यान दें कि यह बात सीधे यह नहीं कहती कि व्यवसाय के लाभ सेवादार बनें, पर यह कहती है कि धन का सही उपयोग परमेश्वर की महिमा के लिए होना चाहिए।

कँगालियाँ (Cross-References) और उनका छोटा स्पष्टीकरण

  • यशायाह 1:29 — जो धन-साम्राज्य में सुख-समृद्धि देखते हैं वे अंततः दया से दूर हो जाते हैं; यहाँ धन-उपयोग की नैतिकता पर बल है।
  • यPacket 2:9 (उद्धृत उदाहरण) — धन के स्थान पर निम्न-आय के प्रबंध का मूल्य; परमेश्वर आवश्यकता-आधारित तृप्ति चाहते हैं।
  • 1 तीमुथिय 6:7-8 — हमें याद दिलाता है कि धन का दुर्बल आकर्षण तभी कम होता है जब हम आवश्यकताओं के अनुसार सन्तुष्ट रहें, परमेश्वर-परक जीवन बनाये रखें।

चिह्नित अनुभागों से जुड़े पाठ

यशायाह के इसी भाग में व्यापार, संपत्ति और समाज के कल्याण के विचार मिलते हैं। यह संदेश व्यक्त करता है कि धन-सम्पदा और ईश्वर का राज्य अलग नहीं हैं, बल्कि एक सही क्रम में धन का प्रयोग उसी राज्य की स्थापना में होना चाहिए।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

जो कमाई हमारी होती है, उसे पवित्र बनाकर सृष्टिकर्ता के कामों के लिए खर्च करें। भण्डार-तृष्णा से बचें और जरूरतमंदों के साथ साझा करना सीखें; इससे दैनिक भोजन, कपड़े आदि की जरूरतें पूरी होंगी और जीवन का राष्ट्रीय-आचार धारा मजबूत होगी।

नोट

इस प्रवचन में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के शब्द सीधे उद्धृत नहीं किए गए हैं; यदि आवश्यक हुआ तो उनके विचार सामान्य समिकल्प में सम्मिलित किए गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 23:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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